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पुलिस ने प्रधानाध्यापकों एवं अध्यापकों को पढ़ाया नियमों का पाठ

Manoj Kumar Pandey

Publish: Sep 07, 2019 20:56 PM | Updated: Sep 07, 2019 20:56 PM

Sidhi

बालक-बालिकाओं के विरूद्ध बढ़ रहे प्रकरण, प्रकरणों में आयु निर्धारण की मिली जानकारी

सीधी। पुलिस अधीक्षक सभागार में शुक्रवार को प्रधानाध्यापकों एवं अध्यापकों के एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में बालक-बालिकाओं के विरूद्ध बढ़ रहे प्रकरणों के संबंध में आयु निर्धारण पर साक्षी के तौर पर प्रधानाध्यापकों एवं अध्यापकों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए एएसपी अंजुलता पटले ने कहा कि प्रशिक्षण की मुख्य मंशा शैक्षणिक संस्थानों में बालक-बालिकाओं से संबंधित आपराधों को रोंकने के साथ ही बच्चों को जागरूक भी करना है। विद्यालय समय में शिक्षक ही विद्यार्थियों के साथ मौजूद रहते है। जो साक्षी की भूमिका में भी रहते है। शिक्षक यह प्रयास करें कि शैक्षणिक संस्थाओं में पठन-पाठन का अच्छा माहौल रहे और वहां कोई अराजक गतिविधियां न बने। यदि ऐसी स्थिती नजर आती है तो तत्काल पुलिस को सूचित करें। जिससे अपराधों को घटित होने से पहले ही रोंका जा सके।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजुलता पटले ने प्रधानाध्यापकों एवं अध्यापकों को प्रशिक्षित करते हुए कहा कि विद्यालय का वातावरण अच्छा रखने में शिक्षकों की भूमिका सबसे अहम होती है। शिक्षक यह प्रयास करें कि विद्यालय में आने वाले छात्र-छात्रा अच्छे माहौल में पठन-पाठन कर सके। यदि शैक्षणिक संस्थानों में अराजकतत्वों की आवाजाही या आसपास जमावड़ा होता है तो इसकी तत्काल सूचना पुलिस को दें। शिक्षक यह भी ध्यान दें कि विद्यालय आने वाले छात्र-छात्राओं को रास्ते में भी किसी तरह की दिक्कतें न हो यदि इस तरह की कोई शिकायतें उन तक पहुंचती है तो उसे पुलिस तक पहुंचाने में अपनी महती भूमिका का निर्वहन करें। डीपीओ भारती शर्मा ने कहा कि विद्यालयों में बच्चों की जन्मतिथि को लेकर किसी तरह की त्रुटि न रहे। इसका ध्यान शिक्षक रखें। यदि कोई प्रकरण तैयार होता है और उसमें छात्र-छात्राओं के साक्षी की जरूरत पड़ती है तो किस तरह का बयान देना है इसको लेकर भी शिक्षक पूरी तरह से सजग रहे। बच्चों को प्रकरण से संबंधित जानकारी देने के साथ ही यह भी बताएं कि वह साक्ष्य को किस तरह से प्रस्तुत करें। उन्होने प्रध्यानाध्यापकों एवं अध्यापकों को प्रशिक्षण की प्रमुख मंशा बतातें हुए कहा कि विद्यालय में अच्छे वातावरण का निर्माण करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारी में शामिल है। बच्चों को विद्यालय में गुड टच एवं बैड टच के बारे में भी जानकारी दी जाए। जिससे छोटे बच्चे भी सामने वाले व्यक्ति की मंशा को अच्छे से समझ सके। यदि उनके साथ गलत हो रहा है तो वह उसका डट कर विरोध भी करें। जरूरत पडऩे पर शिक्षक परिवार एवं पुलिस की मदद लेने की लिए भी प्रेरित करे। जिला अभियोजन अधिकारी भारती शर्मा एवं सहायक जिला अभियोजन के अधिकारी रीना ङ्क्षसह ने प्रशिक्षण में कहा कि आज कल शोसल मीडिया का उपयोग काफी तेजी के साथ बढ़ रहा है ज्यादातर घरों में फेसबुक एवं व्हाट्सएप्प का उपयोग होने से बच्चे भी कहीं न कहीं इनके संपर्क में रहते है। विद्यालय में शिक्षक गण यह ध्यान रखेें कि बच्चे ज्यादा स्मार्टफोन का उपयोग न करें। जहां जरूरत हो वहां घर के सदस्यों की मदद से उपयोग करें। उनके द्वारा यह भी समझाईस दी गई कि शिक्षकों का यह दायित्व है कि छात्र-छात्राओं के उम्र के संबंध में सटीक एवं सही दस्तावेज प्रस्तुत करें। इस संबंध में साक्षी प्रधानाध्यापक द्वारा वही गवाही प्रस्तुत करें जो कानूनी रूप से सत्य हो। कई बिंदुओं पर प्रधानाध्यापकों एवं अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में रक्षित निरीक्षक लवली सोनी, द्वारा भी प्रशिक्षण में कई सारगर्भित बिंदुओं पर जानकारी दी गई। महिला प्रकोष्ठ प्रभारी उपनि पूनम ङ्क्षसह ने प्रशिक्षण के दौरान बैंक फ्राड एवं यातायात संबंधी नियमों की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों को बैंक फ्राड के संबंध में आने वाले फोन काल पर भी शिक्षक जानकारी दें जिससे उन्हे अपने घर वालों को बचाने में भी मदद मिल सके। साथ ही छात्र-छात्राओं को यातायात नियमों की जानकारी देते हुए उनका पालन करने के लिए भी शिक्षक प्रेरित करे। कार्यक्रम में जिले भर के 245 प्रधानाध्यापक एवं अध्यापक उपस्थित रहे।