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कैशियर के भरोसे बैंक, कर्मचारियों की मनमानी से उपभोक्ता परेशान

Manoj Kumar Pandey

Publish: Nov 07, 2019 13:04 PM | Updated: Nov 07, 2019 13:04 PM

Sidhi

आधा सैकड़ा से गांव के उपभोक्ता हो रहे परेशान, मामला सेवा सहकारी बैंक पोड़ी बस्तुआ का

पथरौला/सीधी। जिले के आदिवासी जनपद पंचायत कुसमी अंतर्गत उप तहसील पोडी बस्तुआ मे संचालित सेवा सहकारी बैंक मे पदस्थ कर्मचारियों की मनमानी रवैया से तकरीबन 50 गांव के ग्रामीण उपभोक्ता परेशान हैं। बताया जा रहा है कि यहां पदस्थ कर्मचारियों के आने जाने का कोई समय नहीं रहता है। जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का बैंक संबंधित काम समय से नहीं हो पाता है।
ग्रामीणों की शिकायत पर गत दिवश सेवा सहकारी बैंक पोड़ी में सुबह 11.30 बजे पहुंची पत्रिका टीम को एक भी कर्मचारी बैंक मे नहीं मिले। चपरासी द्वारा बैंक का ताला खोला गया था। जबकि दो दर्जन से ज्यादा बृद्ध महिलाएं व पुरुष बैंक कर्मचारियों का इंतजार करते पाए गए। बृद्धजनों द्वारा बताया गया कि बैंक के कर्मचारी कभी भी समय से नहीं आते हैं। हम लोग बृद्धा, विधवा पेंशन लेने 40 से 50 किलोमीटर दूरस्थ ग्रामों से आते हैं। लेकिन एक दिन मे इस बैंक से पैसा मिलना टेढ़ी खीर है। यहां के कर्मचारी कभी पैसा नहीं होने तो कभी सर्वर नहीं होने का बहाना बनाकर वापस कर देते हैं। जिसके कारण सैकड़ों रुपये किराये मे व्यर्थ मे खर्चा हो जाता है। बताया गया कि उक्त बैंक मे तकरीबन 50 गांव कें पेंशनधारी तथा किसानों का लेन देन सर्वाधिक मात्रा में है, लेकिन जरुरतमंदों को समय पर पैसा कभी भी नसीब नहीं होता है। इतना ही नहीं बृद्धजनों को पेंशन की राशि पाने के लिए लगातार 3-4 दिनों तक बैंक का चक्कर लगाना पड़ता है। साथ ही वाहन नहीं मिलने के कारण जंगली क्षेत्र के दूरस्थ ग्राम के लोगों को रात्रि मे किसी ग्रामीण का सहारा लेना पड़ता है।
वर्षों से डटे हैं कर्मचारी-
सेवा सहकारी बैंक की शाखा पोंडी बस्तुआ मे पदस्थ कर्मचारी कई वर्षों से इसी बैंक मे लगातार डटे हुए हैं और इनकी मनमानी हावी है। जब मर्जी पड़ी आये और चले गये। जिससे क्षेत्रिय ग्रामीण काफ ी परेशान हैं। ग्रामीणों द्वारा जिला प्रशासन से बैंक मे सुधार करने की मांग की गई है।
प्रभार मे संचालित है बैंक-
सेवा सहकारी बैंक की शाखा पोंड़ी बस्तुआ तकरीबन तीन वर्षों से प्रभारी के भरोसे चल रही है। तथा शाखा प्रबंधक का प्रभार कैशियर को सौंपा गया है। जिससे ग्रामीणों द्वारा माना जा रहा है कि जिम्मेदार अधिकारी नहीं होने के कारण बैंक कर्मचारी बेलगाम है।
ग्रामीणों ने सुनाया दर्द-
.........इस बैंक मे अपना ही पैसा लेने के लिए कई दिनों तक चक्कर काटना पड़ता है। लेकिन पैसा नहीं मिल पाता है। यहां पदस्थ कर्मचारी कुछ भी जानकारी मांगने पर भड़क जाते हैं और अभद्रता पूर्वक व्यवहार करते हैं, जिससे हम लोग परेशान हैं।
कमल सिंह, निवासी हर्रहा
........बृद्धा पेंशन की राशि लेने आया हूँ। सुबह 9.30 बजे से बैठे हैं। कोई कर्मचारी अभी तक नहीं आया है। चपरासी द्वारा बैंक का ताला खोल दिया गया है। साहब लोग 12 बजे के बाद आते हैं। हमेशा यही परेशानी रहती है।
धिरई बैगा, निवासी कुंदौर
..........पेंशन लेने 3-4 महीने मे आते हैं। लेकिन एक दिन मे पेंशन की राशि नहीं मिल पाती है। कर्मचारी कह देते हैं पैसा नहीं है, सर्वर नहीं है। आने जाने मे ही सौ दो सौ रुपये किराया लग जाता है, ऐसा हमेशा होता है।
जुंदरी बैगा, निवासी कुंदौर
........गांव से पेंशन लेने आते हैं। दिनभर भूखे प्यासे बैठने के बाद शाम को खाली हाथ वापस लौट जाते हैं। चार माह की पेंशन लेने चार दिन बैंक आना पड़ता है। जिससे आधा पैसा किराया मे खर्चा हो जाता है। बंैक के कर्मचारी कभी समय से नहीं आते हैं, न समय से पैसा मिलता है।
कुंवारिया बैगा, निवासी कुंदौर

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