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श्रावस्ती के आसिफ इंजीनियर की नौकरी के साथ कर रहे हैं फूलों की खेती, हर महीने कमा रहे हैं लाखों

Akansha Singh

Publish: Sep 02, 2019 12:12 PM | Updated: Sep 02, 2019 14:58 PM

Shravasti

किसी शायर की ये लाइनें जिले के इस युवक पर सटीक बैठती हैं कि 'वो जो शोर मचाते हैं भीड़ में, भीड़ ही बनकर रह जाते हैं, वही पाते हैं जिंदगी में सफलता जो खामोशी से अपना काम कर जाते हैं।'

 

 

श्रावस्ती. किसी शायर की ये लाइनें जिले के इस युवक पर सटीक बैठती हैं कि 'वो जो शोर मचाते हैं भीड़ में, भीड़ ही बनकर रह जाते हैं, वही पाते हैं जिंदगी में सफलता जो खामोशी से अपना काम कर जाते हैं।' हम बात कर रहे हैं श्रावस्ती जिले के जमुनहा क्षेत्र के नदईडीह निवासी आसिफ अजीज सिद्दीकी की। जिन्हें इंजीनियरिंग की नौकरी करने के बाद सुकून नहीं मिला तो खेती-किसानी की ओर रुख अपना लिया और पॉली हाउस बनाकर जिले ही नहीं बल्कि प्रदेश में उन्नति खेती और प्रगतिशील किसानों के लिए नजीर बन गए हैं।

जिले के विकास खण्ड जमुनहा के नदईडीह गांव निवासी आसिफ अजीज सिद्दीकी बी. ई. और एमबीए की डिग्री हासिल करने के बाद वर्ष 1987 में सिविल इंजीनियर हो गए। आसिफ को इंजीनियर की नौकरी से कुछ अलग करने की चाहत थी। ऐसे में वर्ष 2015 में उनकी मुलाकात फूलों की खेती करने वाले मशहूर किसान मोइनुद्दीन से हुई जो बाराबंकी जिले के रहने वाले हैं। इन्हीं से प्रेरणा लेकर आसिफ ने हरियाणा के करनाल से इण्डो-इजराईल प्रोजेक्ट में एक सप्ताह का प्रशिक्षण लेकर पॉली हाउस में खेती करने का गुर सीख लिया और वर्ष 2016 में श्रावस्ती के कृषि विभाग से सम्पर्क कर एक एकड़ जमीन पर लगभग 58 लाख रुपये की लागत से अपने गांव नदईडीह में एक पाली हाउस बना डाला। जिसमें उत्तर-प्रदेश सरकार की तरफ से 29.18 लाख रुपये का अनुदान भी मिला। शुरुआत में इन्होंने जरबेरा के फूल की खेती शुरू की जो हालैंड का एक पुष्प माना जाता है। आसिफ बताते हैं कि एक एकड़ जमीन से औसतन प्रतिदिन 5000 फूल तोड़े जाते हैं जिसको पैकिंग करवाकर लखनऊ फूल मंडी भेज दिया जाता है। शादी-विवाह के सीजन में मांग बढ़ने पर मूल्य भी अच्छा मिल जाता है। इनका मानना है कि एक साल की औसत बचत 12 से 15 लाख रुपये हो जाती है। पिछले वर्ष आधे एकड़ में एक और पॉलीहाउस बनाया है जिसमें लाल और पीली शिमला मिर्च की खेती होती है। इससे भी सालाना की औसतन आय 6 से 8 लाख रुपये हो जाती है।

 

इंजीनियर की नौकरी छोड़ कर रहे खेती, आज सालाना हो रही 15 लाख की बचत

क्या है पॉली हाउस

दरअसल पॉली हाउस खेत पर ही एक ढांचानुमा रचना होती है जो तापक्रम को नियंत्रित कर उगाई जाने वाली फसल के अनुकूल माहौल बना देती है। इसके लिए खेत की जमीन पर जगह-जगह कंक्रीट की नींव पर एक स्टील के फ्रेम का ढांचा खड़ा किया जाता है जिसे पालीशीट से कवर कर उस पर एक हवादार नेट (जाली) अलग से लगाई जाती है। इसमें ट्यूबेल की मदद से टपक विधि से सिंचाई होती है।

 

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विदेशों में भी बने मिसाल

बताते चलें कि मार्च 2017 में काठमांडू अन्तर्राष्ट्रीय पुष्प मेले में आसिफ अजीज सिद्दीकी को फूलों की उन्नति खेती के लिए प्रथम-पुरस्कार भी मिल चुका है ।

और कुछ करने की चाहत

फूल और सब्जी की खेती के साथ साथ इस वर्ष से आसिफ ने जिरेनियम की खेती की भी शुरुआत कर दी है। जिससे असेंशियल आयल निकलता है। जिसकी मांग पूरी दुनिया में है। बताया जाता है कि इसकी खेती के लिए पॉलीहाउस जरूरी नहीं है।