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पीने लायक जल की घटती मात्रा दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती

Manoj Kumar Pandey

Publish: Sep 13, 2019 21:26 PM | Updated: Sep 13, 2019 21:26 PM

Sidhi

महाविद्यालयीन छात्र इकाई के तत्वाधान में पर्यावरण एवं जल संरक्षण जागरूकता अभियान जारी

सीधी। महाविद्यालयीन छात्र इकाई सीधी के तत्वाधान में आयोजित पर्यावरण एवं जल संरक्षण जागरूकता अभियान लगातार जारी है। अभियान के नवम दिवस का कार्यक्रम ज्योत्सना पब्लिक स्कूल सीधी में अमोल सिंह प्राचार्य सरस्वती जमोड़ी के मुख्य आतिथ्य, सोहिल सोनी संचालक महाविद्यालयीन छात्र इकाई सीधी के विशिष्ट आतिथ्य एवं बालेंदु द्विवेदी प्राचार्य ज्योत्सना स्कूल की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने अपने उद्वोधन में कहा कि जल प्रदूषण एवं पीने लायक जल की घटती मात्रा दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। पर्यावरण से जुड़ी इस तरह की समस्याओं एवं खतरों को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता तो जाहिर की जाती है, मगर अब तक इस दिशा में कोई खास पहल नहीं हो सकी है। परिणाम है कि बढ़ती जनसंख्या के कारण तेज औद्योगिकीकरण और अनियोजित शहरीकरण बड़ रहा है जो बढ़े और छोटे पानी के स्रोतों में ढेर सारा कचरा छोड़ रहे हैं जो अंतत: पानी की गुणवत्ता को गिरा रहा है। जल में ऐसे प्रदूषकों के सीधे और लगातार मिलने से पानी में उपलब्ध खतरनाक सूक्ष्म जीवों को मारने की क्षमता वाले ओजोन के घटने के कारण जल की स्व शुद्धिकरण क्षमता घट रही है। इससे जल की रासायनिक, भौतिक और जैविक विशेषताएं बिगड़ रही हैं जो पूरे विश्व में सभी पेड़-पौधों, मानव और जानवरों के लिए बहुत खतरनाक है। पशु और पौधों की बहुत सारी महत्वपूर्ण प्रजातियां जल प्रदूषकों के कारण खत्म हो चुकी हैं। ये एक वैश्विक समस्या है जो विकसित और विकासशील दोनों देशों को प्रभावित कर रही हैं। खनन, कृषि, मछली पालन, स्टॉक ब्रीडिीग, विभिन्न उद्योग, शहरी मानव क्रियाएं, शहरीकरण, निर्माण उद्योगों की बढती संख्या, घरेलू सीवेज आदि के कारण बड़े स्तर पर जल एवं जलस्रोत प्रदूषित हो रहे हैं। पूरे विश्व के लिए जल प्रदूषण एक बड़ा पर्यावरणीय और सामाजिक मुद्दा है। यह अपने चरम बिंदु पर पहुंच चुका है। राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान नागपुर ने चेताया है कि नदी जल का 70 प्रतिशत स्तर पर प्रदूषित हो गया है। भारत की मुख्य नदी जैसे गंगा, ब्रह्मपुत्र, सिंधु, यमुना आदि बड़े पैमाने पर प्रभावित हो चुकी हैं। भारत में मुख्य नदी खासतौर से गंगा भारतीय संस्कृति और विरासत से अत्यधिक गहरे रूप में जुड़े हुई है। आमतौर पर लोग जल्दी सुबह नहाते हैं और किसी भी व्रत या उत्सव में गंगा जल को देवी देवताओं को अर्पण करते हैं। पूजा को संपन्न करने के मिथक में गंगा में पूजा विधि से जुड़ी सभी सामग्री एवं अस्थि विसर्जन कर देते हैं। कार्यक्रम के अंत में स्कूल छात्र-छात्राओं को जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई।