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रासुका और जिलाबदर करने की चेतावनी! फिर भी २७ सेंपल में से एक की भी नहीं आई रिपोर्ट

Om Prakash Pathak

Publish: Aug 22, 2019 17:28 PM | Updated: Aug 22, 2019 17:28 PM

Sidhi

मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई....
रासुका और जिलाबदर करने की चेतावनी! फिर भी २७ सेंपल में से एक की भी नहीं आई रिपोर्ट, खाद्य औषधि विभाग ने मिलावटखोरों के खिलाफ २७ जुलाई से शुरू किया था अभियान, दूध और दूध से बने उत्पादों के नमूने लेकर जांच के लिए भोपाल स्थित लैब भेजे, रिपोर्ट अब तक नहीं आई

सीधी। भिंड-मुरैना जिले में सिंथेटिक दूध मिलने के बाद मिलावट खोरों के खिलाफ चलाई गई मुहिम के तहत खाद्य एवं औषधि विभाग ने जिले में दूध और दूध से बने उत्पादों के २७ सेंपल लिए, लेकिन अब तक एक भी जांच रिपोर्ट नहीं आई। जबकि नियमानुसार १४ दिन मे रिपोर्ट मिल जानी थी। यह स्थिति तब है जब खुद मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री अलग-अलग मौके पर खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालो के खिलाफ रासुका और जिलाबदर की कार्रवाई के निर्देश दे चुके हैं।
सीधी जिले मे २७ जुलाई से मुहिम शुरू हुई थी। इसके तहत दूध व मावे, घी और अन्य पदार्थों के सेंपल लिए थे। सभी की जांच के लिए भोपाल स्थित स्टेट फूड लैबोरेटरी भेजा था। स्वास्थ्य मंत्री तुसलीराम सिलावट द्वारा चार दिन में जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने के दावे के बावजूद एक भी सेंपल की रिपोर्ट विभाग को प्राप्त नहीं हुई। अधिकारी तर्क दे रहे हैं कि पूरे प्रदेश में एक लैब होने से रिपोर्ट आने मे वक्त लग रहा है। सिस्टम की ढिलाई का फायदा मिलावटखोर उठा रहे हैं।
अब तक लोग हजम कर गए मिलावट-
शहर में खाद्य पदार्थ का सेंपल लेने के बाद उसमें मिलावट है या नहीं, इसका अधिकृत तौर पर पता रिपोर्ट आने के बाद ही चलता है। तब तक दुकानदार खाद्य सामग्री बेचते रहते हैं। यदि रक्षाबंधन के त्यौहार से पहले खाद्य पदार्थों के सेंपल की रिपोर्टस आती तो अधिकारियों को कार्रवाई करने मे आसानी होती रहती। क्योंकि त्यौहार के लिए मिठाई की जमकर खरीदी हुई। ऐसे मे तय है कि रिपोर्ट आने से पहले ही लोग मिलावट हजम कर गए।
शासन स्तर पर किए गए चार दावे और हकीकत-
दावा- १:
२२ जुलाई को स्वास्थ्य मंत्री तुसलीराम सिलावट ने कहा था कि यूरिया जैसे घातक पदार्थ मिलाकर सिंथेटिक दूध और उससे मावा, पनीर आदि उत्पाद बनाने व बेचने वालों के विरूद्ध रासुका के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हकीकत-
अब तक जिले मे ऐसी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
दावा- २
२४ जुलाई को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मिलावटी दूध और उसके उत्पादों का व्यापार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
हकीकत-
अधिकारियों ने दूध, मावे और घी के कुल १६ सेंपल लिए। जब तक रिपोर्ट नहीं आते तब तक अधिकारियों के हांथ बंधे हुए हैं।
दावा-३
२६ जुलाई को स्वास्थ्य मंत्री तुसलीराम सिलावट ने समीक्षा बैठक मे संभागायुक्त, कलेक्टर, डीआईजी और एसपी को खाद्य पदार्थो में मिलावट करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए कहा था।
हकीकत-
इस तरह की कार्रवाई फिलहाल यहां नजर नहीं आई है।
दावा- ४
२७ जुलाई को स्वास्थ्य मंत्री ने स्टेट फूड लैबोरेटरी का निरीक्षण किया। यहां पर उन्होने प्रदेशभर से लिए गए दूध, मावा, पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादो के फूड इंस्पेक्टर द्वारा जमा कराए गए सेंपल की जांच रिपोर्ट १४ दिन की बजाय ४ दिन में देने के निर्देश दिए।
हकीकत-
मुहिम के तहत लिए गए २७ सेंपल मे से एक की भी रिपोर्ट अब तक प्राप्त नहीं हुई है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी मंजू वर्मा से सीधी बात-
सवाल- जिले मे अभियान के दौरान अब तक कितने खाद्य पदार्थो के सेंपल लिए गए।
जवाब- हमने कुल २७ पदार्थों के सेंपल लिए थे। इन्हें जांच के लिए भोपाल स्थित लैब भेजा गया है।
सवाल- अब तक कितने सेंपल की रिपोर्ट प्राप्त हुई है।
जवाब- फिलहाल एक भी सेंपल की रिपोर्ट नहीं मिली है।
सवाल-रिपोर्ट आने मे देरी की वजह क्या है।
जवाब- पूरे प्रदेश मे केवल भोपाल मे ही लैब है। ऐसे मे प्रदेश के सभी जिलो से करीब डेढ हजार सेंपल भेजे गए हैं। वहीं भोपाल के अलावा अन्य प्रदेशो के लैबो मे भी सेंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं, जिसके कारण विलंब हो रहा है।
सवाल- समस्या निराकरण के लिए शासन-प्रशासन के स्तर पर कोई प्रयास हुए हैं।
जवाब- कुछ सेंपल जांच के लिए मुंबई और गुजरात के आणंद में स्थित अमूल की लैब में भेजे गए। उम्मीद है कि इससे जल्द रिपोर्ट मिलने लगेगी।