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विश्व के चौथे सबसे ऊंचे शिखर पर फहराया तिरंगा, सिवनी की आहना ने सुनाए यात्रा के अनुभव

Sunil Vandewar

Publish: Sep 21, 2019 20:30 PM | Updated: Sep 21, 2019 20:30 PM

Seoni

सिवनी की आहना ने दल के साथ साउथ अफ्रीका के किली मंजारो पर की चढ़ाई

सिवनी. सिवनी की बिटिया सिंधिया कन्या विद्यालय ग्वालियर में अध्ययनरत छात्रा आहना त्रिवेदी ने अपने 17 सदस्यीय गु्रप के साथ साऊथ अफ्रीका के किली मंजारों शिखर पर पहुंचकर तिरंगा फहराया है। आहना सिवनी के ख्याति प्राप्त चिकित्सक सलिल-सोनल त्रिवेदी की ज्येष्ठ पुत्री है।
विश्व के चौथे सबसे ऊंचे पर्वत पर चढऩे में आहना सहित कक्षा 9 से 12 तक अध्ययन करने वाले 17 विद्यार्थियों के दल को किली मंजारो पर्वत के शिखर पर पहुंचने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा है लेकिन उन्होंने अपने हौसले के बदौलत यह सफलता अर्जित किया है। आहना इस चोटी पर तिरंगा फहराकर हाल ही में सिवनी आई हैं। शिखर पर पहुंचने के अपने अनुभव को साझा करते हुए आहना ने बताया कि वह चोटी समुद्र तल से 5895 मीटर ऊपर है। उन्हें अपने मिशन पर सफलता सात दिनों में मिली है। बताया कि वहां पहुंचते-पहुंचते तापमान माईनस 20 डिग्री सेल्सियस हो गया था इतना ही नहीं हाई ऐलिट्यूड पर आक्सीजन भी कम हो गई थी। वे जैसे-जैसे ऊपर चढ़ रही थीं उन्हें वैसे-वैसे सर्द हवाएं अपनी गिरफ्त में ले रही थीं।
उन्होंने रात में सोने के बजाय चलना पंसद किया। यह गु्रप प्रतिदिन 6 से 8 किलोमीटर चलता था। शिखर के पास पहँुचने पर गु्रप ने अंतिम दिन बिना रूके 18 से 19 घंटे का सफर तय किया। खास बात यह है कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों की इन छात्राओं का अपने अभिभावकों से संपर्क भी नहीं हो पाया। एक दिन टीम की कुछ साथी थक गर्इं और उन्होंने लौटने की बात भी कही परन्तु गु्रप के अन्य सदस्यों ने उनका साहस बढ़ाया, जिससे उनका यह मिशन सफल हो सका।
छात्राओं के इस दल ने साऊथ अफ्रीका के शिखर पर तिरंगा फहराने के लिये लगातार तीन महीने प्रयास किया था। उन्होंने बाधाओं को पार करना स्कूल कैंपस में ही सीखा था। उनका स्पेशल डाइड चार्ट तैयार किया गया। इतना ही नहीं उन्होंने एक्सरसाइज से अपना वजन भी घटाया। इस पर्वत पर जाने के लिये स्कूल प्रबंधन द्वारा एक वर्ष पहले तैयारी कर ली थी। उन्होंने अपने स्तर पर किली मंजारों रिसर्च पर यह जाना कि इस पर्वत पर अभी तक कितने लोग पहुंच चुके हैं और उन्हें किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा था। प्रबंधन ने उनसे संपर्क कर उनके अनुभवों को जाना और उसी आधार पर छात्राओं को टे्रनिंग दी गई। जिन 17 छात्राओं को इस मिशन के लिए चयनित किया गया उनके अभिभावकों से संपर्क किया गया, उनसे पूछा गया कि उनकी बेटियों का व्यवहार और खान-पान घर लौटने पर कैसा रहता है। उसी हिसाब से एक्सपर्ट की मदद से उन्हें तैयार किया गया था।
गु्रप के द्वारा पांच तरह के क्लाईमेट का किया सामना -
आहना ने बताया कि चढ़ाई के दौरान इन छात्राओं ने पांच तरह के क्लाईमेट को पार किया। सबसे पहले सिविलाईजेशन जोन को पार किया, जिसका तापमान 33 डिग्री था। इस चढ़ाई के बाद यह ग्रुप रेन फारेस्ट जोन में पहुंचा, जहाँ का तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस था। गु्रप यहाँ से आगे बढ़ा तो उन्हें मूर लैंड जोन का सामना करना पड़ा, जिसका तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस था। जब यह गु्रप एलपाइन डेजर्ट जोन पर पहँुचा तो उन्हें माइनस 10 डिग्री टेमप्रेचर का सामना करना पड़ा। इसे पार करने के बाद ही वे पर्वत के ऊपरी शिखर पर पहुंची। आहना त्रिवेदी की इस सफलता पर नागरिकों द्वारा हर्ष व्यक्त करते उज्जवल भविष्य की कामना की जा रही है।
यह भी उपलब्धियां रही आहना की -
अमेरिका के म्यूमि शहर में आयोजित एक सम्मेलन में होनहार बालिका आहना त्रिवेदी वर्ष 2015 में शामिल हुई थी जहा पर इन्होंने अफगानिस्तान की महिलाओं के अधिकार के संबध में अपनी बात बेबाकी से कहकर सबकी प्रशंसा पाई थी। इसके अलावा वर्ष 2018 में स्पेन में आयोजित होने वाले यूरोपियन म्यूजिक में शामिल हुई थी और सोलो गिटार बजाया था। 26 प्रतिभागियों में आहना एकमात्र भारतीय थी जिन्होंने इसमें हिस्सा लिया था। वर्ष 2017 में राउंड स्क्वेयर कान्फेंस बैंकाक में हुई थी जिसमें शाला की तरफ से इन्होंने ध्वज लेकर नेतृत्व किया था।