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किडनी रोग विशेषज्ञ नहीं फिर भी हो रही डायलिसिस

Om Prakash Pathak

Publish: Oct 13, 2019 18:30 PM | Updated: Oct 13, 2019 18:30 PM

Sidhi

किडनी रोग विशेषज्ञ नहीं फिर भी हो रही डायलिसिस, एक दिन मे चार, कुल १२ लोगो की जा रही है डायलिसिस, उपचार के लिए बनारस, नागपुर या भोपाल की लेनी पड़ रही सरण

सीधी। जिस व्यक्ति की किडनी खराब हो गई हो। किसी कारणवश किडनी ने काम करना बंद कर दिया हो। किडनी कमजोर हो गई हो या फिर किडनी से संबंधित अन्य कोई बीमारी हो जाए तो निश्चित ही उस मरीज को बनारस, नागपुर, भोपाल, इंदौर जैसे बड़े शहरो का सहारा लेने की मजबूरी बनी हुई है। क्योंकि जिला चिकित्सालय सहित जिले मे एक भी किडनी विशेषज्ञ नहीं है। जैसे-तैसे जिला चिकित्सालय मे डायलिसिस सुविधा मिली है, लेकिन उसमें भी मशीनों का अभाव होने के कारण माह दर माह मरीजों की वेटिंग बढ़ती जा रही है। ऐसे मे मरीज का जिले में जिंदा रहना किसी चुनौती से कम नही होता है। पिछले वर्ष किडनी से संबंधित दर्जनो मरीजों की मौत भी हो चुकी है।
एक दर्जन की डायलिसिस, कई वेटिंग मे-
जिला चिकित्सालय मे गत दो वर्ष से डायलिसिस सेवा शुरू की गई है। यहां पर दो मशीनों पर प्रतिदिन औसत ४ मरीजों की डायलिसिस हो पाती है। चूंकि किसी मरीज को सप्ताह मे दो, किसी को तीन तो किसी को चार या पांच बार डायलिसिस करना जरूरी होता है। इस कारण मात्र १२ मरीज की ही एक माह मे डायलिसिस हो पाती है। ऐसे मे अन्य डायलिसिस के मरीजों का नंबर नहीं आ पा रहा है। जिले मे अगस्त माह मे ७ मरीज डायलिसिस कराने के लिए कतार मे थे, जिनकी संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। जिनका नंबर डायलिसिस सेंटर पर नहीं आने के कारण उन्हें मजबूरी मे निजी सेंटरो मे डायलिसिस करवाना पड़ रहा है। जिसमें उन्हें तीन से चार हजार रूपए प्रति डायलिसिस के देने पड़ते हैं।
इसलिए जरूरी डायलिसिस-
जब किसी व्यक्ति के गुर्दे काम करना बंद कर देते हैं या अन्य कोई खराबी होती है तो वह व्यक्ति जिंदगी और मौत के बीच जंग लडऩे लगता है। किडनी खराब होने से व्यक्ति के शरीर से विषैले पदार्थ बाहर नहीं निकलते हैं, जिसके कारण क्रिएटिनिन और यूरिया जैसे पदार्थ की अधिकता हो जाती है। इस कारण मशीन की सहायता से व्यक्ति के खून को साफ किया जाता है। इससे पहले किडनी रोग विशेषज्ञ द्वारा मरीज की संपूर्ण जांच कर फिस्टुला बनाया जाता है। जिसकी सुविधा जिले मे नहीं होने के कारण किडनी से प्रभावित मरीजों को अन्य शहरो मे भागना पड़ता है। इसके बाद वहीं से मरीज की अवस्था के अनुसार डायलिसिस तय की जाती है। ऐसे मे जब तक किडनी से प्रभावित व्यक्ति समय पर डायलिसिस करवाता रहता है तब तक जिंदा रहता है, डायलिसिस करवाने मे थोडी सी लापरवाही भी उसके जीवन के लिए घातक बन जाती है।
दो मशीन और चाहिए-
जिले मे किडनी विशेषज्ञ नहीं है, बाहर के चिकित्सको के राय पर डायलिसिस किया जाता है। जिस प्रकार डायलिसिस के मरीजों की वेटिंग बढ़ रही है, इस मान से करीब दो मशीनों की आवश्यकता और है। इसी के साथ एक डायलिसिस टेक्रिसीएन भी बढ़ाया जाना चाहिए।
डॉ. एसबी खरे
सिविल सर्जन, जिला चिकित्सालय सीधी