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100 बच्चों के इलाज के लिए IAS ने अपने घर को बना दिया अस्पताल, हॉस्पिटल में नहीं थे बेड; परिजनों को दी रहने-खाने की सुविधा

Pawan Tiwari

Publish: Jul 18, 2019 10:19 AM | Updated: Jul 18, 2019 10:21 AM

Sidhi

  • 500 परिजन अपने बच्चों को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे थे।
  • कलेक्टर ने बच्चों के इलाज के लिए बाहर के डॉक्टरों को भी बुलाया।

सीधी . अस्पतालों में मरीजों के साथ दुर्व्यवहारों की कई खबर आपने सुनी होंगी लेकिन इन सबके बीच एक कलेक्टर की दरियादिली सामने आई है। जिला अस्पताल में कुपोषित बच्चों को जगह नहीं मिलने से इस कलेक्टर ने अपने घर को अस्पताल में तब्दील करा दिया और कुपोषित बच्चों को भर्ती करा दिया। कलेक्टर के इस पहल की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं। वहीं, कलेक्टर का कहना है कि बच्चों को बिना जांच के कैसे जाने देता इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने कड़ी मेहनत की है।


सीधी जिले के कलेक्टर हैं अभिषेक सिंह
मध्यप्रदेश के सीधी जिले के कलेक्टर अभिषेक सिंह ने मिसाल पेश की है। बुधवार को जिला अस्पताल में ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिए जिले के करीब 500 एनीमिक बच्चों को लेकर उनके परिजन पहुंचे थे। इनमें से करीब 400 बच्चों को जिला अस्पताल और नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। वहीं, 100 बच्चों को इलाज के लिए बेड नहीं मिल पाया। कई बच्चों की हालत बिगड़ने लगी जिसका जानकारी कलेक्टर अभिषेक सिंह को दी गई। मौके पर पहुंचे कलेक्टर ने सभी बच्चों को अपने बंगले में भेज दिया और उनके परिजनों के रहने और खाने पीने की व्यवस्था की। अस्पताल प्रबंधन के द्वारा कलेक्टर को बताया गया कि अस्पताल में विशेषक डॉक्टरों की कमी है जिसके बाद कलेक्टर ने संभागायुक्त से चर्चा करके रीवा से करीब 6 टेक्नीशियन को बुलाया।

 

 

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बच्चों को लाने में विभाग ने की मेहनत
जिले में दस्तक अभियान चल रहा है। सोशल मीडिया ममें प्रचार करके बच्चों को अस्पताल बुलाया गया है। कलेक्टर अभिषेक सिंह ने बताया कि, एनीमिक बच्चों को जिला अस्पताल पहुंचाने में स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले ने खासी मेहनत की है। उन्हें किसी भी हालत में बिना ब्लड ट्रांसफ्यूजन के वापस नहीं जाने देना चाहता था। पहले मिश्रा नर्सिंग होम व मानस भवन में बच्चों के लिए व्यवस्था कराई वहां भी जगह कम पड़ी तो अपने आवास पर बच्चों की व्यवस्था की।

 

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सफाई को लेकर जताई थी नाराजगी
हाल ही मे कलेक्टर अभिषेक सिंह ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। इस दौरान वहां गंदगी देख अधिकारियों को फटकार लगाई थी और खुद फावड़ा लेकर अस्पताल परिसर में फैली गंदगी की सफाई की थी। सफाई करने से पहले कलेक्टर अभिषेक सिंह ने बयोमेडिकल वेस्ट का उचित प्रबंधन नहीं होने पर अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगाई थी और सिविल सर्जन का वेतन काटने और प्रकरण दर्ज कराने के निर्देश दिए थे।