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देश की रक्षा के लिए हर चुनौती इन्हे है स्वीकार

Brijesh Chandra Sirmour

Publish: Jan 14, 2020 20:52 PM | Updated: Jan 14, 2020 20:52 PM

Shahdol

आर्मी डे पर विशेष-देश की रक्षा की कहानी-फौजियों की जुबानी

शहडोल. हमारे देश के चारों तरफ संकट की सीमाएं बनी हुई है, इन सीमाओं को सुरक्षित रखने में हमारी जल, थल और वायु सेना के वीर सैनिक अपनी महती भूमिका का निर्वहन करते हैं। देेश की रक्षा के लिए इन्हे हर चुनौती स्वीकार रहती है। हमारे देश के सैनिकों ने कभी भी किसी के सामने घुटने नहीं टेके। इनका आदर्श वाक्य करो या मरो है और इनकी बदौलत ही हम चैन से अपना जीवन जी पा रहे हैं। जब कभी हमारे देश पर संकट मंडराया हैं तब हमारे वीर सैनिकों ने ही उसका अंतिम दम तक डटकर मुकाबला किया है। देशभक्ति का जज्बा को सदैव कायम रखने वाले 7 एमपी आई कम्पनी एनसीसी कार्यालय में पदस्थ थल सेना के कुछ फौजियों से पत्रिका ने चर्चा की, तो उन्होने अपनी अजेय, अपराजिता, अनुशासन, निर्भीकता एवं देशभक्ति की कई कहानियां बताई।
कारगिल में आधी रात को उग्रवादियों को खदेड़़ा
44 वर्षीय सूबेदार रवीन्द्र यादव ने बताया कि 17 जुलाई 1999 को कारगिल के झलास सेक्टर के बिम्बर घाटी में ड्यूटी के दौरान रात दो बजे मिरानाइट साइड से उन्हे एक नाव से 150 उग्र्रवादी नदी पार करते दिखाई दिए। जिसकी जानकारी उन्होने तत्काल कंपनी कमांडर मेजर अजय सिंह को दी और उनके आदेश पर फायरिंग शुरू कर दी गई। करीब आठ घंटे की लगातार फायरिंग के बाद उग्रवादियों ने सफेद झंडा दिखा कर वापस अपनी सीमा पर चले गए।
कश्मीर में भूखे रहकर आतंकियोंं का किया सफाया
48 वर्षीय सूबेदार इनायत खान ने बताया कि जम्मू एंड कश्मीर के कूपवाड़ा के 21 राष्ट्रीय राइफल बटालियन में जब वह पदस्थ थे। तब 25 नवम्बर 2016 को कूपवाड़ा के बगजबेली में कुछ आतंवादी घुस आए थे। जिनसे मुकाबला करने के लिए राष्ट्रीय राइफल्स के 21, 29 और 30 बटालियन के जवानों ने मोर्चा खोला था और आपरेशन चलाकर चार दिनों तक भूखे प्यासे रहकर आतंकवादियों से मुकाबला किया गया। जिसमें चार आंतकवादी मारे गए थे।

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