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मानव स्वास्थ्य, पशुओं के लिए हानिकारक है गाजरघास

Santosh Dubey

Publish: Aug 22, 2019 11:43 AM | Updated: Aug 22, 2019 11:43 AM

Seoni

कॉलेज में मनाया जागरुकता सप्ताह

केवलारी. शासकीय महाविद्यालय केवलारी में गाजरघास जागरुकता सप्ताह मनयाा गया। इस मौके किसानों एवं आम जनता को गाजरघास के दुष्प्रभाव के बारे में जागरूक करने के लिए मानाया जा रहा है।
गाजरघास जहां एक ओर मानव स्वास्थ्य एवं पशुओं में विभिन्न समस्याएं पैदा करता है, वहीं पर्यावरण को दूषित करता है एवं उत्पादकता को कम करते हुए जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंचाता है, ये आयोजन 16 से 22 अगस्त तक किया जाएगा।
धर्मेन्द्र परते ने कहा कि गाजर घास फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे उत्पादन घट रहा है और जमीन को भी प्रभावित कर रहे हैं। इस घास के रस के जमीन पर रासायनिक असर भी पड़ रहा है। इस कुप्रभाव से किसानों को बचाने और उपज का लाभ दिलाने के उद्देश्य से गाजर घास उन्मूलन का आयोजन किया गया है।
उन्होंने बताया कि जिस खेत में यह घास उगता है उसमें लगी फसल को दबा देता है। बाली और फल लगने नहीं देता है। परीक्षण एवं शोध के आधार पर यह पाया गया है कि गाजर घास की लंबाई एक से डेढ़ मीटर होती है। जिससे प्रत्येक वर्ष एक हजार से पांच हजार अत्यंत सूक्ष्म बीज पैदा होता है जो कि जमीन पर गिरकर स्वत: जन्म जाता है। इस घास के कारण उत्पादन में भारी गिरावट आ रही है। क्योंकि इसके सेस्क्यूटरपिन लैक्टोन नामक विषाक्त पदार्थ बनते हैं जो जमीन को नुकसान पहुंचाते हैं। सभी गाजरघास को उखाड़ा।
इस अवसर में महाविद्यालय के डॉ. एसएन डेहरिया, डॉ. डीएल मानेश्वर, धर्मेन्द्र परते, ज्योति इरपाचे, रश्मि बघेल, दीपिका दुबे, धनेश्वरी पटले तथा कॉलेज विद्यार्थियों में आयुष कुमार दुबे, दीपक राय, शुभम बघेल, वासु मिश्रा, पूनम बघेल, शिवानी तिवारी, स्मृति डेहरिया, नरेन्द्र भलावी, सतेन्द्र, विश्वकर्मा, महेन्द्र जंघेला आदि मौजूद थे।