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नर्मदा का पानी सेंधवा में लाने अब 1300 करोड़ होंगे खर्च

Vishal Yadav

Publish: Sep 11, 2019 10:44 AM | Updated: Sep 11, 2019 10:44 AM

Sendhwa

लिफ्ट इरिगेशन योजना को लेकर तैयारी शुरू, जल्द स्वीकृति मिलने की उम्मीद

बड़वानी/सेंधवा. सेंधवा विकासखंड में जल्द ही नर्मदा का पानी किसानों के खेतों में पहुंचेगा। इससे क्षेत्र के किसानों को सालभर खेती के लिए पानी मिल सकेगा और पलायन रुकेगा। जल्द ही प्रदेश सरकार से योजना की स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। हालांकि योजना की लागत में बढ़ोतरी हुई है।
सेंधवा विधानसभा के 80 से अधिक गांवों में हजारों किसानों को सिंचाई की सुविधा मिले, इसके लिए 1100 करोड़ रुपए की सेंधवा माइक्रो इरिगेशन योजना का प्रस्ताव बनाकर प्रदेश सरकार को भेजा था। इसकी लागत अब 200 करोड़ रुपए बढ़ चुकी है। पूरी योजना 1300 करोड़ में बन सकती है। पिछले दिनों इंदिरा सागर परियोजना से जुड़े कई अधिकारी विधायक ग्यारसीलाल रावत से मिले थे। उन्होंने विधानसभा के किसानों की जरुरत को देखते हुए लिफ्ट इरिगेशन परियोजना को प्राथमिकता देने की बात की।
नर्मदा का पानी पहुंचाने का किया था वादा
अधिकारियों ने बताया कि अन्य जिलों में परियोजना का सफलता से हर क्षेत्र में इसकी मांग बढ़ती जा रही है। पूर्व में भाजपा सरकार द्वारा नर्मदा का पानी पहुंचाने का वादा किया था। हालांकि घोषणा के डेढ़ वर्ष बाद अभी तक कोई उल्लेेखनीय प्रगति नहीं हुई, लेकिन शासन द्वारा नगर के कई क्षेत्रों में लिफ्ट इरिगेशन के फायदें बताने वाले होर्डिंग लगा दिए थे। अब जबकि अधिकारियों द्वारा विधायक से मुलाकात की गई है, तो किसानों सहित अन्य लोगों को नर्मदा जल मिलने चर्चा फिर से शुरू हो गई है।
किसान के खेत के बाहर तक डलेगी पाइप लाइन
सेंधवा में लिफ्ट इरिगेशन की योजना बनाकर किसान के खेत में पानी पहुंचाने और ऊंची-नीची जमीन पर खेती करने वालों किसान के खेत में नहर से पानी पहुंचाने के लिए लिफ्ट इरिगेशन तकनीक के तहत पानी खिंचकर बड़ी पाइप व छोटी पाइप लाइन का जाल बिछाने की योजना के सपने दिखाए गए थे। अधिकारियों ने बताया था कि किसान के खेत के बाहर तक पाइप लाइन डलेगी। इससे किसान अपने खेत में पानी ले जाएगा। सेंधवा क्षेत्र में भी लिफ्ट इरिगेशन से नर्मदा का पानी पहुंचेगा। खेतों में पानी होगा, तो किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी।
सेंधवा में क्यों जरुरी है लिफ्ट इरिगेशन तकनीक
लिफ्ट इरिगेशन तकनीक के माध्यम से माइक्रो सिंचाई यूनिट का निर्माण होता है। इससे हर 2 हेक्टेयर चक्र में पाइप लाइन द्वारा 20 मीटर दावयुक्त जल प्रदाय व फव्वारा सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है। इससे किसानों को उन क्षेत्रों में भी पानी मिलता है, जो नहरों के करीब नहीं है। पठारी क्षेत्रों सहित सुदूर अंचलों में भी लिफ्ट इरिगेशन तकनीक के माध्यम से पानी पहुंचाया जा सकता है। किसानों को आसानी से पानी मिल सकता है।
80 गांवों में 40 हजार हेक्टेयर में होगी सिंचाई
इंदिरा सागर योजना के अधिकारियों ने बताया कि योजना के तहत 80 ग्रामीण क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है। जहां पानी की कमी हो रही है। ऐसे में लिफ्ट एरिगेशन योजना लागू होने से नर्मदा का पानी सीधे किसानों के खेतों तक पाने पहुंच जाएगा। हर मौसम में खेती का दावा किया गया। अन्य जिलों का उदहारण देते हुए अधिकारियों ने बताया कि पानी को लिफ्ट करने के लिए कई बड़ी पानी की टंकियां और पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इससे सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि किसानों का रेलावती डेम सहित अन्य जलाशयों पर निर्भरता कम होगी।
कई क्षेत्रों में नहीं हुई पर्याप्त बारिश
सेंधवा सहित वरला तहसील के कई क्षेत्र ऐसे है। जहां कई बार बारिश पर्याप्त नहीं होती है। इससे किसानों को फसलों की चिंता रहती है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने बताया कि बलवाड़ी क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को अभी से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो गर्मी में क्या होगा। हालांकि इस वर्ष बारिश ने पिछले कई वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ा है। फिर भी क्षेत्र में माइक्रो इरिगेशन प्लांट की जरुरत महसूस की जा रही है। धनोरा के समीप रेलावती डेम में पानी तो भरा है, लेकिन नहरों के लगातार चालू रहने से गर्मियों में पानी की कमी हो सकती है। कामोदवाड़ा, मेरखेड़ी स्थित डेम में जलस्तर पर्याप्त है। नगर से मात्र एक किमी दूर स्थित छोटे घट्या पट्टिया पर बना बैराज इस वर्ष लबालब भर चुका है। किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के लिए लिफ्ट इरिगेशन योजना लागू होना बेहद कारगर साबित हो सकता है।