स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

दो विकासखंड को जोडऩे वाली छह किमी सड़क दशकों बाद भी नहीं बन सकी, ग्रामीण बोले यह कैसा विकास

Radheshyam Rai

Publish: Nov 13, 2019 12:30 PM | Updated: Nov 13, 2019 12:30 PM

Sehore

ब्लाक के दर्जनों गांव आजादी के दशकों बाद भी पक्की सड़क सुविधा की बाट जोह रहे...

सीहोर. ग्रामीण क्षेत्र में पक्की सड़कों का जाल बिछाने का केन्द्र व राज्य सरकारें भले ही लाख दावे कर रही हों, लेकिन क्षेत्र में यह खोखले साबित हो रहे हैं। इसका अंदाजा ब्लाक के दर्जनों गांवों से लगाया जा सकता है जो कि आजादी के दशकों बाद भी पक्की सड़क सुविधा की बाट जोह रहे हैं। दो विकासखण्ड को जोडऩे वाला कुंडीखाल-भवंरा मार्ग अभी तक पक्का नहीं बन पाया है। इसके चलते क्षेत्र के ग्रामीणों व किसानों को आवागमन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इछावर और आष्टा विकासखण्ड को जोडऩे वाला मार्ग कुंडीखाल से भवंरा तक कच्चा व काफी जर्जर हालत में है। आजादी के दशकों बाद भी करीब छह किमी लंबाई का उक्त मार्ग पक्का नही बन पाया है, जबकि इस मार्ग से करीब आधा सैकड़ा से अधिक गांव के लोग आष्टा व इछावर क्षेत्र में आवागमन करते हैं। खासकर दौलतपुर, दुदलई, गादिया, रुघनाथपुरा, रूपादा, झरखेड़ा, दुदलई, लालियाखेड़ी सहित आसपास गांवों के किसान अपनी उपज बेचने आष्टा मंडी जाते हैं, लेकिन उक्त सड़क कच्ची व जर्जर हालत में होने के कारण उन्हें आवागमन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी बारिश के मौसम में होती है।

कई बार मार्ग में वाहन फंस जाते हैं। इससे किसानों को ओने-पोने दाम पर ही अपनी उपज गांवों में ही बेचने को मजबूर होना पड़ता है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि उक्त मार्ग को पक्का बनवाने के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों औन शासन से कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी ने भी इस ओर ध्यान नही दिया है।

[MORE_ADVERTISE1]

50 गांव के लोग उठा रहे परेशानी
इछावर से आष्टा को जोडऩे वाला करीब 50 किमी लंबाई का मार्ग जो कि दीवडिय़ा, आर्या, कुंडीखाल से होकर जाता है। उक्त मार्ग से करीब आधा सैकड़ा से अधिक गांवों के लोग आवागमन करते हैं। इससे जुडऩे वाले अधिकांश गांव आदिवासी बाहुल्य है।

ग्रामीण आए दिन हाट-बाजार, अस्पताल, मंडी आने-जाने के लिए इस मार्ग का उपयोग करते हैं। इछावर से कुंडीखाल व भवंरा से आष्टा तक तो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पक्क सड़क है, जबकि कुंडीखाल से भवंरा तक महज 6 किमी लंबाई की सड़क अभी तक पक्की नही बन पाई है।

इस संबध में हरसपुर के पूर्व सरपंच राजेश परमार ने बताया कि उक्त मार्ग से दो विकासखण्ड सीधे जुड़ते हैं। दर्जनों गांवों के लोग आए दिन इससे सफर करते हैं, लेकिन करीब 6 किमी का कच्चा मार्ग वाहन चालकों के लिए मुसीबत का सबब बन रहा है। इस मार्ग को पक्का बनाने के लिए लंबे समय से मांग की जा रही है, लेकिन शासन, प्रशासन व जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नही दे रहें हंै।

[MORE_ADVERTISE2]

संकेतकों का अभाव, हादसों का सबब बन रहे अंधे मोड़
सीहोर-इछावर, नसरुल्लागंज रोड के कई स्थानों पर सावधानी बरतते और दुर्घटना से बचें जैसे स्लोगन लिखे बोर्ड दिखाई देते हैं। वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत गांव के लिए बनी रोड पर किसी भी प्रकार के संकेत लिखे स्लोगन बोर्ड नहीं लगाए गए हैं।

इछावर से मुवाड़ा, सेमली जदीद, ब्रिजिशनगर, रामनगर, ढाबलाराय कि सड़कों पर दर्जनों अंधे मोड़ हंै। गांव के जोड़ भी बीच में पढ़ते हैं। जहां कई बार एक्सीडेंट भी हो चुके हैं, लेकिन वहां किसी भी प्रकार के साइन बोर्ड संबंधित विभाग ने उचित नहीं समझा जिससे ग्रामीणों का सफर जोखिम भरा होता जा रहा है।

ग्रामीण ईश्वरसिंह राजपूत, सूरज वर्मा, देवराज वर्मा, भूपेंद्र माझी, अजय राजपूत, गोलू मीणा, छोटू, करणसिंह आदि ने बताया कि जो आड़े टेढ़े मोड़ है उन पर आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं। ग्राम मुवाड़ा के मुवाड़ी नदी के पास अंधा मोड़ है।

वहीं साइड में बिजली के पोल और नदी का पुल बना है। जिसके कारण कभी भी दुर्घटना घटित हो सकती है। वहीं सेमली के पास गाजीखेड़ी जोड़ के पास अंधा मोड़ है। जिस पर दुर्घटना घटित हो चुकी हैं। इन अंधे मोड़ पर सावधानी बरतने के लिए संकेतक -- बोर्ड लगाना चाहिए, लेकिन नहीं लगाए गए जिससे ग्रामीणों में हमेशा हादसे का भय बना रहता है।

[MORE_ADVERTISE3]

कुंडीखाल से भवंरा मार्ग को पक्का बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। स्वीकृति प्राप्त होते ही सड़क का निर्माण कार्य आरंभ करवा दिया जाएगा।
- राजेश श्रीवास्तव, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी