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'शिष्य के शिल्पकार गुरु होते हैं, वही दिखाते हैं सही राह'

Radheshyam Rai

Publish: Dec 09, 2019 13:41 PM | Updated: Dec 09, 2019 13:41 PM

Sehore

मंगल विहार से पूर्व अपूर्वमति माताजी ने दिए आशीष वचन...

सीहोर. गुरु शिष्य का शिल्पकार होते है। हमारे जीवन में गुरु का बहुत महत्व होता हैं। गुरु अपने शिष्य को सही मार्ग दिखाते है। इसलिए गुरु वंदनीय होकर हमारे उत्थान की प्रथम सीढ़ी हैं। धर्मरूपी दाने आप लोगों को देकर जा रही हूं जिन्हें आप अच्छी फ सल अर्थात अधिक से अधिक धर्म प्रभावना कर धर्म को चहू और पहुचाएं। गुरु आज्ञा से चातुर्मास समाप्ति के पश्चात यात्रा प्रारंभ हो रही है ।आप लोगों ने धर्मरूपी दाने का कितना सदुपयोग किया यह हम समय आने पर देखेंगे।

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हमारी भावना है कि हमारा अगला चातुर्मास आचार्य श्री के चतुर्मास स्थल से 90-100 किलोमीटर की दूरी पर हो। हमारी आत्मा यहां चातुर्मास के दौरान किए गए धर्म से तृप्त हो गई।

यह बात किला मंदिर पर अपने मंगल बिहार के पूर्व आशीर्वचन के दौरान अपूर्वमति माता ने कहीं। दिगंबर जैन समाज के प्रवक्ता नरेंद्र गंगवाल ने प्रवचन की जानकारी देते हुए बताया कि अपूर्वमति माता ने आगे कहा कि कर्म कभी किसी का सगा नहीं होता। जो हम कर्म करते हैं उसी के अनुसार हमें फल मिलता है।

बूल की खेती करने पर कांटे ही उगेंगे। यदि हम बबूल की खेती कर फू लों के उगने की आश लगाएं तो ये कभी संभव नहीं है। इसलिए सभी को अच्छे कर्म करना चाहिए जिससे कि उनका फ ल भी अच्छा हो। अपूर्वमति माता ने तप, त्याग, तपस्या, सामायिक करने की प्रेरणा व संकल्प दिलाया।

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गुरु भक्ति में बड़ी ताकत होती है
अपूर्वमति माता ने कहा कि जीवन में तीन बातों का विशेष महत्व हैं। इसमें देव, गुरू व धर्म का विशेष महत्व है। गति व प्रगति में बड़ा अंतर है। गुरु भक्ति में बड़ी ताकत होती है। आपने सबरी राम, द्रोपदी कृ ष्ण जैसे कई उदाहरण दिए। चातुर्मास के दौरान आदिनाथ भगवान एवं मूल नायक पाश्र्वनाथ जी व गुरु की वर्षा खूब बरसी, आप पर भी बरसती रहे।

गुरु जब भी आए लेकिन हर साल आपको संघ का चातुर्मास मिलता रहे। गुरु व उनके शिष्य आकर धर्म आराधना कराते रहे यही भावना है। आशीष वचन के बाद अपूर्वमति माताजी ससंघ आष्टा शुजालपुर मार्ग की ओर मंगल विहार किया। इस दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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