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कमलनाथ जी इन किसानों को आपकी जरूरत है, नहीं मिली सहायता तो तबाह हो जाएंगे सैंकड़ो परिवार

Gaurav Sen

Publish: Oct 06, 2019 15:36 PM | Updated: Oct 06, 2019 15:41 PM

Shivpuri

huge raining in shivpuri district ruined crops: अधिकांश किसान दलित आदिवासी एवं कमजोर वर्ग के हैं और उन्हें बेटियों के विवाह से लेकर परिवार चलाने के लिए सरकारी मदद की आश है, लेकिन अभी तक यह मदद उन्हें नहीं मिली है। सरकारें सिर्फ आश्वासन देने में ही लगी हैं।

कोलारस. अपनी सारी पूंजी गंवाने के बाद साहूकारों से पैसा लेकर खेतों में अन्न पैदा करने वाले अन्नदाता पर इस बार अतिवृष्टि के चलते फसल तबाह हो जाने से अब उन्हें बेटियों की शादी कराने से लेकर आगे की फसल करने की चिंता सताने लगी है। अधिकांश किसान दलित आदिवासी एवं कमजोर वर्ग के हैं और उन्हें बेटियों के विवाह से लेकर परिवार चलाने के लिए सरकारी मदद की आश है, लेकिन अभी तक यह मदद उन्हें नहीं मिली है। सरकारें सिर्फ आश्वासन देने में ही लगी हैं।

जानकारी के अनुसार कोलारस विकासखण्ड के आदिवासी बाहुल्य ग्राम बैढ़ारी निवासी लोटू जाटव ने 4 बीघा जमीन में उड़द की फसल बोई थी, लेकिन अत्यधिक बारिश के चलते उड़द खराब हो गए। लोटू का कहना है कि 20 हजार रुपए पहले से ही साहूकार का देना है, उसके परिवार में 5 बेटी एवं 2 लडक़े हैं और बेटियां शादी लायक है, पैसों की किल्लत के चलते शादी करने की चिंता सता रही है। प्रेम आदिवासी के पति की तीन साल पूर्व मौत हो गई और पहले से ही कर्जदार प्रेम ने 5 बीघा में उड़द बोया था जो बर्बाद हो गया, प्रेम के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं और बड़ी बेटी शादी करना है। अतिवृष्टि की शिकार बनी बेवा प्रेम आदिवासी सरकारी मदद की आश लगाए बैठी है, लेकिन राहत मिलने के दूर-दूर तक आसार नजर नहीं आ रहे हैं। शौकीन जाटव निवासी बैढ़ारी ने 9 बीघा में उड़द किया लेकिन यह भी खराब हो गया और शौकीन के तीन बच्चों में दो बेटियां विवाह लायक हैं। बैढ़ारी निवासी सीताराम यादव पर पहले से ही 60 हजार रूपए साहूकार का कर्जा है, ऊपर से 4 बीघा में खड़ी उड़द बेकार होने से वह चितिंत है कि लडक़ी के हाथ पीले कैसे होंगे, ऐसे में यादव को जमीन बिकने का डर भी सता रहा है।

गिरवी जमीन बेचने के अलावा कोई चारा नहीं
12 बीघा जमीन के सहारे चार बच्चों का पालन-पोषण करने वाले बलवंता आदिवासी एवं उनकी पत्नी गुड्डी बाई नि:शक्त हैं, बलवंता ने तीन लडक़ों व एक लडक़ी की शादी करने के लिए 12 बीघा जमीन को 50 हजार रुपए में यह सोच गिरवी रखा था कि फसल अच्छी होने पर वह जमीन मुक्त करा लेगा लेकिन इस बार प्रकृति के कहर ने उड़द की फसल को बर्बाद कर दिया, अब जमीन में से कुछ हिस्सा बेचने के अलावा कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। बलवंता एवं उनकी नि:शक्त पत्नी के बच्चे भी शादी के बाद अलग रहने लगे और उन्हें शासन द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली फेमली पेंशन तक नसीब नहीं हो रही है।

गांव जाकर देखेंगे हालात
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में वर्ष में एक बार सामूहिक विवाह होते हैं, मेरे आने से पूर्व यह आयोजन हो चुका है, यदि फसल खराब होने से शादी में रुकावट आ रही है तो वरिष्ठ अधिकारियों से परामर्श लेने के बाद इस तरह के किसानों की विवाह योग्य बेटियों के प्रस्ताव आवेदन आने पर तैयार कराए जाएंगे। नि:शक्त आदिवासी दंपति को पेंशन नहीं मिल रही है तो बहुत जल्दी पेंशन प्रकरण तैयार कराए जाएंगे, मैं स्वयं गांव जाकर हालात देखूंगा।
जयदेव शर्मा, सीईओ जनपद पंचायत कोलारस