स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

उन्नत किस्म के बीजों की बोनी से मिलेगा फसल का ज्यादा उत्पादन

Brijesh Chandra Sirmour

Publish: Dec 08, 2019 07:05 AM | Updated: Dec 07, 2019 21:05 PM

Shahdol

कृषि वैज्ञानिक ने दी समसामयिक सलाह-कहा उपचारित बीजों की करें बोनी

शहडोल. ठंड अब शुरू हो चुकी है और रबी फसलों की बुबाई का समय आ गया है। अधिकांश कृषकों के द्वारा धान की ज्यादा फसल लेने की वजह से आदिवासी अंचल में रबी फसलों की बोनी देर से की जाती है। जिसमें गेंहू, चना व काबुली चना की फसल भी शामिल है। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. मृगेन्द्र सिंह व मृदा वैज्ञानिक डॉ. पीएन त्रिपाठी ने कृषकों को समसामयिक सलाह देकर उन्नत बीजों को उपचारित करने के बाद बोनी करने को कहा है। ताकि फसलों का बेहतर और ज्यादा उत्पादन मिल सके।गेहूं के उन्नत बीजों में सिंचित जी डब्लू-322 और जी डब्लू 366 है। सिंचित पिछैती बोनी के बीजों में एचआई-1544, पूषा-111, एचडी-2864, एमपी 4010 और जेडब्लू-1202 है। गेहूं के बीजों को उपचारित करने के लिए बीटा वैक्स दो ग्राम प्रति क्ंिवटल बीज में उपयोग करे। चना के उन्नत बीजों में जेजी-12, जेजी-14 और जेजी-74 शामिल है। चना के बीजों को दो ग्राम थाइरम एवं एक ग्राम फारब्रेन्डाजिम साथ ही एक ग्राम अमोनियमालिवडेट प्रति किलो बीज में उपयोग करें। काबुली चना के उन्नत बीजों में कॉक-2 और जॉकी-9218 हैं।जिसके उपचार के लिए दस ग्राम रायजोबियम प्रति किलो इस्तेमाल करें।

[MORE_ADVERTISE1]