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वेतन से खर्च करके आदिवासी बालिकाओं के लिए जुटा रहे हैं पठन-पाठन की सामग्री

Brijesh Chandra Sirmour

Publish: Jan 18, 2020 20:59 PM | Updated: Jan 18, 2020 20:59 PM

Shahdol

स्कूल में आधुनिक संसाधनों को जुटाकर बालिकाओं को दे रहे हैं बेहतरीन शिक्षा, सरकारी स्कूल में आदिवासी बालिकाओं को मिल रही है प्राइवेट स्कूल से भी बेहतर सुविधा

शहडोल. संभागीय मुख्यालय में संचालित शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय वार्ड नम्बर एक ऐसा विद्यालय है। जहां पदस्थ प्रधानाध्यापक एवं उनके सहयोगी शिक्षक-शिक्षिकाएं सरकारी बजट या अन्य राशि का इंतजार नहीं करते बल्कि वह अपने वेतन की राशि खर्च करके विद्यालय की छात्राओं को पठन-पाठन की सामग्रियों की व्यवस्था करते हैं। साथ ही छात्राओं की सुरक्षार्थ कई संसाधन भी जुटाए गए है। वर्तमान में विद्यालय में जिस प्रकार के संसाधन उपलब्ध है और जिस प्रकार की शैक्षिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। उसकी मिसाल देकर दूसरे स्कूलों की शैक्षिक गतिविधियों में सुधार लाया जा सकता है। यहां अध्ययनरत छात्राओंं के लिए शिक्षा की लगभग हर बेहतर सुविधा निजी स्कूलों की तरह उपलब्ध है। इस विद्यालय की सबसे खास बात यह है कि यहां की आवश्यकताओं के लिए सरकारी बजट का इंतजार नहीं करना पड़ता बल्कि शहर के कई लोग सहयोग के लिए तत्पर रहतें हैं। नतीजतन इस स्कूल में शिक्षा संबंधी हर संसाधन उपलब्ध हैं। जिनके उपयोग से छात्राएं अपने बेहतर भविष्य को संवार रही है।

वेतन व जनसहयोग से इन संसाधनों को जुटाया
-सीमेन्ट के खंभे गड़वाकर वारवेट की सौ फीट लंबी फेनसिंग कराई। जिसमें करीब 25 हजार रुपए की लागत आई।
-बाउंड्रीवाल बनवाकर स्कूल का मुख्य गेट, रिवाल्विंग गेट एवं काउकेचर लगवाया। जिसमें करीब दो लाख रुपए की लागत आई।
-70 हजार रुपए की लागत से पुरूष सुविधा-घर का निर्माण कराया जा रहा है।
-बोरबेल में सबमर्सिबल पंप लगवाकर पानी टंकी का निर्माण कराया और पानी पीने के लिए दस नल लगवाए। जिसमें पचास हजार रुपए खर्च किए।
-छात्राओं की ग्रुप रीडिंग के लिए करीब 30 हजार रुपए की लागत से 58 टेबिलें बनवाई।
-चार सीलिंग एवं एक पेरेस्टेल और दो एक्जास्ट फैन, एक लेक्चर स्टैण्ड, नोटिस बोर्ड, दक्षता पटल शो-केश और रूचि एवं रचनात्मक पटल लगवाया।

इन शिक्षकों का रहता है सहयोग
विद्यालय में संसाधनों को जुटाने में प्रधानाध्यापक संतोष कुमार श्रीवास्तव, शिक्षक लक्ष्मी कुमार मिश्र, विजय भूषण श्रीवास्तव, निशात खान, सीमा द्विवेदी, रंजीता शुक्ला, नीना ङ्क्षसह, नीता ङ्क्षसह बघेल, गायत्री ङ्क्षसह, शलभ शर्मा, मनीता ङ्क्षसह और निशा द्विवेदी अपनी महती भूमिका का निर्वहन करते हैं।
इनका कहना है
विद्यालय में छात्राओं के पठन पाठन के लिए हम लोग शासकीय बजट का इंतजार नहीं करते बल्कि अपने वेतन से आवश्यक सामग्रियों को खरीद कर छात्राओं के पठन-पाठन में अभिरूचि बनाए रखने का हर संभव प्रयास करते हैं। साथ ही जन सहयोग से संसाधन जुटाए जाते हैं।
संतोष कुमार श्रीवास्तव, प्रधानाध्यापक, कन्या स्कूल वार्ड नं. एक, शहडोल

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