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जिम्मदारों की लापरवाही से नौनिहालों का भविष्य हो रहा चौपट

Manoj Kumar Pandey

Publish: Oct 19, 2019 20:53 PM | Updated: Oct 19, 2019 20:53 PM

Sidhi

शिक्षक नियमित रूप से नहीं पहुंच रहे स्कूल, भगवान भरोसे बच्चों की पढ़ाई, मामला कुसमी अंचल के सरकारी स्कूलों का

सीधी/पथरौला। जिले के आदिवासी जनपद पंचायत कुसमी अंतर्गत संचालित होने वाली सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले छात्रों का भविष्य जिम्मदारों की मनमानी और लापरवाही के कारण अंधकारमय होता जा रहा है। किंतु आला अधिकारी हकीकत को जानते हुए भी कार्रवाई करना तो दूर की बात है, बल्कि इनके द्वारा लापरवाह प्राचार्य सहित शिक्षकों को संरक्षण भी दिया जाता है। लिहाजा अंचल मे सरकारी स्कूलों की व्यवस्था बेपटरी चल रही है।
विगत दिवश पत्रिका के भ्रमण के दौरान ऐसा ही मामला जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंदौर मे संचालित सरकारी स्कूलों का सामने आया है। जहां 11 बजे प्राथमिक शाला कुंदौर का जायजा लिया गया तो जहां छात्र संख्या काफी कम देखने को मिली। वहीं शिक्षक भी स्कूल से नदारद पाए गए। प्राथमिक शाला कुंदौर मे उपस्थित अतिथि शिक्षक हुब्बलाल यादव व राजकुमार पनिका द्वारा बताया गया कि भवन नहीं होने के कारण एक ही भवन मे दो प्राथमिक स्कूलों का संचालन किया जाता है। जिसमें प्राथमिक शाला सरसईंटोला मे कुल 16 छात्र दर्ज हैं, और दो अतिथि शिक्षक पदस्थ हैं। तथा प्राथमिक शाला सेमरटोला जिसमें कुल 40 बच्चे दर्ज हैं। जिसमें प्रधानाध्यापक गया प्रसाद कुशवाहा और दो अतिथि शिक्षक पदस्थ हैं। किंतु शाला मे महज 20 बच्चे और दो अतिथि शिक्षक ही उपस्थित पाए गए। बताया गया कि प्रधानाध्यापक गया प्रसाद कुशवाहा कभी कभार स्कूल आते हैं। जब भी आते हैं समय से नहीं आते हैं। और इसी का फायदा अन्य अतिथि शिक्षकों द्वारा उठाया जाता है। जो समय से व प्रतिदिन स्कूल आना उचित नहीं समझते हैं। वहीं संकुल प्राचार्य ठाकुर प्रताप सिंह द्वारा इन्हें भरपूर संरक्षण भी दिया जाता है। ऐसे में नौनिहालों का भविष्य दांव मे लगता प्रतीत हो रहा है। ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि संकुल प्राचार्य की लापरवाही के कारण ही स्कूलों की यह दुर्दशा है। इनके द्वारा शिक्षकों से गैर शिक्षकीय कार्य भी करवाया जाता है। तथा स्कूल आने जाने मे मनमानी की खुली छूट शिक्षकों को दी गई है। अविभावकों द्वारा जिला प्रशासन से स्कूल की दशा व दिशा सुधारने की मांग की गई है।
नहीं बनता मध्यान्ह भोजन-
बताया गया कि बच्चों को दिया जाने वाला मध्यान्ह भोजन भी कभी कभार पकाया जाता है। तथा जब भी खाना मिलता है तो पानी युक्त उड़द अथवा मटर की दाल के साथ चावल मात्र ही दिया जाता है। जबकि मध्यान्ह भोजन की जिम्मेदारी स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक गया प्रसाद कुशवाहा खुद संभाल रहे हैं। रसोईयों द्वारा बताया गया कि जब खाद्यान्न दिया जाता है तो भोजन पकाते हैं। खाद्यान्न नहीं मिलता तो कहां से बच्चों को भोजन कराएं। रसोईयों ने बताया कि प्रधानाध्यापक गया प्रसाद कुशवाहा द्वारा न तो लकड़ी का पैसा दिया जाता है और न ही हम लोगों का मानदेय हर महीने खाता मे भेजा जाता है।