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डॉक्टरों की लापरवाही, प्रसूता की मौत, अस्पताल में हंगामा

Mahendra Kumar Rajore

Publish: Oct 08, 2019 16:52 PM | Updated: Oct 08, 2019 16:52 PM

Shivpuri

चिकित्सकों व नर्सों की तलाश में रातभर भटकता रहा प्रसूता का पति, किसी ने नहीं देखा
मेटरनिटी विंग में भर्ती प्रसूता के परिजनों ने भी लगाए स्टाफ पर पैसे मांगने के आरोप

शिवपुरी. जिला अस्पताल में सोमवार की सुबह एक प्रसूता की मौत सीजेरियन प्रसव के करीब 18 घंटे बाद मौत हो गई। प्रसूता के पति का आरोप है कि प्रसव के बाद से ही उसकी पत्नी की हालत खराब थी, वह बार-बार चिकित्सकीय स्टाफ को इस बारे में बताता रहा, लेकिन न तो कोई डॉक्टर देखने आया और न ही कोई नर्स। प्रसूता के पति का आरोप है कि चिकित्सकीय स्टाफ ने प्रसव के बाद न सिर्फ पैसे लिए, बल्कि कम पैसे मिलने पर इलाज में लापरवाही बरती। यही कारण है कि उसकी मौत हो गई। मेटरनिटी विंग में अन्य प्रसूताओं के परिजनों ने भी स्टाफ द्वारा पैसों की मांग करने सहित लापरवाही बरतने के आरोप खुल कर लगाए हैं।
जानकारी के अनुसार नरवर निवासी शकुंतला पत्नी शंकर जाटव को रविवार की सुबह प्रसव पीड़ा हुई तो उसका पति व अन्य परिजन उसे प्रसव के लिए जिला अस्पताल लेकर आए। जिला अस्पताल में दोपहर 12 बजे मेडिकल कॉलेज की चिकित्सक डॉ. शैली सेंगर ने उसका सीजर किया। सीजर के दौरान शकुंतला ने एक बेटी को जन्म दिया। शकुंतला के पति के अनुसार उसने डॉक्टरों से स्पष्ट मना किया था कि वह उसका सीजर न करें, इसके बावजूद उन्होंने उसकी पत्नी का सीजर कर प्रसव कराया। प्रसूता के पति के अनुसार प्रसव के बाद से ही शकुंतला की हालत बिगडऩे लगी। उसने लगातार स्टाफ को इस बात से अवगत कराया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया, उसे देखने तक नहीं आए, इसी कारण उसकी पत्नी की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और अंतत: उसकी मौत हो गई। शंकर जाटव का कहना है कि उसने पूरे स्टाफ को यहां तक कि सफाई वालों तक को मुंहमांगे पैसे दिए। इसके बावजूद उन्होंने कोई सुनवाई नहीं की, बल्कि और पैसों की डिमांड की। शंकर के आरोपों की पुष्टि वार्ड में भर्ती अन्य प्रसूताओं के परिजनों ने भी की। सभी का आरोप था कि बिना पैसे के यहां कोई स्टाफ सुनवाई नहीं करता। मेटरनिटी विंग में मौजूद एक अन्य महिला के अनुसार शंकर रात तीन बजे से भटक रहा था, लेकिन उसकी किसी ने सुनवाई नहीं की। सुबह साढ़े छह बजे जब एक नर्स देखने आई तो उसकी मौत हो चुकी थी, जिस पर वह उसे परिजनों को बिना कुछ बताए डिलीवरी रूम में ले गए। अस्पताल प्रबंधन ने काफी देर बाद प्रसूता की मौत की पुष्टि की तो उसका पति अपनी सुधबुध खो बैठा और उसने अपना हाथ एक खिडक़ी में लगे कांच में दे मारा, जिससे कांच फूट गया तथा उसका हाथ गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल के स्टाफ द्वारा प्रसव के बदले पैसे मांगने के आरोपों के संबंध में जब सिविल सर्जन डॉ. पीके खरे को फोन लगाया तो उन्होंने पहले तो ट्रेनिंग में होने की बात कही, बाद में देर शाम जब उन्हें फोन लगाए तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाए।
छीन ली नानी की गोद से बच्ची
प्रसूता की मां लक्ष्मी का कहना है कि उसकी बेटी की मौत की पुष्टि के बाद जब उसने नवजात बच्ची को उठाया तो अस्पताल का स्टाफ यह कहने लगा कि पहले एक कागज में साइन करो, नहीं तो हम तुम्हें न तो यह बच्ची देंगे और न ही प्रसूता की लाश देंगे। प्रसूता के पति ने बताया कि वह ऐसे कागजों में साइन करा रहे थे कि प्रसूता की मौत स्वभाविक हुई है और अस्पताल प्रबंधन की इसमें कोई लापरवाही नहीं है।
ये बोले वार्ड में भर्ती लोग
हम अपनी जच्चा करिश्मा गोस्वामी को लेकर यहां नौ दिन से भर्ती हैं, डॉक्टरों ने ऑपरेशन की बात कहते-कहते 5 दिन निकाल दिए हैं, लेकिन ऑपरेशन नहीं कर रहे। हमने कहा कि अगर कुछ परेशानी है तो आप रैफर कर दो या छुट्टी कर दो तो डॉक्टर कहते हैं अपनी रिस्क पर ले जाओ, हम छुट्टी नहीं करेंगे। अब न तो छुट्टी कर रहे हैं और न ही ऑपरेशन।
ज्योति गोस्वामी, प्रसूता की परिजन
हम अपनी प्रसूता पूनम जाटव को लेकर छह दिन पहले मारौरा से आए हैं। डॉक्टर कोई बीमारी नहीं बता रहे हैं, हमने एक माह पहले तीन बोतल खून दिया था, अब फिर कह रहे हैं खून की कमी है और खून चढ़ाने की कह रहे हैं। हम खून दे देंगे, लेकिन यह नहीं बता रहे हैं कि आखिर खून क्यों नहीं बन रहा है, बार-बार खून की कमी क्यों हो रही है।
ममता जाटव, प्रसूता की परिजन
प्रसूता सुबह तक पूरी तरह से ठीक थी, उसका आरोप गलत है कि उसकी कोई सुनवाई नहीं की गई। प्रसूता की मौत प्रसव के दौरान धमनियों व फेफड़ों में पानी भरने के बाद अटैक आने से हुई है। ऐसा बहुत नाममात्र के केसों में होता है, इसलिए इसका पहले से कोई निवारण उपाय नहीं किया जा सकता है। महिला को महज 15 मिनट के अंदर यह सब हुआ, इसलिए बहुत प्रयासों के बावजूद उसे नहीं बचाया जा सका।
डॉ शैली सेंगर, डॉक्टर