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दोपहर तक भूख से तड़पते रहे मूक-बधिर बच्चे

Mahendra Kumar Rajore

Publish: Aug 27, 2019 10:00 AM | Updated: Aug 26, 2019 23:21 PM

Shivpuri

कई बच्चे खुद के खर्च पर पहुंचे कैंप में इलाज कराने
मामला आरबीएसके के तहत जिला अस्पताल में लगे कैंप का

शिवपुरी. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत सोमवार को जिला अस्पताल में मूक-बधिर बच्चों के लिए लगाए गए कैंप में दोपहर बाद तक बच्चे भूख-प्यास से तड़पते रहे। उन्हें न तो खाने की व्यवस्था की गई और न ही लाने की। आधे से ज्यादा बच्चे खुद के खर्च पर कैंप में चेकअप कराने के लिए आए।
उल्लेखनीय है कि जन्मजात विकृति के साथ पैदा हुए बच्चों के उपचार के लिए समय-समय पर आरबीएसके के जिला अस्पताल में कैंप का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में 26 अगस्त को जिला अस्पताल में मूक-बधिर बच्चों के उपचार के लिए कैंप लगाया गया। कैंप में जिलेभर से आरबीएसके के डॉक्टरों द्वारा चिह्नित किए गए 68 बच्चों का चेकअप ग्वालियर से आए बीआईएमआर हॉस्पिटल के डॉक्टरों को करके उनमें से ऑपरेशन योग्य बच्चों को छांटना था। खास बात यह है कि कैंप में चेकअप व उपचार के लिए आए बच्चों को आने-जाने के वाहन सुविधा विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई जानी थी, परंतु आधे से ज्यादा बच्चों को उनके परिजन खुद के खर्च पर बस से जिला अस्पताल लेकर आए। जब परिजनों से इस संबंध में बात की गई तो उनका कहना था कि उन्हें फोन पर सूचना दी गई थी कि बच्चे को लेकर चेकअप के लिए जिला अस्पताल पहुंच जाना तो वह आ गए हैं। इसके अलावा विभाग को ही उनके खाने का इंतजाम करवाना था, लेकिन दोपहर ढाई बजे तक बच्चों को विभाग द्वारा खाना तो क्या, बिस्किट के पैकेट तक उपलब्ध नहीं कराए गए थे, ऐसे में यह बच्चे दोपहर तक भूख-प्यास से बिलखते रहे। खास बात यह है कि सीएमएचओ ऑफिस से दो दिन पहले जारी हुए प्रेस नोट के अनुसार बच्चों को जिला अस्पताल तक लाने और वहां से ले जाने की व्यवस्था विभाग द्वारा की जानी थी और उन्हें भोजन व्यवस्था भी विभाग को ही करनी थी।
89 बच्चों का चेकअप, 30 ऑपरेशन के लिए चिह्नित
आरबीएसके प्रभारी अखिलेश शर्मा ने बताया कि इस कैंप में जिलेभर से 89 बच्चे आए थे, इनमें से 20 बच्चों को पोकलियर इमप्लांट के लिए चिह्नित किया गया। इस ऑपरेशन के लिए प्रत्येक बच्चे को साढ़े छह लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं, जबकि 10 बच्चे सीएसओएम (कान से सर आना) के लिए चिह्नित किए हैं। इन बच्चों के लिए 18 से 35 हजार रुपए स्वीकृत किए गए हैं।
ये बोले अभिभावक
मैं अपने बच्चे कान्हा को इलाज के लिए लाई हूं, मैं अपने खर्च पर पर बस से बच्चे को लाई हूं। अभी तक न तो नाश्ता दिया गया है और न ही खाना।
कल्लोबाई, कुटवारा
मुझे भूख लग रही थी इसलिए मैं बाहर जाकर अपने पैसों से नाश्ता करके आई हूं। मुझे अभी तक न तो नाश्ता दिया गया है और न ही खाना। मुझे लाया जरूर सरकारी गाड़ी से गया है।
प्रियंक, मरीज, खनियाधाना
मैं अपने बेटी निशा व बेटे रीतेश को अपने खर्च पर लेकर आई हूं। अभी तक बच्चों को न खाना दिया गया है और न ही नाश्ता। हमें लाने के लिए किसी भी वाहन की कोई व्यवस्था नहीं की गई, हम अपने खर्च पर आए हैं।
क्राति, छितरी
ये बोले जिम्मेदार
हमने बच्चों को खाना बंटवाया है, हम खाना तभी तो बांटते हैं जब हमें व्यवस्था और समय अनुकूल लगता है और उसी समय पेयजल की व्यवस्था करते हैं। बच्चों को हम अपनी गाडिय़ों से लाए हैं, रही बात लोगों द्वारा यह कहने कि वह अपने खर्च पर आए हैं और खाना नहीं मिला है तो हम इस बात के लिए बाउंडेड नहीं हैं कि हम हर बच्चे को खाना खिलाएं और गाड़ी से लेकर आएं।
अखिलेश शर्मा, प्रभारी, आरबीएसके