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पीओपी है खतरनाक...

Sunil Vandewar

Publish: Aug 22, 2019 11:43 AM | Updated: Aug 22, 2019 11:43 AM

Seoni

पीओपी से बनी प्रतिमाओं पर प्रतिबंध लगाने वैनगंगा सेवा अभियान संगठन ने कलेक्टर से की मांग

सिवनी. मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं ग्रीन ट्रायब्यूनल द्वारा पेयजल स्त्रोतों में बढ़ते प्रदूषण को गंभीर मानते हुए समस्त प्रकार की पीओपी से बनी प्रतिमाओं के निर्माण एवं विक्रय पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ज्ञात रहे कि पीओपी एक ऐसा पदार्थ है जो पानी में जाने के बाद वर्षों तक अघुलनशील बना रहता है और इसके परिणामस्वरूप पेयजल प्रदूषित होता ही है साथ ही तालाबोंए नदियों एवं बांधों में संग्रहित पानी में रहने वाले जलीय जीव-जंतु भी इसके सेवन से मृत हो जाते है।
हर वर्ष लगाया जाता है प्रतिबंध -
प्रतिवर्ष इन्हीं निर्देशों का पालन करते हुए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी सिवनी द्वारा पीओपी से बनी प्रतिमाओं और उसमें लगाए जाने वाले अघुलनशील रंगों पर प्रतिबंध लगाया जाता है। प्रेस को जारी विज्ञप्ति में विगत कई वर्षों से वैनगंगा नदी के संरक्षण के लिए प्रयासरत संस्था माँ वैनगंगा सेवा अभियान द्वारा विज्ञप्ति जारी कर कलेक्टर से आग्रह किया गया है कि वे तत्काल प्रभाव से जिले में पीओपी से बन रही गणेश प्रतिमाओं एवं उसमें उपयोग होने वाले घातक रंगों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाएं ताकि मूर्तिकार इसका निर्माण ही ना कर सकें।
जिले में बिकती हैं पीओपी की मूर्ति -
सेवा अभियान के आशीष बघेल ने आगे बताया कि मुख्यालय सिवनी के अधिकतर मूर्तिकार मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का निर्माण एवं विक्रय करते है, लेकिन गणेश चतुर्थी के एक-दो दिन पूर्व छिंदवाड़ा एवं जबलपुर में बनी पीओपी की मूर्तियां बड़ी संख्या में विक्रय के लिए मुख्यालय सिवनी सहित अन्य विकासखंडों में उपलब्ध हो जाती है। उक्त मूर्तियां पीओपी से बनी होने के कारण सुंदर एवं मिट्टी से बनी प्रतिमाओं की तुलना में कम कीमत वाली होती है, ऐसे में जागरूकता के अभाव में अधिकांश श्रद्धालु इन्हीं मूर्ति का क्रय करते है और फिर उनका विसर्जन जिले के विभिन्न घाटों में स्थित वैनगंगा नदी सहित पेयजल के स्त्रोत तालाबों में विसर्जित कर देते हैं, जिससे जल प्रदूषण होने के संभावना प्रतिवर्ष बढ़ रही है।
जांच दल बनाए जाने की मांग -
सेवा अभियान ने कलेक्टर से कहा है कि वे अभी से ही जांच दल बनाकर मुख्यालय सिवनी सहित अन्य विकासखंड मुख्यालयों में बन रही मूर्तियों का निरीक्षण करवाने के साथ ही सभी अनुविभागीय अधिकारियों को निर्देश जारी करें कि वे अपने क्षेत्रों से परिवहन कर सिवनी मुख्यालय में एवं अन्य विकासखंडों तक पहुंचने वाली पीओपी से बनी मूर्तियों के विक्रयकर्ताओं के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही करें ताकि जिले की जीवनदायिनी माँ वैनगंगा नदी में प्रदूषण ना हो सके।
नागरिकों से किया आग्रह -
सेवा अभियान लखनवाड़ा द्वारा सभी श्रद्धालुओं से भी आग्रह किया गया है कि वे अस्था के इस गणेश उत्सव पर्व के अवसर पर स्थानीय कलाकारों द्वारा अपना परिवार पालन करने के लिये महिनों तक मेहनत कर बनाई गई मिट्टी से बनी प्रतिमाओं को ही गणेश पंडालों और घरों में स्थापित करें ताकि आस्था के साथ ही जल प्रदूषित ना हो सके। संभव हो तो छोटी मूर्तियों का विसर्जन घर में ही किया जाए ताकि जल प्रदूषण की संभावना कम हो सके।