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पपीता व नीबू के साथ अंतरवर्ती खेती से बढ़ाई आमदनी, देखें वीडियो

Brijesh Chandra Sirmour

Publish: Jan 18, 2020 21:31 PM | Updated: Jan 18, 2020 21:31 PM

Shahdol

देवगवां के कृषक ने मूली, गाजर, चुकन्दर, पालक, मेथी, टमाटर और मिर्ची के उत्पादन के बाद पपीता व नीबू का लेंगे भरपूर उत्पादन

बृजेश चन्द्र सिरमौर
शहडोल. धरती से रुपया कमाने का मंत्र को जगाने का काम संभागीय मुख्यालय से लगे ग्राम देवगवां के बुजुर्ग कृषक यूनूस खान कर रहे हैं। वह खेती-किसानी के कार्य से पिछले कई वर्षों से अंतरवर्ती फसल से अपनी आमदनी बढ़ा रहे है। इस बार उन्होने पपीता एवं नीबू की खेती में अंतरवर्ती कइ फसलों का उत्पादन लेकर जहां एक ओर पपीता व नीबू की पैदावार में लागत को मुनाफा में तब्दील कर दिया है। वहीं दूसरी ओर एक के बाद एक कई सब्जीवर्गीय फसलों से आमदनी भी बढ़ाई है। पिछले माह नबम्बर में उन्होने उन्नत किस्म के ताइवान पपीता के छह सौ और कागदी नीबू के चार सौ पौधों का रोपण किया। इसके बाद इसमें मूली, गाजर, चुकन्दर, पालक, मेथी, टमाटर और मिर्ची की अंतरवर्ती खेती शुरू कर दी। जिससे उन्होने दो माह के भीतर ही मूली, मिर्ची, पालक व मेथी का रिकार्ड उत्पादन लेकर पपीता व नीबू की खेती की लागत को शून्य कर दिया, बल्कि काफी मुनाफा भी कमाया है। अब भविष्य में उन्हे पपीता व नीबू से जो भी उत्पादन मिलेगा वह उनका शुद्ध मुनाफा होगा।
पचास का पौधा देगा 2500 रु. की आमदनी
कृषक यूनूस खान ने बताया कि पपीता के एक पौधे को रोपित करने में पचास रुपए की लागत आई है। जो एक साल बाद एक पौधे में 25 किलो और दूसरे साल एक क्विंटल का उत्पादन देगा। इस प्रकार दो सालों में पपीता के एक पौधे से सवा क्ंिवटल उत्पादन मिलेगा। इसी प्रकार चार साल बाद नीबू के एक पौधे से साल में दो बार लागत से कहीं ज्यादा उत्पादन मिलेगा।
हर महीने मिल रहा अंतरवर्ती फसल का लाभ
पपीता और नीबू को पौधरोपण के दो माह बाद से ही कृषक यूनूस खान को अंतरवर्ती फसलों का उत्पादन मिलना शुरू हो गया। वह अभी तक पांच क्ंिवटल मिर्ची, पचास किलो पालक, पचास किलो मेथी और 75 किलो मूली का उत्पादन लेकर बाजार से मुनाफा कमा चुके हैं। आगामी महीनों में वह चुकन्दर, गाजर और टमाटर का भी रिकार्ड उत्पादन लेगे। तब तक उनके पपीते के पौधे फल देने लगेंगे। इसके बाद नीबू के पौधे भी फल देने को तैयार हो जाएगे।

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