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यात्री ट्रेनों को रद्द कर हर दिन गुजार रहे कोयले की 50 गाडिय़ां

Brijesh Chandra Sirmour

Publish: Aug 20, 2019 07:00 AM | Updated: Aug 19, 2019 21:24 PM

Shahdol

पत्रिका इन्वेस्टिगेटिव-11 महीने से लगातार रद्द की जा रही हैं ट्रेनें

शहडोल। बिलासपुर- कटनी रूट में कोयला की गाडिय़ों को गुजारने के लिए यात्री ट्रेनों को रद्द किया जा रहा है। दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे बिलासपुर मंडल के अंतर्गत आदिवासी अंचल के बिलासपुर-कटनी मार्ग पर सुनियोजित तरीके से पिछले करीब ग्यारह महीनों से लोकल ट्रेनों को रद्द करने का सिलसिला जारी है। छात्र-छात्राओं की पढ़ाई, व्यापारियों का व्यापार और शासकीय व अशासकीय कर्मचारियों के लिए यह बड़ी समस्या बन गई है। दूसरी ओर रेलयात्रियों के दैनिक जीवन में बाधाएं खड़ी हो रही है। हालात इतने ज्यादा खराब हो गए है कि रेल यात्रा करने से पहले लोगों को ट्रेनों के रद्द होने का डर सताने लगता है और अधिकांश लोग रेलयात्रा से परहेज भी करने लगे हैं। ऐसा भी नहीं है कि ट्रेनों के रद्द होने की जानकारी अफसर, जनप्रतिनिधियों को न हो। रेलयात्रियों ने कई बार क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत भी कराया लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। अब रेलयात्रियों का आक्रोश अब आंदोलन में तब्दील हो रहा है। रेलयात्रियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है और बड़े आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।
कमजोर नेतृत्व, बेसुध जनप्रतिनिधि
लोगों का मानना है कि यह सारे हालात आदिवासी अंचल में सक्षम नेतृत्व के अभाव की वजह से बन रहे हैं। क्षेत्र के अधिकांश जनप्रतिनिधियों को यात्री ट्रेनों की समस्याओं की कोई जानकारी तक नहीं है और वह इस समस्या से अपना पल्ला झाड़ते नजर आते हैं। जबकि इसके ठीक विपरीत बिलासपुर, कटनी और जबलपुर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की सक्रियता से रेल प्रशासन रद्द ट्रेन को तुरंत चलवाने को विवश हो गया, लेकिन आदिवासी अंचल में पिछले करीब एक साल से एक के बाद एक ट्रेनों को रद्द करने का सिलसिला जारी है।
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28 सितंबर से शुरू, 11 माह बीता, नहीं खत्म हुआ सिलसिला
करीब 11 महीने पूर्व 28 सितम्बर 18 से लोकल टे्रन को रद्द करने का सिलसिला शुरू हुआ था, जो अब तक जारी है। 28 सितम्बर को कटनी मुडवारा-चिरमिरी पैसेंजर को तो 29 सितम्बर को चिरमिरी-कटनी मुडवारा पैसेंजर और बिलासपुर-कटनी-बिलासपुर मेमू को रद्द किया गया था। 29 सितम्बर को ही अम्बिकापुर-जबलपुर एक्सप्रेस को तीन घंटे और चिरमिरी-बिलासपुर पैसेंजर व चिरमिरी-चंदिया-चिरमिरी पैसेंजर 1.30 घंटे देरी से रवाना किया गया था। यात्री अब तक इंतजार में हैं, लेकिन रद्द होने का सिलसिला खत्म ही नहीं हो रहा है।
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इस तरह एक ही रूट की ट्रेन कर रहे हैं रद्द
- चिरमिरी-कटनी मुड़वारा शटल टे्रन प्रत्येक बुधवार व शनिवार
- कटनी मुड़वारा-चिरमिरी शटल टे्रन प्रत्येक मंगलवार व शुक्रवार
- अंबिकापुर-जबलपुर-अंबिकापुर एक्सप्रेस टे्रन प्रतिदिन
- बिलासपुर-कटनी मेमू ट्रेन प्रत्येक बुधवार व शनिवार को शहडोल के आगे
- चिरमिरी-चंदिया पेसेन्जर टे्रेन प्रत्येक बुधवार व शनिवार को शहडोल के आगे
- अंबिकापुर-शहडोल लोकल टे्रन प्रत्येक बुधवार व शनिवार को अनूपपुर के आगे
मेंटनेंस का नाम और हर दिन गुजार रहे 50 कोयले के रैक
बिलासपुर-कटनी सेक्शन में यात्री ट्रेनों को रद्द कर कोयला रैक को ज्यादा से ज्यादा निकाला जा रहा है। प्रतिदिन 50 से 60 कोयला के रैक की निकासी हो रही है। विभागीय अधिकारियों का भी स्पष्ट कहना है कि राजस्थान सहित अन्य कई विद्युत घरों में कोयला पहुंचाने के लिए यात्री ट्रेनों को लेट व कैंसिल किया जा रहा है। यात्री ट्रेनों को रदद करने के लिए रेल प्रशासन पहले तो मेगा ब्लाक व आवश्यक रख-रखाव के नाम पर यात्री ट्रेनों के रद्द व लेट करने की सूचना देता था और जब यात्रियों के विरोध के स्वर नहीं उभरे तो अब बेखौफ होकर अपरिहार्य कारण की सूचना देकर यात्री ट्रेनों को कैंसिल व लेट करना शुरू कर दिया।
पत्रिका पड़ताल : खदान से बढ़ी है रेल यात्रियों की समस्या
पत्रिका के पड़ताल में पता चला कि छत्तीसगढ़ के सूरजपुर अजनी के पास जब से कोयला की खदान शुरू हुई है, तब से बिलासपुर-कटनी मार्ग के रेल यात्रियों की परेशानियां बढ़ गई है। यह खदान पिछले 17 मई से शुरू हुई है और इसी खदान का ज्यादा से ज्यादा कोयला राजस्थान विद्युत उत्पादन केन्द्र भेजा जा रहा है। जिसके लिए प्रतिदिन 50-60 कोयले की रैक में आधी रैक खदान की निकाली जा रही है और यात्री ट्रेनों को भी डिस्टर्ब किया जा रहा है। इसका खामियाजा पूरे संभाग के साथ आसपास के जिले के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
छात्र वर्ग : पांच सौ छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित
लोकल ट्रेनों के माध्यम से कोतमा, बिजुरी, पेन्ड्रा, अनूपपुर, अमलाई, बुढ़ार, पाली, नौरोजाबाद, करकेली, उमरिया और चंदिया के करीब पांच सौ अधिक विद्यार्थी प्रतिदिन अपनी पढ़ाई करने प्रतिदिन संभागीय मुख्यालय आते हैं, मगर सप्ताह में चार दिन लोकल ट्रेनों के रद्द रहने से वह सप्ताह में महज तीन दिन ही आ पाते हैं। गौरतलब है कि संभागीय मुख्यालय में मेडिकल, इंजीनीयरिंग व डिग्री कॉलेज के साथ बीटीआई, आईटीआई और कई कम्प्यूटर कॉलेज व कोंचिंग सेन्टरों का संचालन होता है।
व्यापारी वर्ग : छोटे व्यापारियों का चौपट हो रहा व्यापार
बताया गया है कि संभागीय मुख्यालय एवं आसपास के ग्रामीण इलाकों और कोयलांचल के आसपास के शहरी व ग्रामीण अंचलों के कई छोटे व्यापारियों का व्यापार चौपट हो गया है, क्योंकि क्षेत्र के करीब सात-आठ सौ छोटे फुटकर व्यापारियों की अधिकांश सामग्रियां लोकल टे्रनों के माध्यम से ही आती है। विशेष तौर पर खाद्य सामग्रियां तो प्रतिदिन ही आती है, मगर सप्ताह में चार दिनोंं तक लोकल ट्रेनों के रद्द रहने से उनका व्यापार प्रभावित हो रहा है और उनके समक्ष रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो गई है।
सरकारी कर्मचारी : ड्यूूटी पर ही नहीं पहुंच पाते कर्मचारी
बताया गया है कि ट्रेनों के रद्द रहने का सर्वाधिक खामियाजा शासकीय व अशासकीय कार्यालयों में काम करने वाले करीब पांच सौ कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि वह ट्रेनों के भरोसे अपनी ड्यूटी को अंजाम देते है। लोकल ट्रेेनें कर्मचारियों के लिए वरदान साबित हो रही थी, मगर पिछले 11 महीने से वहीं लोकल ट्रेनें अब कर्मचारियों के लिए अभिशाप बन रही है। जिस दिन ट्रेनें रद्द रहती है, उस दिन कर्मचारियों के समक्ष ड्यूटी पर पहुंचने सबसे बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाती है।
अधूरी सडक़ ने बढ़ाई दिक्कतें, 3 घण्टे में 60 किमी का सफर
शहडोल से कटनी तक सडक़ मार्ग से यात्रा करना काफी कठिन है। कटनी तक के लिए रेल से महज दो या तीन घंटे ही लगते हैं, जबकि सडक़ मार्ग पर चार से पांच घंटे लग जाते है। यात्री टे्रनों की वजह से ही इस मार्ग पर बसों का संचालन भी बहुत कम होता है और गिनती की बसें ही कटनी तक जाती है। जो निर्माणाधीन सडक़ पर हिचकोले खाती हुई जाती है। उमरिया तक पहुंचने के लिए 3 घण्टे में 60 किमी का सफर पूरा होता है।

