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फसल बीमा राशि नहीं मिलने से किसान नाराज

Santosh Dubey

Publish: Jul 19, 2019 11:53 AM | Updated: Jul 19, 2019 11:53 AM

Seoni

पूर्व अल्टीमेटम के बाद आज से बैठे धरने पर, 22 जुलाई तक चलेगा धरना आंदोलन, 77 गांव के किसानों की हुई थी फसल नष्ट

 

कान्हीवाड़ा (सिवनी). फसल बीमा की राशि नहीं मिलने से परेशान किसानों ने गुरुवार को ग्राम छुई में धरना प्रदर्शन पर बैठे।
किसानों ने बताया कि विगत वर्ष 13 फरवरी 2018 को सिवनी जिल में लगभग 283 गांवों में भीषण ओलावृष्टि हुई थी, जिससे किसानों की फसल को भारी नुकसान पहुंचा था। इस नुकसानी का जायजा तत्कालीन कलेक्टर गोपालचंद डाड एवं राजस्व अमले के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा भी किया गया था। सहायता के रूप में प्रभावित किसानों को आरबीसी के तहत सहायता भी दी गयी थी।
किसानों ने बताया कि सिवनी तहसील के राजस्व निरीक्षक मंडल भोमा के अंतर्गत लगभग 111 गांव आते हैं जिसमें लगभग 77 गांव के किसानों की फसल नष्ट हुई थी। जिसमे सें 55 गांव गौण्डी हिनोतिया, खुर्सीपार, चंदनवाडाकला, चंदनवाडा खुर्द, पुंगार, थांवरी, भाटा, रडहाई, टेकारांजी, किरकीरांजी, नरवाखेडा, हिनोतिया, आमाकोला, जामुनटोला, मुहबेली, ढेका पांजरा, छुई, मोहगांव, कतरवाडा, सिंगौडी, उमरिया, बाम्हनवाडा, भोमाटोला, पिंडरई, कन्हानपिपरिया एवं पद्दीकोना आदि ग्राम के हजारों प्रभावित कृषकों को अभी तक नष्ट हुई फसल की बीमा राशि अप्राप्त है।
किसानों ने बताया कि इस संबंध में अनेक बार जनप्रतिनिधियों एवं कलेक्टर को अवगत करवाया गया परंतु संतुष्टिपूर्ण जवाब ना मिल पाने से प्रभावित कृषकगणों में आक्रोश व्याप्त है जिसे लेकर प्रभावित किसानों ने कान्हीवाड़ा उपतहसील मुख्यालय में एक मीटिंग रखी थी तथा रैली निकालकर नारे लगाते हुए पुलिस थाना कान्हीवाड़ा पहुंचकर कलेक्टर के नाम थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में बीमा राशि के तत्काल भुगतान करवाने की मांग की गई।
किसानों ने दिया था अल्टीमेटम
किसानों ने अल्टीमेटम दिया था कि आगामी पांच दिवस के अंदर यदि उन्हें संतुष्ट नहीं किया गया तो 18 जुलाई को उग्र आंदोलन धरना प्रदर्शन करने मजबूर होंगे। इस क्रम में गुरुवार को किसानों ने ग्राम छुई में एकत्रित होकर आंदोलन किया। जिसमें शासन से फसल बीमा की राशि की मांग की गई। किसानों द्वारा बताया गया कि यह धरना आंदोलन 22 जुलाई तक चलेगा यदि इसके बाद भी किसानो की समस्या का निदान नही होता तो उग्र आंदोलन किया जावेगा।