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भतीजे का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर चाचा ने पट्टे की जमीन कराई अपने बेटा बहू के नाम

Rakesh shukla

Publish: Sep 07, 2019 16:25 PM | Updated: Sep 07, 2019 16:25 PM

Shivpuri

जमीन पर कब्जे के लिए दर-दर भटक रहा राजकुमार, शिकायत के बाद भी नहीं हो रही सुनवाई

 

शिवपुरी-करैरा. जिले के करैरा नगर में तहसील के सेवानिवृत भृत्य ने कुछ साल पूर्व फर्जी तरीके से अपने जिंदा भतीजे का मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर उसकी जमीन को अपने बेटा व बहू के नाम करा लिया। इस जमीन का पट्टा इसी भृत्य ने अपने भाई के नाम कराया था, लेकिन जब भाई की मौत हो गई तो उसने भाई के बेटे को फर्जी तरीके से दस्तावेजो में मृत बताकर इस फर्जीवाड़े को को अंजाम दिया। मामले में शिकायत हुई तो तहसील से जमीन तो भतीजे के नाम कर दी गई, लेकिन कब्जा अभी भी चाचा व उनके बेटो का है। अब जिंदा भतीजा जमीन के लिए अधिकारियों के पास शिकायत कर न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है, लेकिन उसकी सुनने वाला कोई्र नही है।
जानकारी के मुताबिक रामकुमार (53)पुत्र गरीबा बरार निवासी करई थाना करैरा ने बताया कि करैरा तहसील में भृत्य के पद से रिटायर हुए मिठ्ठनलाल बरार ने सालों पहले ग्राम कारौंठा में एक शासकीय जमीन का पट्टा मेरे पिता व अपने भाई गरीबा बरार के नाम कराया था। पिता की मौत के बाद जमीन गरीबा के बेटे रामकुमार के नाम पर आ गई। चूंकि समय के साथ वह जमीन लाखों रुपए की हो गई तो मिठ्ठनलाल ने तहसील में काम करते हुए धोखाधड़ी कर अपने जिंदा भतीजे रामकुमार बरार का एक फर्जीमृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया और इस फर्जी दस्तावेज की मदद से मिठ्ठनलाल ने जमीन को अपने बेटे व बहू के नाम पर करा लिया। रामकुमार कुछ महीने पूर्व अपनी जमीन की नकल निकलवाने तहसील पहुंचा तो जमीन उसके चाचा के बेटे व बहू के नाम पर दर्ज थी और तहसील में जो दस्तावेज लगे थे उसमें रामकुमार को मृत व अविवाहित बताया गया। इस मामले की शिकायत जब रामकुमार ने तहसील में की तो तहसीलदार ने पूरा मामला समझने के बाद जमीन तो नकल में रामकुमार के नाम कर दी, लेकिन आज भी उस जमीन पर चाचा व उनके बेटों महेश व हितेश का कब्जा है। अभी तक उसे जमीन नहीं मिल पाई है। इसके अलावा इस पूरे मामले में तमाम शिकायत होने के बाद भी चाचा व उनके बेटों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब यह लोग मुझे मारने की धमकी दे रहे है।

यह मामला बहुत पुराना है, जिस व्यक्ति ने यह फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए धारा 133 के तहत शपथ पत्र बनाकर दिया होगा तो वह व्यक्ति इसके लिए खुद जिम्मेदार होगा। अगर कोई ऐसा शपथ पत्र नहीं दिया गया है तो जिस कर्मचारी व अधिकारी ने इस फर्जीप्रमाण पत्र को बनाया है उसके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज होगा। मैं पूरे मामले को दिखवाकर इसमें जांच के बाद उचित कार्रवाई करवाता हूं।
दिनेश श्रीवास्तव
सीएमओ, नगर पंचायत करैरा