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विद्यालय और छात्रावासों में पदस्थ भृत्यों को वर्षों से नहीं मिल रहा पारिश्रमिक

Manoj Kumar Pandey

Publish: Jan 22, 2020 20:29 PM | Updated: Jan 22, 2020 20:29 PM

Sidhi

मामला आदिवासी जनपद पंचायत कुसमी का

सीधी/पथरौला। जिले के एक मात्र आदिवासी जनपद पंचायत कुसमी अंतर्गत आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित किए जाने वाले छात्रावासों सहित विद्यालय में पदस्थ भृत्यों के परिवार की होली, दीवाली सहित अन्य त्यौहार वर्षों से फीके बीत रहे हंै। आलम ये है कि किसी भृत्य को दो साल तो किसी को तीन साल से विभाग द्वारा पारिश्रमिक नहीं दिया गया है। जबकि विभाग द्वारा महीने में एक संस्था के पीछे लाखों रुपए का बजट खपाया जा रहा है, और इसी बजट का आला-अधिकारियों द्वारा जमकर बंदरबांट भी किया जा रहा है। किंतु संस्था की गंदगी साफ करने वाले भृत्य जो महज दो-चार हजार रुपए प्रति माह में शासन का काम करते हैं और इसी से अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं उनको सालों से पारिश्रमिक नहीं दिया गया। फिर उनका परिवार कैसे चलता होगा इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन जिम्मेदार इनके लिए हमेशा बजट का रोना ही रोते हैं।
ऐसा ही एक मामला गत दिवस जनपद अंतर्गत संकुल कंेद्र पोड़ी के हाई स्कूल बस्तुआ का प्रकाश में आया है। जहां विद्यालय सहित जूनियर आदिवासी बालक छात्रावास मे पदस्थ भृत्यों ने बताया कि हम लोगों का पारिश्रमिक विभाग द्वारा सालों से नहीं दिया गया है। जिसके कारण परिवार के भरण पोषण में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बताया गया की अधिकारियों के पास जाते हैं तो उनके द्वारा बजट का रोना रोया जाता है। साथ ही पारिश्रमिक के संबंध में जानकारी मांगने पर गोलमोल जवाब देते हैं।
गायब हो गई मजदूरी-
इतना ही नहीं विद्यालय में पदस्थ एक दैनिक वेतन भोगी भृत्य ने बताया कि जुलाई 2010 से इस विद्यालय में पदस्थ हूं। तथा नबंवर 2017 से दिसंबर 2018 तक यानी 14 माह का मानदेय जो की 7 हजार 3 सौ 25 रुपए प्रति माह के हिसाब से मिलना था। लेकिन वह 14 माह का मानदेय अधिकारियों द्वारा गायब कर दिया गया है। जो तकरीबन एक लाख रुपए होती है। यह राशि मेरे खाता में नहीं पहुंची है। लेकिन अधिकारियों द्वारा कहा जाता है कि मानदेय भेज दिया गया है। बताया की उपरोक्त की शिकायत मेरे द्वारा सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई, सहायक आयुक्त, आहरण संवितरण कंेद्र कुसमी सहित संकुल प्राचार्य पोड़ी से भी गई थी। किंतु किसी के द्वारा सार्थक पहल नहीं की गई। बल्कि मुझे जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा गोलमोल जवाब देते हुए सीधी से कुसमी भटकाया जाता रहा है। आज दिवश तक वह राशि मेरे खाता में नहीं पहुंच पाई है, जिसके कारण परिवार भुखमरी के कगार पर है। भृत्यों द्वारा जिला कलेक्टर से पारिश्रमिक दिलाए जाने की गुहार लगाई है।
सुनाया दर्द-
..........मैं वर्ष 2015 से विद्यालय में भृत्य के पद पदस्थ हूं। पारिश्रमिक के तौर पर शासन द्वारा मुझे महज दो हजार रुपए प्रति माह दिया जाता है। लेकिन विगत 42 माह से पारिश्रमिक के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं दिया गया है। और न ही पारिश्रमिक में बृद्धि हुई है। परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
बुद्धसेन यादव, भृत्य
..........मैं वर्ष 2010 से दैनिक वेतन भोगी श्रमिको के रूप में विद्यालय में पदस्थ हूं। 73 सौ रुपए मिलता है लेकिन मेरा 14 माह का लाख रुपए मानदेय गायब कर दिया गया है। जिसकी शिकायत भी सीएम हेल्पलाइन से लेकर संकुल प्राचार्य तक किया, लेकिन निराकरण नहीं हुआ। अब तो परिवार चलाना मुश्किल है।
मदनलाल पनिका, भृत्य
..........मैं मार्च 2018 से बालक छात्रावास बस्तुआ में भृत्य के पद पर कार्यरत हूं। लेकिन तकरीबन एक साल से पारिश्रमिक के तौर पर शासन द्वारा दिया जाने वाला तीन हजार रुपए प्रति माह मुझे नहीं दिया गया है। जिसके कारण मैं अपने बीमार दादा की दवा नहीं करवा पाया और उनकी मौत हो गई है।
भैयालाल पनिका, भृत्य
..........मैं गत 2019 से जूनियर आदिवासी बालक छात्रावास बस्तुआ में भृत्य के पद पर कार्यरत हूं। मुझे दो हजार रुपए प्रति माह दिया जाने वाला पारिश्रमिक एक साल से नहीं मिला है। अधिकारियों द्वारा बजट नहीं होने की बात कही जाती है। हम परेशान हैं। परिवार का भरण पोषण कैसे करें।
शिवराज सिंह, भृत्य

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