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पुलिया पर पानी, चक्कर खाकर निर्धारित मुकान पहुंच रहे 12 गांव के ग्रामीण

Anil Kumar

Publish: Nov 07, 2019 14:17 PM | Updated: Nov 07, 2019 14:17 PM

Sehore

स्टाप डेम की शटर लगने से दो सप्ताह से भरा हुआ है पुलिया पर पानी

आष्टा.
पार्वती नदी स्टाप डेम के गेट लगते ही आष्टा-दुपाडिय़ा रोड स्थित दुपाडिय़ा के नजदीक नाले में बनी पुलिया जलमग्न हो गई है। पुलिया पर पानी आने से करीब 12 गांव का सड़क संपर्क टूट गया है। ग्रामीणों को मजबूरी में चक्कर खाकर निर्धारित मुकाम तक पहुंचना पड़ रहा है। जबकि कई लोग जान जोखिम में डाल निकल रहे हैंं, जिससे उनके साथ बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीण पुलिया की जगह बड़ा पुल बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार लापरवाही दिखा रहे हैं।

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दुपाडिय़ा के नाले पर कई साल पहले पुलिया बनाई थी। इसकी जमीन से महज तीन फीट ऊंचाई है, जिससे बारिश के मौसम में थोड़ा बहुत पानी गिरा की पुलिया डूब जाती है। इस साल बारिशभर ऐसा ही हुआ। बारिश समाप्त होने के बाद जरूर लोगों ने राहत महसूस की थी, लेकिन अब सिंचाई विभाग द्वारा पार्वती नदी में बने स्टाप डेम के गेट लगाने से समस्या खड़ी हो गई है। स्टाप डेम के गेट लगते ही पानी निकासी रूकने से इस पुलिया पर करीब चार फीट पानी आ गया है। जिससे लोग आष्टा और अन्य जगह आना जाना नहीं कर पा रहे हैं। उनको कई किमी का चक्कर खाते हुए निर्धारित मुकाम पहुंचना पड़ रहा है।

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बैरीकेड्स सड़क किनारे पड़े
सुरक्षा की दृष्टि से पुलिया के नजदीक बैरीकेड्स रखने के साथ ही दोनों तरफ कोटवारों की ड्यूटी लगाई थी। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि कोई पुलिया के ऊपर से नहीं निकले। बैरीकेड्स जहां सड़क से हटकर किनारे पहुंच गए तो कोटवार के पते नहीं है। ऐसी स्थिति में कई जान जोखिम में डाल पुलिया पार कर रहे हैं। जिससे उनके साथ बड़ी घटना होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। पत्रिका ने मौके पर पहुंचकर वास्तविक हालात देखे तो कुछ इसी प्रकार का सामने आया। उल्लेखनीय है कि पुलिया से निपानिया, लसूडिय़ा, चाचाखेड़ी, टांडा, दुपाडिय़ा, केवखेड़ी, छापरी, मालीखेड़ी सहित एक दर्जन गांव के लोग आना जाना करते हैं।

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बड़ा पुल बनाने की कर रहे हैं मांग
ग्रामीण नाले पर बड़ा पुल बनाने की मांग लगातार कर रहे हैं। इसे लेकर उनकी तरफ से अफसर, जनप्रतिनिधियों को लिखित और मौखिक अवगत कराया है। लापरवाही का आलम यह है कि उनकी सुनवाई नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधि वोट लेने आते हैं, लेकिन चुनाव होते ही गायब होते है कि पांच साल तक दर्शन नहीं होते हैं। इस वजह से कई साल से समस्या का दंश झेलते आ रहे हैं। ग्रामीणों ने शासन से नाले पर बड़ा पुल बनाने की मांग की है।

इन गांवों में भी है समस्या
बोरखेड़ा पार्वती नदी, मालीखेड़ी नाला, मुगली पपनास नदी, कुरावर दूधी नदी, सिद्दीकगंज पार्वती नदी आदि जगह यही हाल है, जहां पुल की जगह पुलिया बना दी है। कुरावर की दूधी नदी में तो पुलिया तक नहीं बनी है। जिससे बारिश के चार महीने ग्रामीणों के दिक्कत भरे निकलते हैं। हालांकि यहां पर दो साल पहले करीब दो करोड़ की लागत से पुल स्वीकृत हुआ था। जिसका निर्माण एजेंसी ने काम चालू तो किया, लेकिन गड्ढे खोदने तक सीमित रह गया। सिद्दीकगंज में जरूर बड़ा पुल बनने का काम चल रहा है।

कौन क्या बोला
पुलिया छोटी होने से बारिश के पूरे मौसम में परेशानी उठाई थी। अब भी स्टाप डेम का गेट लगने से पानी है, जिससे निकासी नहीं हो रही है। इससे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
महेश विश्वकर्मा, दुपाडिय़ा
अभी की स्थिति में पुलिया पर पानी होने से मजबूरी में कई किमी का चक्कर खाते हुए दूसरी जगह जाना पड़ता है। इससे दिक्कत होने के साथ ही समय बर्बाद करना पड़ रहा है।
पप्पू मेवाड़ा, लसूडिय़ा
अफसर, जनप्रतिनिध समस्या दूर करने की बात तो कहते हैं, लेकिन उनकी यह बात झूठी साबित हो रही है। बात सही होती तो जिस समस्या का वह सामना कर रहे हैं उसे दूर कर देते।
लीलाधर मेवाड़ा, दुपाडिय़ा
अवगत कराया है
पार्वती नदी में स्टाप डेम की शटर लगने से पुलिया पर पानी है। इसे देखते हुए दूसरी जगह से आवाजाही करने वैकिल्पक व्यवस्था की है। वहीं नाले पर पुल बनाने उच्च स्तर पर भी अवगत कराया गया है।
अभिषेक शर्मा, तहसीलदार आष्टा