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खो गए शहर के 325 तालाब, प्रशासन कर रहा तलाश

Ramashankar mishra

Publish: Jan 21, 2020 11:55 AM | Updated: Jan 21, 2020 11:55 AM

Shahdol

दर्जनों बैठक, कई निर्देश लेकिन नहीं हटा अतिक्रमण, सिकुड़ते जा रहे शहर के तालाब
तालाबों को निगल रहे अतिक्रमणकारी, चिट्ठी पत्री से काम चला रहे अफसर

शहडोल. नगर के तालाबों को अतिक्रमणकारी दीमक की तरह चट करते जा रहे हैं। संरक्षण के लिए प्रशासन और नगर पालिका के अधिकारी कार्ययोजना बनाने की बातें ही कर रहे हैं लेकिन यह कार्ययोजना अभी तक नहीं बन सकी है। शहर के अमूमन सभी तालाबों में अतिक्रमण है। भू माफियाओं ने कई तालाबों की जमीन पर बड़ी कॉलोनियां तक तैयार कर ली हैं। दर्जनों शिकायतें हुईं लेकिन सभी में जांच अटकी है। सरकार के माफिया दमन अभियान के बाद लोगों की उम्मीद जागी थी लेकिन अफसर कागजों में प्लानिंग तैयार कर खानापूर्ति कर ली। जब तक कार्य योजना बनेगी तब तक जो बचे हुए तालाब हैं वहां बड़ी-बड़ी इमारते तन जाएंगी। तालाब अतिक्रमण की चपेट में आते जा रहे हैं और सिकुड़ते जा रहे हैं।
365 तालाबों का इतिहास, नगरपालिका में सिर्फ 44 तालाब
तालाबों की वजह से जाना जाने वाले शहडोल नगर में अब गिनती के तालाब बचे हैं। शहडोल नगर का 365 तालाबों का इतिहास है। अब नगर पालिका के रिकार्ड में 44 शासकीय तालाब ही दर्ज हैं। जबकि 10 निजी तालाब है। इसके अलावा सोहागपुर तहसील में तालाब 561 दर्ज हैं। इसमें शासकीय अशासकीय सभी शामिल हैं। कई तालाबों में बड़े कॉलोनाइजरों ने गरीबों को आगे करके भूमि पर कब्जा कर लिया है।
खत्म कर दिया तालाबों का कैचमेंट एरिया
नगर के जिन तालाबों का नगर पालिका द्वारा जीर्णाेद्धार कराया गया है उनकी स्थिति और बद से बद्तर हो गई है। कंक्रीट कार्य और कैचमेन्ट एरिया समाप्त होने की वजह से इनमें जल भराव ही नहीं हो पा रहा है। जिसके चलते अन्य माध्यमों से तालाबों को भरने की कवायद की जा रही है। घरौला तालाब और मोहन राम तालाब की यही स्थिति है। शहर के अधिकांश तालाबों की मेढ़ में कुछ मकान पूर्व से ही बने हुए हैं तो कुछ नए निर्माण कार्य भी चल रहे हैं। निर्माण कार्य की आड़ में तालाब को भांटने का काम भी किया जा रहा है। जिसके चलते दिन प्रतिदिन यह तालाब सिकुड़ता जा रहा है।
अफसर निर्देश देते रहे, नहीं सुने अधिकारी, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट
नगर के तालाबों को संरक्षित करने के लिए बैठकें तो कई बार हुई लेकिन बैठकों में बनी कार्य योजना व अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों का क्रियान्वयन होते नजर नहीं आ रहा है। कलेक्टर द्वारा बैठक में तालाबों की साफ-सफाई के साथ ही उनके संरक्षण की बात कही गई थी। इसके बाद स्थितियां जस की तस बनी हुई है। अफसर मैदानी अधिकारियों को निर्देश देते रहे लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। सोमवार को कलेक्टर ललित दाहिमा ने तालाबों के अतिक्रमण मामले में बैठक लेकर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है। पूर्व में भी कलेक्टर ने बैठक लेकर अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी थी लेकिन मैदानी अमला फेल रहा।

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