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vastu shastra tips: यह छोटा सा उपाय बना देता है, घर का बड़े से बड़ा बिगड़ा काम!

Deepesh Tiwari

Publish: Aug 16, 2019 16:37 PM | Updated: Aug 16, 2019 16:45 PM

Sehore

वास्तु शास्त्र vastu shastra के पंच तत्व...

सीहोर। घरों में छोटी से लेकर बड़ी बड़ी समस्याएं लगातार बने रहना आज के जीवन का हिस्सा बन गईं हैं। ऐसे में लोग लगातार इन परेशानियों से जुझते हुए जीवन बिताने को मजबूर बने हुए हैं। इस संबंध में वास्तु vastu tips के जानकारों का मानना है कि दरअसल ये समस्याएं कहीं न कहीं हमारे द्वारा ही उत्पन्न की हुई हैं।

ऐसे में जानकारी के अभाव के चलते हम कई ऐसी गलतियां कर जाते हैं, जो हमें परेशानियों में घेर लेती हैं। लेकिन इसका कारण पता नहीं होने से हम लगातार ऐसी समस्याओं से जुझते तो रहते हैं, लेकिन इनका उपाय नहीं कर पाते।

इस संबंध में वास्तु vastu की जानकार रचना मिश्रा के मुताबिक आमतौर पर सूर्य को ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है और जब घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है तो घर सुख समृद्धि से भर जाता है। सूर्य को पंचतत्वों में से एक माना जाता है और इसका वास्तुशास्त्र vastu tips में भी बहुत अधिक महत्व है।

उनका कहना है कि वास्तु शास्त्र भी पंच-तत्वों से बना है? ये पंच तत्व हैं - अग्नि, वायु, जल, पृथ्वी और आकाश। ये सभी जानते हैं कि ये सभी तत्व मनुष्य किए जीवन में खास महत्व रखते हैं, लेकिन जानकारी का अभाव हमें इनसे मिलने वाले लाभ और नुकसान को सामने नहीं ला पाता। जैसे इनमें से एक की भी कमी होने से जीवन संकट में पड़ सकता है। वैसे ही वास्तु में भी इनकी एक कमी हमें परेशानियों में डाल देती है।

मिश्रा के मुताबिक कलयुग में सूर्य ही एकमात्र दृश्य देवता हैं। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति प्रतिदिन सुबह स्नान करके सूर्य देवता की पूजा करता है तो माना जाता है कि उसको हर काम में सफलता मिलती है। साथ ही अगर किसी के घर में सुबह-सुबह सूर्य की रोशनी आती है तो उसके घर के कई बिगड़े काम भी बन जाते हैं।

वहीं वास्तु शास्त्र के अनुसार रात्रि से लेकर सुबह 3 बजे तक का समय गोपनीय होता है। क्योंकि यह वह समय है जब सूर्य अस्त है एवं अभी तक उदय नहीं हुआ है। इसलिए सूर्य की सकारात्म्क दृष्टि हमारे ऊपर नहीं रहती है।

वास्तु से समझें सूर्य की रोशनी का प्रभाव : effects of sun ...
वास्तु शास्त्र के अनुसार बताया गया है कि जिस कमरे में सूर्य की रोशनी नहीं आती है, उस कमरे में सीलन अधिक रहता है साथ ही कीड़े-मकौड़े उत्पन्न होने लगते हैं। ऐसे में उस कमरे में रहने वाले व्यक्ति का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है।

: जिस घर में सूर्य की रोशनी पड़ती है, उस घर में रहने वाले लोगों का आत्मविश्वास बढ़ता है। उन्हें काम में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। लोग ऊर्जावान महसूस करते हैं।

: इतना ही नहीं कमरे में सूर्य की रोशनी आती है तो इससे घर की नकारात्मकता खत्म होती है। घर का प्रत्येक सदस्य खुद को ऊर्जावान महसूस करता है। वहीं जिस घर में सूर्य का प्रकाश नहीं आता माना जाता है वहां रहने वाले लोगों की सेहत अधिकतर खराब रहती है। बता दें कि घर के अंदर कृत्रिम रौशनी का उपयोग कम करना चाहिए।

: अपने शयन कक्ष में भी तेज कृत्रिम रोशनी का उपयोग नहीं करना चाहिए। अगर शयन कक्ष में धीमी रौशनी रहती है तो सोने में अच्छा लगता है।

: यह भी माना जाता है कि खिड़की या द्वार के माध्यम से घर के जिन कमरों में सूरज की किरणें पहुंचती हैं, वहां ऊर्जा अधिक होती है और वहां रहने वाले लोगों का स्वास्थ्य बेहतर होता है और इच्छाशक्ति बढ़ती है।

: रसोईघर और स्नानागार में भी सूर्य कि किरणें पहुंचना आवश्यक है। इससे शरीर को पर्याप्त एनर्जी मिलती है।

