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रेलवे के सौर ऊर्जा प्लांट से हर माह 90 हजार रुपए की बचत

Brijesh Chandra Sirmour

Publish: Jan 24, 2020 20:31 PM | Updated: Jan 24, 2020 20:31 PM

Shahdol

शहडोल के तीन सौर ऊर्जा पावर प्लांट से जनरेट हो रही है 95 किलो वाट की बिजली

शहडोल.बिजली बचत करने के लिए भारतीय रेलवे में विशेष जोर दे रही है। इस बचत के लिए सौर ऊर्जा का रास्ता अपनाया गया है। भारतीय रेलवे की योजना में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे कदम से कदम मिलाकर चल रही है। बिजली बचत की राह में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत शहडोल रेलवे स्टेशन में तीन स्थानों पर सौर्य उर्जा प्लांट लगाकर प्रतिमाह 90 हजार रुपयों की बचत कर रहा है। रेलवे स्टेशन, रेलवे स्कूल और रेलवे हास्पिटल में लगाए गए सौर्य उर्जा प्लांट से करीब 95 किलो वाट (पी) की बिजली जनरेट कर 12 हजार यूनिट प्रतिमाह बिजली का भुगतान विद्युत मंडल द्वारा रेलवे को किया जा रहा है। इस प्रकार रेलवे विभाग द्वारा सौर्य उर्जा से बिजली की बचत कर उर्जा संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है।
बिजली लेने व देने का लगा है मीटर
बताया गया है कि शहडोल में रेलवे स्टेशन व कालोनी में एक बाद एक रेलवे की बिल्डिंग में सौर्य उर्जा के प्लांट सिस्टम को स्थापित कर, उनसे विद्युत उत्पादन लिया जा रहा है। पहले क्रू-लाबी में 40 किलोवॉट के पैनल लगाए गए। फिर रेलवे अस्पताल में एक और 40 किलोवॉट के पैनल व रेलवे स्कूल भवन में 15 किलोवॉट क्षमता के पैनल स्थापित किए गए। जिससे कुल 95 किलोवॉट का बिजली उत्पादन हो रहा है। इसके लिए पुरानी बस्ती स्थित रेलवे फाटक के पास बिलीविकेशनल मीटर लगाया गया है। जिसके माध्यम से विद्युत मंडल रेलवे से कितनी बिजली ले रहा है और रेलवे का कितनी बिजली दे रहा है। इसकी जानकारी मिल जाती है।
प्लांट में एक रुपया भी नहीं लगा
पता चला है कि शहडोल के रेलवे परिसर में लगे तीन सोलर सिस्टम की खास बात यह है कि इसमें रेलवे को एक रुपया खर्च नहीं करना पड़ा है। तीनों सोलर प्लांट अजूरे पॉवर रूफटॉप फ्लोर प्रा. लिमि. द्वारा लगाए गए हैं। रेलवे ने सिर्फ जगह उपलब्ध कराई है। यह कंपनी प्लांट लगाकर रेलवे को बिजली सप्लाई कर रही है।
300 केव्हीए घटाया लोड
बताया गया है कि पूर्व में शहडोल रेलवे एरिया में 800 केवीए का विद्युत लोड था। जिसे घटाकर 510 केवीए तक लाया गया है। इसके लिए रेलवे के प्रतिमाह करीब 14 से 15 लाख रुपए का भुगतान करना पड़ता है। जिसमें सौर्य उर्जा प्लांट से मिलने वाली 90 हजार रुपए की बिजली की कीमत घट जाती है और रेलवे को करीब 13-14 लाख का ही भुगतान करना पड़ता है। रेलवे कॉलोनी के क्वार्टरों में लगे विद्युत मीटरों की रीडिंग भी रेलवे विभाग द्वारा कराई जाती है और उसका भुगतान संंबंधित कर्मचारी के वेतन से लिया जाता है।
इनका कहना है
शहडोल रेलवे एरिया में लगे तीन सौर्य उर्जा प्लांट से प्रतिमाह करीब 90 हजार रुपए की बचत हो रही है। रेलवे में बिजली का लोड भी काफी कम हो गया है। इस प्रकार पहले हम विद्युत मंडल से सिर्फ बिजली खरीदते थे, लेकिन अब मंडल को सौर्य उर्जा की बिजली बेंच रहे हैं।
सुरेन्द्र जलतारे, एसएसई(इलेक्ट्रिक जनरल), रेलवे शहडोल

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