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नाग ने ऐसे लिया नागिन की मौत का बदला, हैरान कर देगी यह स्टोरी, देखें VIDEO

monu sahu

Publish: Sep 02, 2019 17:13 PM | Updated: Sep 02, 2019 17:57 PM

Shivpuri

Naag did take revenge for his serpent's death after three years जानकार ने कहा था दो मंजिला पर सोना वहां पर भी आकर डंस गया कोबरा,तीन दिन तक कमरे में बंद रहा नाग, संपेरे ने तंत्र-मंत्र से पकड़ा

संजीव जाट @ बदरवास

कहते हैं कि सांप की आंखों में पलक नहीं होती,इसलिए उसके रेटीना पर बनने वाली आखिरी तस्वीर उसकी मौत के समय से आंखों में स्थाई हो जाती है। जिसे नाग या नागिन देखकर अपने दुश्मन की फोटो अपनी आंख में कैद कर लेता है और फिर उसका बदला लेने का हर संभव प्रयास करता है। कुछ ऐसा ही हुआ शिवपुरी जिले के ग्राम टुडय़ावद में, जहां एक किसान से अपनी नागिन की मौत का बदला नाग ने तीन साल बाद लिया। इस नाग को उसी घर में परिजनों ने बंद कर दिया था,जिसे बाद में संपेरा पकडकऱ ले गया।

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महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्रामीण का पीछा तीन साल से लगातार नाग कर रहा था और एक जानकार ने उससे बचने का उपाय दो मंजिला मकान बनाकर उसमें सोने की सलाह दी थी। लेकिन नाग ने दो मंजिला की सीढिय़ां चढकऱ अपनी नागिन को मौत की नींद सुलाने वाले को डंस ही लिया। ग्राम टुडय़ावद में रहने वाले रामपाल यादव की मौत बीते 16 अगस्त को सर्पदंश से हो गई। जिस समय कोबरा ने काटा,उस समय रामपाल के साथ उनकी दो नातिन भी सो रहीं थीं, लेकिन सांप ने उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया।

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नाग के काटने की जानकारी मिलते ही परिजनों ने दोनों बच्चियों को कमरे से निकालकर उसे बंद कर दिया। पहली व दूसरी मंजिल में ताला लगाकर उसे बंद कर दिया तथा संपेरे को बुलाया। संपेरे ने कहा कि तीन दिन बाद उसे पकड़ लेंगे,तो पूरा परिवार न केवल जागता रहा, बल्कि उस कोबरा पर नजर भी रखे रहा। तीसरे दिन यानि 19 अगस्त को संपेरे ने आकर रामपाल को डंसने वाले कोबरा को पकड़ लिया। रामपाल की मौत के बाद टुडय़ावद के ग्रामीणों में यही चर्चा थी कि नागिन का बदला नाग और नाग का बदला नागिन जरूर लेती है।

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naag and nagin revenge : cobra was cut while coming there

तीन साल से पीछा कर रहा था कोबरा
मृतक रामपाल के पुत्र जगदीश यादव ने बताया कि लगभग तीन साल पूर्व खेत जोतते समय ट्रैक्टर के हल के पंजे में आ जाने से नागिन मर गई थी। जिसे पिता ने हल के पंजे में से अलग करके फेंक दिया था। उसके कुछ दिन बाद पिताजी को खेत से आते-जाते समय नाग दिखा,तो लगभग दो साल पूर्व रामपाल ने यह बात एक जानकार को बताई।तो उसने भी कहा कि नाग तुम्हारा पीछा कर रहा है और उससे तुम अपनी सुरक्षा रखो तथा रात में नीचे कमरे में न सोकर दूसरी मंजिल में चारपाई पर सोना।

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नाग से बचने के लिए रामपाल ने दो मंजिला मकान बनाकर उसमें सोने लगा। जगदीश ने बताया कि एक-दो बार घर के आसपास भी नाग को देखा था। रामपाल ने अपने दो मंजिला वाले कमरे में चारपाई के पास ही भूसा भी रख लिया था, ताकि जब कभी नाग वहां तक आए उसे भूसे में आग लगाकर जला देंगे। लेकिन यह तैयारी भी धरी रह गई और नाग अपनी नागिन की मौत का बदला ले गया।

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बीन बजाकर अंदर से पकड़ लाया संपेरा
रामपाल की मौत के बाद कमरे में बंद किए गए कोबरा को पकडऩे के लिए तीन दिन बाद संपेरा वहां पहुंचा और उसने गेट पर खड़े होकर कहा कि तुमसे यह वायदा है कि चार दिन बाद तुम्हें छोड़ देंगे और मेरे इस वायदे पर भरोसा करो और मेरी बात मानकर आ जाओ। यह कहकर वो बीन बजाता हुआ कमरे में अंदर गया, तो बाहर खड़े ग्रामीण होने वाले घटनाक्रम को देखने के लिए उत्सुक थे। कुछ देर तक तो बीन एक सुर में बजी, लेकिन फिर बीन की आवाज कुछ डिस्टर्ब हुई और संपेरा तेज कदमों से गेट के बाहर की ओर नाग को पूंछ से पकडकऱ लटकाए हुए निकला। फिर उसे डिब्बे में बंद करके ले गया।

naga and nagin

सांप से कौन होशियार रह पाएगा?
मृतक रामपाल के बेटे जगदीश ने बताया कि हमारे पिता का जब नाग पीछा कर रहा था,तब हमने और जानकार ने भी उनसे कहा था कि होशियार रहना। वो होशियार भी रहते थे और यह भी कहते थे कि अरे देख लेंगे,वो थोड़े जिद्दी स्वभाव के भी थे। लेकिन जब पिताजी को सांप ने डस लिया और मेरी दोनों बेटियों को,जो उनके साथ ही चारपाई पर सो रहीं थीं, उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया, तब हमारी समझ में आया कि सांप से होशियार कोई नहीं रह पाएगा।