वास्तुशास्त्र : दिशा का महत्व Importance of direction in vastu ...
मिश्रा के अनुसार संपूर्ण वास्तुशास्त्र दिशाओं पर आधारित है। दिशाओं के शुभ-अशुभ परिणामों को ध्यान में रखकर बनाया गया भवन उसमें निवास करने वालों को सुख, संपदा, सफलता प्रदान करता है, लेकिन भवन निर्माण में दिशाओं को महत्व न देते हुए अव्यवस्थित निर्माण किया गया है तो उस घर में रहने वाले दुखी, रोगी और सदा धन की कमी से जूझने वाले होते हैं।

वास्तुशास्त्र में दस दिशाएं वास्तुशास्त्र में दस दिशाएं मानी गई हैं। ईशान, पूर्व, आग्नेय, दक्षिण, नैऋत्य, पश्चिम, वायव्य, उत्तर, आकाश और पृथ्वी। किसी भी भवन के निर्माण में इन दसों दिशाओं का गहराई से ध्यान रखा जाता है।

पूर्व दिशा: East
वास्तुशास्त्र के अनुसार पूर्व दिशा के स्वामी ब्रह्मा और इंद्र होते हैं। इस दिशा में दोष रहने पर दुष्परिणाम और दोषरहित रहने पर शानदार परिणाम आते हैं।

मान्यता: दोषरहित Lossless result के अच्छे परिणाम...
: घर के पूर्वी हिस्से में अधिक खाली जगह हो तो धन और वंश की वृद्धि होती है।
: भूखंड पर बने भवन, कमरों, बरामदों में भी पूर्वी हिस्सा नीचा हो तो उस घर में रहने वाले लोग प्रत्येक क्षेत्र में तरक्की करते हैं और स्वस्थ रहते हैं।
: पूर्व दिशा में निर्मित मुख्य द्वार तथा अन्य द्वार भी केवल पूर्वमुखी हो तो शुभ परिणाम सामने आते हैं।
: घर की पूर्व दिशा में दीवार जितनी कम ऊंची होगी उतनी ही मकान मालिक को यश-प्रतिष्ठा, सम्मान प्राप्त होगा। ऐसे मकान में रहने वाले लोगों को आयु और आरोग्य दोनों की प्राप्ति होती है।

दोष सहित के खराब परिणाम : fault result
: अन्य दिशाओं की अपेक्षा भवन का पूर्वी भाग ऊंचा हो तो गृह स्वामी दुखी और धन की तंगी से जूझता है। ऐसे घर में संतानें रोगी और मंदबुद्धि होती हैं।
: पूर्वी दिशा में खाली जगह रखे बिना चारदीवारी से सटाकर कमरे बनाएं जाएं तो संतान संतान की कमी होती है।
: पूर्वी दिशा में नियमित मुख्य द्वार या अन्य द्वार आग्नेयमुखी हों तो दरिद्रता, अदालती मामले, चोरों का भय एवं अग्नि का भय बना रहता है।
: भूखंड के पूर्व दिशा में ऊंचे चबूतरे हो तो अकारण अशांति, आर्थिक संकट बना रहता है। गृह स्वामी कर्ज में डूबा रहता है।
: पूर्वी भाग में कचरा, पत्थरों के टीले, मिट्टी के ढेर आदि हों तो धन और संतान की हानि होती है।

घर की ये दिशा बदल सकती है आपकी दशा : direction of the house can change your condition...

माना जाता है कि जिस घर में जातक परिवार सहित निवास करता है, उस घर की नीची दिशाओं का वास्तु अनुसार जातक के जीवन में विशेष प्रभाव पड़ता है।

जानें वास्तु के अनुसार कैसी हो भवन की दिशा- effects of house direction ...

1. घर की पूर्व दिशा की भूमि नीची हो तो वह भूस्वामी को संपत्तिदायक होती है।

2. यदि घर की आग्नेय दिशा की भूमि (दिशा) धंसी हुई हो तो घर में अग्नि संबंधित दुर्घटना एवं विद्युत उपकरणों में खराबी के योग होते हैं।

3. घर की दक्षिण दिशा में भूमि नीची हो तो मकान मालिक को मृत्युतुल्य कष्ट, रोग एवं अचानक हानि का सामना करना पड़ता है।
4. नैऋत्य दिशा की भूमि नीची हो, तो वह घर के लोगों में भय के साथ धन-संपत्तिनाशक होती है।

5. पश्चिम दिशा की भूमि नीची हो तो अपमान, बदनामी व संतान हानिकारक होती है।

6. वायव्य दिशा की भूमि नीची हो तो घर में कष्ट व कलह होता है।

7. उत्तर दिशा की भूमि नीची हो तो धन-संपत्ति एवं प्रगतिकारक होती है।
8. ईशान दिशा नीची हो तो भवन स्वामी को सुख-संपत्ति सम्मान एवं ऐश्वर्य प्राप्त होता है।