मैंने रेल मंत्री को लिखा है पत्र
यात्री ट्रेनों को पिछले कई महीनों से रद्द किए जाने से नि:संदेह आदिवासी अंचल के यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है। इसके लिए रेल मंत्री को पत्र लिखकर रद्द यात्री ट्रेनों को चलाए जाने की मांग की गई है। इसके अलावा एक-दो दिन के भीतर ही दिल्ली में जाकर मैं स्वयं रेलमंत्री से मुलाकात कर रद्द टे्रनोंं को बहाल किए जाने की मांग करूंगी।
हिमाद्री सिंह, सांसद, शहडोल

बिलासपुर-कटनी रेलमार्ग पर जो ट्रेनें रद्द की जा रही है, उससे आदिवासी अंचलवासियों को शीघ्र राहत मिलने वाली है। संभवत: आगामी माह सितम्बर से ट्रेनों के रद्द होने का सिलसिला बंद हो जाएगा।
अंबिकेश साहू, जनसंपर्क अधिकारी, दपूमरे, बिलासपुर

रद्द ट्रेनों को पुन: चालू किए जाने की मांग को लेकर रेल यात्री संघ ने एक ज्ञापन दिया है, जिसे मैने डीआरएम बिलासपुर को भेज दिया है। जल्द ही इस पर लोगों को राहत मिल सकती है।
मनीष अग्रवाल, एआरएम, शहडोल