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खर्राटे मारते रहते हैं डॉक्टर व नर्स, भटकते रहते हैं मरीज

Manoj Kumar Pandey

Publish: Sep 12, 2019 21:17 PM | Updated: Sep 12, 2019 21:17 PM

Sidhi

जगाने पर भी नहीं उठते आकस्मिक चिकित्सा विभाग के डॉक्टर व कंपाउंडर, खटखटाने पर नहीं खुलता नर्सों का ड्यूट रूम, सिविल सर्जन का नहीं उठता फोन, रात्रि में भर्ती मरीज व जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को नहीं मिल रही चिकित्सकीय सेवा, भगवान भरोसे जिला अस्पताल की रात्रिकालीन आपातकाल चिकित्सा सेवा

सीधी। लाख प्रयाश के बाद भी जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं सुदृढ़ नहीं हो पा रही हैं। यदि आप रात में बीमार पड़ते हंै, और जिला अस्पताल में ईलाज करवाने जाना चाहते हैं तो शायद ही आपको वहां उपचार सुविधा मुहैया हो पाए। क्योंकि रात्रि के समय यहां न डॉक्टर, नर्स व अन्य स्टाफ ड्यूटी करने नहीं बल्कि सोने जाते हैं। और नींद भी इतनी गहरी की मरीज चिल्लाते रहें उनकी नींद नहीं टूटती। ऐसी स्थिति में मरीजों को काफी परेशान होना पड़ता है।
ऐसा ही नजारा मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात जिला अस्पताल में देखने को मिला। लगातार मिल रही ऐसी शिकायतों को लेकर पत्रिका द्वारा बुधवार की अल सुबह 5 से 6 बजे के बीच जिला अस्पताल का भ्रमण कर जायजा लिया गया तो यहां स्थिति काफी चौंकाने वाली मिली। आपातकालीन चिकित्सा कक्ष में ड्यूटी डॉक्टर सहित कंपाउंडर आदि कुर्सियों व फर्श पर बिस्तर लगाकर गहरी नींद में थे। इस दौरान कुछ मरीज उन्हे जगाते रहे लेकिन डॉक्टर सहित अन्य स्टाफ की नींद नहीं खुली, बल्कि हूल मारने पर वह कंरवट बदल लेते थे। कुछ ऐसा ही नजारा मेडिकल वार्ड के नर्स ड्यूटी रूम का रहा। मेडिकल वार्ड में ड्यूटी में तैनात नर्स ड्यूटी रूम का दरवाजा अंदर से बंद कर गहरी नींद में सो रही थी, इस दौरान भर्ती मरीजों के परिजन वाटल आदि बदलने सहित मरीज की अन्य परेशानी को लेकर नर्स ड्यूटी रूम का दरवाजा खटखटाते रहे, लेकिन उनका दरवाजा नहीं खुला।
पैथालाजिस्ट की लगती है ड्यूटी-
जिला अस्पताल में रात्रिकालीन आपात सेवा में अक्सर जिला अस्पताल में पदस्थ पैथालॉजिस्ट की ड्यूटी लगती है। रात्रि में मेडिकल संबंधी गंभीर मरीज के आने पर पैथालॉजिस्ट द्वारा उनका उपचार करने से साफ मना कर दिया जाता है, ऐसे में मरीज के रात में अस्पताल पहुंचने के बाद भी उपचार सुविधा मुहैया नहीं हो पाती। कई बार तो गंभीर स्थिति होने पर मरीज को उनके परिजन रीवा ले जाने को मजबूर हो जाते हैं।
सिविल सर्जन का नहीं उठता फोन-
रात्रि के समय जिला अस्पताल में डॉक्टर, नर्सांे व अन्य स्टाफ की मनमानी से परेशान मरीजों के परिजन सिविल सर्जन से शिकायत करना चाहते हैं, इसके लिए वह उनके मोबाइल पर संपर्क भी करते हैं, लेकिन कई बार रिंग करने के बाद भी सिविल सर्जन द्वारा फोन रिसीव नहीं किया जाता। बुधवार की अलसुबह करीब ५ बजे जब जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों द्वारा पत्रिका प्रतिनिधि को यह व्यथा बताई गई तो पत्रिका प्रतिनिधि द्वारा भी सिविल सर्जन के मोबाइल पर संपर्क किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब जिला अस्पताल के मुखिया ही बेपरवाह हैं तो पीडि़त व्यक्ति शिकायत किससे करे।
कलेक्टर के आदेश को नहीं दिया जा रहा तबज्जो-
विगत दिवस कलेक्टर रवींद्र चौधरी ने जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया था, इस दौरान कलेक्टर ने जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों व उनके परिजनों से भी चर्चा की थी, जिस पर मरीजों एवं उनके परिजनों ने अस्पताल की अव्यवस्थाओं व स्टाफ की मनमानी के संबंध में कलेक्टर को अवगत कराया था, जिस पर कलेक्टर ने मौके पर ही उपस्थित मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.एमएल वर्मा व जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ.एसबी खरे को व्यवस्थाएं सुदृढ़ करने के निर्देश दिए थे, लेकिन कलेक्टर के इस निर्देश का इन पर कोई असर नहीं हुआ और जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं जस की तस चल रही हैं।