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करैरा क्षेत्र में पानी पीने से हो रहीं हड्डियां कमजोर, बढ़ रही शरीर में अकडऩ

Rakesh shukla

Publish: Jul 21, 2019 07:00 AM | Updated: Jul 20, 2019 22:11 PM

Shivpuri

पानी की समस्या : करैरा क्षेत्र के कई गांवों के ग्रामीण जल योजना बंद होने से फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को मजबूर

 

 

शिवपुरी/करैरा। सीहोर क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक गांव ऐसे हैं, जहां पानी जीवन के लिए खतरा बना हुआ है। जमीन के अंदर से निकलने वाले पानी में फ्लोराईड की मात्रा अधिक होने से उसका दुष्प्रभाव वहां रहने वाली 10 हजार की आबादी पर स्पष्ट नजर आ रहा है। कई साल पहले पीएचई ने जल शोधन संयत्र गांव में लगाए, लेकिन उनका रख-रखाव न होने की वजह से वे भी काम करना बंद कर गए। पीएचई के अधिकारी नहर निकलने की वजह से पानी में फ्लोराइड की मात्रा कम होना बता रहे हैं, लेकिन गांव में फ्लोराइड के दुष्प्रभाव आज भी बच्चों के दांत व महिला-पुरुषों के शरीर में अकडऩ के रूप में आसानी से देखे जा सकते है। खास बात यह है कि जिस उद्देश्य को लेकर पीएचई विभाग ने लाखों करोड़ों के संयत्र लगाये थे वह आज देख रेख के अभाव में जर्जर हो रहे है और प्लांट के अंदर बने पम्प सेट के कमरो में कुछ लोंगो ने भूसा भर रखा है।
करैरा के सीहोर क्षेत्र स्थित ग्राम दौनी, गोकंदा, फूलपुर, बिची, हथेड़ा, बरोदा, नरावरी, सीहोर, महेवरा गांव में कुल 10 हजार की आबादी है। इन गांव में जमीन के नीचे पानी में फ्लोराइड की मात्रा ढाई से तीन पीपीएम है, जबकि सामान्यत: यह मात्रा डेढ़ पीपीएम होना चाहिए। फ्लोराईड युक्त पानी का उपयोग करने की वजह से गांव के लोगों की हड्डियां कमजोर होने के साथ ही उनके शरीर में जकडऩ होने लगी है। कम उम्र में ही महिलाएं चलने के लिए वॉकर का सहारा ले रही हैं। गांव के एक युवक के हाथ-पैरों में इतनी परेशानी है कि वो शौच के लिए तक नहीं बैठ पाता। इतना ही नहीं गांव में रहने वाले छोटे बच्चों के दांतों में भी फ्लोराईड का प्रभाव दिखता है। उनके दांतों का कैल्शियम खत्म होने के साथ ही उनमें पीलापन व क्रेक नजर आ रहे हैं। धीरे-धीरे दांत टूटने लगते हैं और गांव के युवा भी बुजुर्ग की तरह नजर आते हैं। वहीं फ्लोराईड प्रभावित इन गांव में 16 साल पूर्व जल शोधन संयंत्र लगाए गए थे। जिनके रख-रखाव व मेंटीनेंस के नाम पर अभी भी राशि जारी हो रही है, जबकि वो बरसों से बंद पड़े हैं। हथेड़ा गांव में पानी पहुंचाने के लिए कांकर गांव से एक लाइन अलग से डाली गई थी, लेकिन वो भी मोटर खराब होने से बंद पड़ी है।

बोले स्कूली बच्चे
ठ्हथेड़ा गांव में रहने वाले रोहित कुशवाह व संदीप कक्षा 8 में पढ़ते हैं जबकि निशा कुशवाह 10 वीं की छात्रा है। बच्चों ने अपने दांत दिखाते हुए कहा कि हमारे दांत पीले हो रहे हैं, यह पानी की वजह से हो रहा है। हमें यह भी डर लग रहा है कि अब हमारे दांत पता नहीं कब टूटकर झड़ जाएं।


ठ्कक्षा 12 में पढऩे वाले संजू बाथम ने बताया कि मेरे दांतों में पीलापन आने के बाद वो टूटने भी लगे हैं। अब यही चिंता सताती है कि यदि दांत टूट जाएंगे तो फिर मैं खाना कैसे खा पाऊंगा और आगे का जीवन कैसे गुजरेगा।
ठ्ठगांव के मुन्ना रजक ने बताया कि 16 साल पूर्व तक मैं बिल्कुल ठीक था। लेकिन अब पूरे शरीर में ऐसी जकडऩ आ गई कि पैदल चलना व बैठकर खाना भी नहीं खा सकता। यहां तक कि मैं शौच के लिए भी नहीं बैठ पाता हूं। यह पानी तो हमारी जान लेकर ही रहेगा। क्योंकि शरीर खराब हो जाने से मेरी शादी भी नहीं हुई है।

एक साल से नहीं दिया वेतन
जलशोधन संयत्रों की देखरेख व मेंटीनेंस के लिए पीएचई द्वारा अस्थाई रूप से कर्मचारी नियुक्त किए गए। इनमें शामिल कल्याण सिंह बघेल, संजू सिंह राजपूत, यादवेंद्र परमार ने बताया कि हमें डेढ़ साल से वेतन नहीं दिया गया। हम लोग बिना वेतन के काम क्यों और कब तक करेंगे। इसलिए जलशोधन की योजना भी बंद पड़ी है।

हैंडपंप व बोर के पानी में फ्लोराइड अधिक होने की वजह से हम एक किलोमीटर दूर से पानी भरकर लाते हैं। फ्लोराइडयुक्त पानी का उपयोग होने की वजह से ग्रामीणों के शरीर में सुबह के समय हाथ-पैरों के जोड़ में असहनीय दर्द आज भी होता है। नलजल योजना भी बंद पड़ी है। हमने पीएचई को कई बार सूचित कर दिया, लेकिन कोई देखने नहीं आता।
बृजेश राजा परमार, सरपंच हथेड़ा

दांतों में पीलापन एवं शरीर में जकडऩ का कारण फ्लोराइड ही है। इसकी वजह से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं तथा शरीर में अकडऩ एवं कुबड़ापन होता है। चूंकि वह एरिया नरवर ब्लॉक में आता है। हमारे कार्य क्षेत्र में नहीं आता है। हम मामले से सीएमएचओ को अवगत कराएंगे।
डॉ प्रदीप शर्मा, बीएमओ करैरा