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गरीबों को पांच रूपए में भरपेट भोजन देने वाली रसोंई योजना में लटका ताला

Manoj Kumar Pandey

Publish: Sep 15, 2019 21:40 PM | Updated: Sep 15, 2019 21:40 PM

Sidhi

गैस सिलेंडर न मिलने से दो दिन नहीं पका भोजन, दीनदयाल रसोंई योजना से भूखे पेट लौटे गरीब, मप्र की भाजपा सरकार द्वारा द्वारा शुरू की गई थी महत्वाकांक्षी योजना

सीधी। गरीबों को पांच रूपए में भरपेट भोजन देने वाले पंडित दीनदयाल रसोंई योजना की व्यवस्थाएं लडख़ड़ाने लगी हैं। दो दिन तो यहां ताला लटक गया था, हलांकि रविवार से पुन: यह रसोंई शुरू हो गई है। दरअसल नगर पालिका द्वारा जनसहयोग से जिला अस्पताल में संचालित की जा रही दीनदयालय रसोंई योजना मप्र की भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई थी। यह एक महत्वाकांछी योजना थी जिसमें ग्रामीण अंचलों से शहर में काम करने आने वालों के साथ ही शहर में फुटपाथ, ठेला का व्यवसाय करने वाले व अन्य गरीबों को पांच रूपए में भर पेट भोजन मिल जाता था। प्रदेश में कांग्रेस सरकार आने के बाद कई बार यह अफवाह उड़ी की सरकार द्वारा इस योजना को बंद किया जा रहा है। लेकिन अभी भी यह योजना चालू है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस योजना को जनसहयोग से चलाना था, शुरूआती दौर में तो सीधी में इस योजना में दानदाताओं की भीड़ लगती थी, तत्कालीन कलेक्टर की पहल पर बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारियों ने भी यहां दान राशि दी थी, इसके साथ लोग यहां अपने जन्मदिन सहित अन्य अवसरों पर गरीबों को भोजन कराने के लिए दान दिया करते थे, लेकिन धीरे-धीरे यह परंपरा घटती जा रही है और दानदाताओं की कमी पड़ती जा रही है, जिससे दीनदयाल रसोंई योजना की व्यवस्थाएं लडख़ड़ा चुकी है, फिर भी किसी तरह योजना को नपा द्वारा चलाया जा रहा है।
सिलेंडर के अभाव बंद हुआ था भोजन-
शुक्रवार को रसोंई योजना का सिलेंडर खत्म हो जाने से भोजन नहीं बन पाया था, यहां भोजन बनाने का दायित्व उठाने वाली महिला स्व-सहायता समूह द्वारा सिलेंडर के लिए भाग दौड़ की गई लेकिन शुक्रवार को सिलेंडर नहीं मिल पाया, वहीं शनिवार को सिलेंडर मिला लेकिन दोपहर बाद, जिसके चलते शुक्रवार और शनिवार को यहां भोजन नहीं बन पाया जिसके चलते सैकड़ा गरीबों को भूंखे पेट रसोंई से लौटना पड़ा।
प्रतिदिन सौ से अधिक गरीब करते हैं भोजन-
जिला अस्पताल परिसर में संचालित दीनदयाल रसोंई योजना गरीबों के लिए वरदान सावित हो रही है। यहां ग्रामीण अंचलों से काम करने वाले आने वालों के साथ ही शहरी क्षेत्र में ठेला व फुटपाथ व्यवसाय करने वाले गरीब लोगों के साथ ही अन्य गरीब भी भोजन करने पहुुंचते हैं। एक आंकड़े के अनुसार यहां प्रतिदिन एक सैकड़ा से अधिक गरीबों को पांच रूपए प्रति थाली के हिसाब से भरपेट भोजन कराया जाता है। कभी-कभी तो भोजन करने वालों का आंकड़ा दो सैकड़ा के पार पहुंच जाता है।
दान की दरकार-
जनसहयोग से चलने वाली दीनदयाल रसोंई योजना को दान दाताओं की दरकार है। दान राशि न मिलने से यहां की व्यवस्थाएं लडख़ड़ाने लगी हैं। अब यहां जन्मदिन सहित अन्य आयोजन मनाने वाले लोग भी कम ही पहुंच रहे हैं, जिससे योजना को ग्रहण सा लगता जा रहा है। यदि यही हाल रहा तो यहां पांच रूपए में भरपेट भोजन करने वाले गरीब भूंखे पेट ही रह जाएंगे।
..........रसोंई योजना का सिलेंडर खत्म हो गया था, जिसके चलते दो दिन खाना नहीं पक पाया, अब सिलेंडर मिल गया है जिससे रविवार से भोजन बनने लगा है।
शांति रावत, स्व-सहायता समूह संचालक
..........समय पर सिलेंडर न मिल पाने से भोजन नहीं बन पाया, जब मुझे जानकारी मिली तब तत्काल सिलेंडर की व्यवस्था बनाई गई। यह बात सही है कि दानदाता अब कम आ रहे हैं जिससे दीनदयाल रसोंई योजना की व्यवस्थाएं लडख़ड़ा रही हैं।
मनोज चौबे, प्रभारी रसोंई योजना नपा सीधी