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वेतन विसंगति और संविलियन को लेकर सेल्समैनों का धरना-प्रदर्शन सातवें दिन भी जारी, मांगों पर नहीं हो रहा विचार

Anil Singh Kushwaha

Publish: Aug 11, 2019 18:46 PM | Updated: Aug 11, 2019 18:46 PM

Sidhi

जिले में सातवें दिन जारी रहा प्रदर्शन

सीधी. शासकीय उचित मूल्य के विक्रेताओं ने दुकानें बंद कर 4 अगस्त से धरना प्रदर्शन शहर के वीथिका भवन में कर रहे हैं। प्रदेश सरकार से अपनी मांगों को लेकर यह आंदोलन आगे भी जारी रखने की बात कही गई है। विक्रेता संघ द्वारा धरने के दौरान शनिवार को काफी भीड़ देखने को मिली। विक्रेताओं का कहना है कि सीधी एवं सिंगरौली जिले में एक ही बैंक के सीईओ एवं डीआर हैं, इसके बावजूद भी वर्ष 2016 से सिंगरौली जिले के विक्रेताओं को छ: हजार रूपए मासिक वेतन दिया जा रहा है जबकि सीधी जिले के विक्रेताओं को चार हजार रूपए वेतन मिल रहा है। कम वेतन मिलने सहित उस पर भी दो जिलों में अलग-अलग वेतन निर्धारण किया गया है।

वेतन विसंगति को लेकर धरने पर बैठे विक्रेता
वेतन विसंगति को लेकर विक्रेताओं ने कहा कि सिंगरौली की तरह सीधी जिले के विक्रेताओं को भी अब तक का शेष 2 हजार रूपए प्रतिमाह के हिसाब से वेतन दिलाने के अलावा आगामी वेतन 25 से 30 हजार रूपए करने की मांग की गई है। वहीं विक्रेताओं को कर्मचारी का दर्जा दिलाकर खाद्य विभाग में संविलियन करने की भी मांग उठाई गई है। विक्रेताओं ने कहा कि अक्सर सर्वर डाउन रहने के कारण जब खाद्यान्न हितग्राहियों को नहीं दे पाते हैं तो उस दौरान कई हितग्राही गाली-गलौंज करने सहित मारपीट पर अमादा हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में विक्रेताओं को सुरक्षा कवच की भी जरूरत है। विक्रेताओं ने मांग किया है कि उन्हे मासिक वेतन चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के मानदेय के तहत 25 से 30 हजार रूपए मासिक दिया जाए।

अधिकारियों पर धरने का नहीं हो रहा कोई असर
इसके साथ ही अधिकारियों द्वारा विक्रेताओं पर दिए जा रहे दबाव एवं नोटिस के बहाने अनर्गल परेशान करने की प्रक्रिया बंद की जाए। जो विक्रेता काम कर रहे हैं उन पर भी कमीशन देने का दबाव बनाया जाता है, न देने पर उन्हे नोटिस देकर सुविधा शुल्क की मांग की जाती है। विभागीय अमले द्वारा विक्रेताओं को परेशान तो किया जाता है लेकिन उनकी सुविधाओं एवं वेतन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर पहल नहीं की जा रही है। जिस वजह से जिले भर के विक्रेता अपनी मांगों को लेकर धरना पर बैठे हैं। जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं हो जाती तो यह धरना यथावत जारी रखने की बात कही गई है। उधर विक्रेताओं का धरना एवं दुकानें बंद होने की वजह से रक्षा बंधन जैसे त्यौहार में हितग्राहियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।