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जल संरक्षण को लेकर बेपरवाह जिम्मेदार

Manoj Kumar Pandey

Publish: Oct 19, 2019 20:42 PM | Updated: Oct 19, 2019 20:42 PM

Sidhi

कलेक्टर के निर्देश के बाद भी नहीं बंद किए जा रहे स्टाप डेम के गेट, नदी नालों में अरबों की कीमत से बने स्टाप डेम में नहीं रोका जा रहा पानी, कलेक्टर द्वारा दो दिवस में गेट बंद कराए जाने के उपयंत्रियों व ग्राम पंचायत के सचिवों को दिए गए थे निर्देश

सीधी। जिले के नदी नालों में वर्षा का जल संरक्षित करने के लिए अरबों की राशि खर्च कर बड़ी संख्या में स्टाप डेम तो बना दिए गए हैं, लेकिन स्टाप डेम के गेट बंद न किए जाने से इनकी उपयोगिता सावित नहीं हो पा रही है। वहीं स्टाप डेम का निर्माण गुणवत्ता विहीन न होने से भी ज्यादातर स्टाप डेम उपयोगिता विहीन पड़े हुए हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी द्वारा गत १५ अक्टूबर को एक आदेश जारी कर महात्मा गांधी नरेगा सहित अन्य योजनाओं से बने स्टाप डेम के फाटक लगाकर पानी रोकने के आदेश जारी किया था। कलेक्टर चौधरी ने समस्त सहायक यंत्री, उपयंत्री और ग्राम पंचायत सचिवों को आदेशित किया था कि वर्षा ऋ तु समाप्त हो चुकी है, खुले हुए स्टाप डेम में पानी रोकने के लिए शटर दो दिवस में लगाएं या ओपनिंग से एक मीटर ऊंचाई तक कांक्रीट से बंद करें। त्वरित कार्रवाई हेतु बोरी में मिट्टी भरकर बंधान करें। स्टाप डेम को बांधकर सभी उपयंत्रियों को फोटो डालकर अवगत भी कराने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही स्टाप डेम खुले पाए जाने पर संबंधित उपयंत्री और सचिव के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की बात कही गई थी। लेकिन कलेक्टर के आदेश की समय सीमा समाप्त हो चुकी है और नदी नालों के स्टाप डेम पूर्व की भांति खुले पड़े हुए हैं, जिससे यह प्रतीत होता है कि जिले का मैदानी अमला कलेक्टर को आदेश को भी तब्ज्जो नहीं दे रहा है।
कितने स्टाप डेम हिसाब नहीं रख पा रहे जिम्मेदार-
जिले के नदी नालों में स्टाप डेम के निर्माण पर पानी की तरह पैसा बहाया गया है। जल संरक्षण एवं नदी नालों का पानी रोकने के नाम पर विभिन्न योजनाओं से अरबों रूपए खर्च कर हजारों की संख्या में स्टाप डेम के निर्माण कराए गए थे, विगत एक दशक में विभिन्न योजनाओं के मद से स्टाप डेम का निर्माण कराया गया था, कितने स्टाप डेम बने इसका हिसाब तक जिम्मेदार अधिकारी नहीं बता पा रहे हैं। विभागीय सूत्रों की माने तो वाटरशेड, माइक्रोप्लान, मनरेगा सहित अन्य योजनाओं के मद से स्टाप डेम के निर्माण करवाए गए थे।
लगातार घट रहा जिले का जल स्तर-
जिले के घटते जल स्तर को बढ़ाने के लिए नदी नालों में स्टाप डेम व बोरी बंधान का निर्माण कराया गया था, ताकि वर्षा के जल को संरक्षित किया जा सके और जिले का गिरता जल स्तर ऊपर आ सके, लेकिन स्टाप डेम के गेट वर्ष भर खुले रहने से इनकी उपयोगिता सिद्ध नहीं हो पा रही है।