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डेंगू जैसी घातक बीमारी को लेकर गंभीर नहीं प्रशासन

Om Prakash Pathak

Publish: Nov 11, 2019 19:20 PM | Updated: Nov 11, 2019 19:20 PM

Sidhi

डेंगू जैसी घातक बीमारी को लेकर गंभीर नहीं प्रशासन, डेंगू से एक की मौत तो दूसरे की हालत गंभीर, ३७ संदिग्धों के खून का लिया गया सेंपल

सीधी। सीधी जिले में डेंगू का प्रकोप तेजी से फैज रहा है, लेकिन जिला अस्पताल में जांच व उपचार के समुचित इंतजाम नहीं है, जिससे मरीज निजी चिकित्सकों का सहारा लेने को मजबूर हैं। जहां उन्हें भारी.भरकम फीस भी चुकानी पड़ती है। जिला चिकित्सालय मे ३७ डेंगू के संदिग्ध मरीजों का रक्त सेंपल लिया गया है। जिसकी जांच की जा रही है। वहीं जिले मे डेंगू से एक युवक की मौत हो चुकी है, जबकि एक की हालत गंभीर बनी हुई है। इसके बाद भी जानलेवा बीमारी डेंगू को लेकर स्वास्थ्य प्रशासन गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है।
विशेषज्ञों की न टीम बनाई न निर्धारित किए अलग वार्ड-
जिले में डेंगू के संदिग्ध मरीज मिलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं है। जिला अस्पताल में अब तक न डेंगू व स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए अलग वार्ड निर्धारित किया गया है। न ही चिकित्सकों की विशेष टीम गठित की है। सामान्य मरीजों की तरह ही इन्हें भी मेडिकल वार्ड में भर्ती कर उपचार दिया जाता है। स्थिति गंभीर होने पर रीवा रेफर कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते है।
मशीन तो है, दक्ष कर्मचारी नहीं-
जिला अस्पताल में डेंगू पीडि़त की जांच के लिए मशीन उपलब्ध नहीं थी, जिस कारण खून का सेंपल लेकर एलाइजा जांच के लिए जबलपुर भेजा जाता था। यहां से रिपोर्ट आने में एक पखवाड़े लग जाते थे। रिपोर्ट मिलते-मिलते मरीज की हालत गंभीर हो जाती थी। इसे देखते हुए शासन ने जांच के लिए मशीन उपलब्ध कराई, लेकिन दक्ष कर्मचारी का अभाव बना हुआ है, सामान्य खून की जांच करने वाले पैथालाजिस्ट ही डेंगू के सेंपल की भी जांच कर रहे हैं।
तीन स्टेज में होती है एलाइजा जांच-
* एनएसजी इसकी रिपोर्ट पॉजीटिव आने का मतलब यह कि व्यक्ति डेंगू वायरस की चपेट में है। अभी डेंगू का वायरस उस व्यक्ति के शरीर में है या नहीं यह जानने के लिए आगे की जांच आइजीएम व आइजीजी करनी होती है।
* आइजीएम पॉजीटिव का मतलब यह होता है कि व्यक्ति को चार से पांच दिन का डेंगू संक्रमण है। ऐसे में मरीजों का ध्यान एनएस पॉजीटिव के मरीज से ज्यादा देना होता है।
* आइजीजी इसकी पॉजीटिव रिपोर्ट का मतलब है कि डेंगू की चपेट में आए 15 दिन से अधिक हो गए। इस स्थिति वाले व्यक्ति की ही प्लेटलेट तेजी से गिरता है। थर्ड स्टेज ही ज्यादा खतरनाक है। ऐसे मरीजों के उपचार में यदि सक्रियता नहीं दिखाई गई तो जिंदगी पर भारी पड़ जाती है।
इसकी हो चुकी है मौत-
जिले मे डेंगू पीडि़त एक मरीज की उपचार के दौरान मौत हो चुकी है, जबकि एक की हालत गंभीर बनी हुई है। रामपुर नैकिन थाना अंतर्गत बघवार निवासी ललित सिंह पिता दीप सिंह १९ वर्ष डेंगू से पीडि़त हो गया, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद रीवा रेफर कर दिया गया, हालत गंभीर होने पर नागपुर ले जाकर उपचार कराया गया जहां उपचार के दौरान ही ललित ने दम तोड़ दिया, वहीं बहरी थाना अंतर्गत कुंकराव गांव निवासी रवींद्र तिवारी १८ वर्ष ४ नवंबर से डेंगू से पीडि़त है, जिसका उपचार जिला चिकित्सालय मे चल रहा है, हालत गंभीर बनी हुई है। इस तरह के डेंगू के बढ़ते प्रकरण को देखते हुए भी स्वास्थ्य प्रशासन डेंगू से निपटने के लिए गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है।

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