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खून की कमी से जूझ रहे दो कैदी

Om Prakash Pathak

Publish: Nov 11, 2019 19:40 PM | Updated: Nov 11, 2019 19:40 PM

Sidhi

खून की कमी से जूझ रहे दो कैदी, पीलिया व रक्त अल्पता के बाद भी जिला चिकित्सालय मे नहीं मिल पा रहा रक्त, एक सप्ताह से गंभीर हालत जिला चिकित्सालय मे भर्ती हैं दो कैदी

सीधी। सीधी जेल मे बंद कैदियो मे खून की कमी हो रही है। खून की कमी से बीमार दो कैदियों को विगत एक सप्ताह से ज्यादा समय से उपचार के लिए जिला चिकित्सालय मे भर्ती कराया गया है किंतु अस्पताल प्रवंधन कैदियों को खून नहीं दे पा रहा है, जिसके कारण कैदियों की हालत गंभीर हो गई है, खून की कमी के साथ वे पीलिया जैसी गंभीर बीमारी से भी पीडि़त हो चुके हैं, उसके बाद भी अस्पताल प्रवंधन खून की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं कर पा रहा है। यह लापरवाही कैदियों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।
उल्लेखनीय है कि सीधी जेल मे कैदियों को सही आहार नहीं नसीब हो पा रहा है, जिसके कारण कैदियों के स्वास्थ्य मे लगातार गिरावट हो रही है। बीमार पडऩे पर कैदियों को जिला चिकित्सालय भेज दिया जाता है किंतु जिला चिकित्सालय मे भी उपचार की अच्छी व्यवस्था न होने के कारण कैदियों के स्वास्थ्य मे सुधार नहीं हो पा रहा है।
इन कैदियों की हालत गंभीर-
सिटी कोतवाली अंतर्गत गोरियरा गांव निवासी राजेंद्र कोल पिता सुदामा कोल ३१ वर्ष पारिवारिक विवाद मे एक युवक पर प्राणघातक हमला कर दिया गया था, जिस मामले मे न्यायालय के द्वारा कारावास की सजा सुनाई गई। जो विगत करीब तीन वर्ष से पडऱा जेल मे बंद है। अचानक उसका स्वास्थ्य खराब हो गया, हालत विगडऩे पर उसे जिला चिकित्सालय लाकर ३० अक्टूवर को भर्ती कराया गया, जांच के दौरान शरीर मे खून की कमी पाई गई, किंतु उसे अस्पताल प्रवंधन खून उपलब्ध नहीं करा पाया, जिससे अब उसके शरीर मे सूजन व पीलिया रोग से पीडि़त हो चुका है। इसी तरह देवसर थाना अंतर्गत कारी गांव निवासी तुलसी केवट पिता जिरदोहन केवट ३४ वर्ष जमीनी विवाद मे एक युवक पर प्राणघातक हमला कर दिया, जिसे भादवि की धारा ३०७ मे कारावास की सजा सुनाई गई, जिसे सिंगरौली जिले के पचौर जेल मे बंद कर दिया गया था, जिसे विगत माह सीधी पडऱा जेल मे स्थानांतरित कर दिया गया। इसकी भी हालत विगडऩे पर उपचार के लिए जिला चिकित्सालय मे भर्ती करा दिया गया। जांच के दौरान खून की कमी व पीलिया रोग पाया गया, किंतु इसे भी खून नहीं मिल पाने के कारण स्वास्थ्य मे सुधार होने की जगह लगातार विगड़ती जा रही है।
परिजनों को नहीं है जानकारी-
कैदियों के बीमार होने की जानकारी उनके परिजनों को नहीं है, जिसके कारण रक्त देने के लिए परिजन भी आगे नहीं आ पा रहे हैं, यदि समय पर रक्त नहीं उपलब्ध हुआ जिससे अप्रिय घटना घटित हो सकती है, ऐसे मे परिजनों के हंगामे का सामना प्रशासन को करना पड़ सकता है।

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