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हर माह 50 कथाएं, एक करोड़ तक खर्चा, 500 से ज्यादा को मिल रहा रोजगार

Kuldeep Saraswat

Publish: Jan 12, 2020 11:37 AM | Updated: Jan 12, 2020 11:37 AM

Sehore

जिले में हर महीने औसतन 50 धार्मिक कार्यक्रम हो रहे हैं। इनमें से ज्यादातर श्रीमद् भागवत कथा के हैं।

सीहोर. सिद्ध नगरी सीहोर मालवा का वह क्षेत्र है जहां बारहों महीने संत-फकीर और कथा वाचकों का आगमन हो रहा है। जिले में हर महीने औसतन 50 धार्मिक कार्यक्रम हो रहे हैं। इनमें से ज्यादातर श्रीमद् भागवत कथा के हैं। साथ ही श्री राम कथा, भंडारे, दुर्गा अनुष्ठान भी इसमें शामिल हैं। एक आयोजन पर औसतन करीब दो लाख रुपए खर्च होता है। इस तरह 50 आयोजनों पर एक करोड़ रुपए तक का खर्चा हो रहा है। इन कार्यक्रमों की वजह से टेंट, लाइट-माइक, फूल, ढोल, प्रसाद की दुकानों पर काम करने वाले 500 से ज्यादा व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। वर्तमान में करीब एक दर्जन श्रीमद् भागवत कथा, धार्मिक अनुष्ठान चल रहे हैं। सीहोर में रेलवे स्टेशन के पास, हनुमान फाटक, मंडी क्षेत्र, मोगराराम गांव, चाणक्यपुरी, चकल्दी, शाहगंज आदि जगह श्रीमद् भागवत कथाएं हो रही हैं। इन कथाओं में हर दिन डेढ़ से दो हजार लोग पहुंच रहे हैं। महिलाओं की मानें तो समय से पहले घर का काम करते हैं फिर कथा स्थल जाते हैं।

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नेता और सामाजिक संगठन की भी बढ़ी रुचि
धार्मिक अनुष्ठान कराने को लेकर जनप्रतिनिधि, राजनीतिक दलों के पदाधिकारी और सामाजिक संगठन की भी रुचि बढ़ी है। सीहोर में हर साल पूर्व विधायक रमेश सक्सेना अपने पैतृक गांव बरखेड़ाहसन और शहर में श्रीराम कथा, रुद्राभिषेक का आयोजन करते हैं। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जसपाल अरोरा श्रीमद भागवत का आयोजन करते हैं। विधायक सुदेश राय हर नवरात्रि में भजन संध्या और कांग्रेस के पूर्व जिला कार्यवाहन अध्यक्ष राहुल यादव, जिला पंचायत सदस्य तुलसीराम पटेल, आष्टा में धार्मिक संगठन प्रभुप्रेमी संघ द्वारा मासिक सत्संग, नसरुल्लागंज में वन विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष गुरुप्रसाद शर्मा कथा का आयोजन कराते हैं।

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नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की

माता मंदिर परिसर में श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन पंडित गोविन्दम व्यास ने कृष्ण जन्म और कंस वध के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि हमारे कर्म अच्छे होना चाहिए। कथा का श्रवण ही मानव जीवन के उद्धार की सीढ़ी है। शर्त सिर्फ इतनी है कि श्रोता की श्रद्घा कितनी गहरी है, क्योंंकि उसी गहराई के अनुसार ही भक्ति का फल मिलता है। मथुरा के राजा कंस के कारावास में वसुदेव-देवकी ने बहुत कष्ट सहन किए, लेकिन अंत में इसका परिणाम अच्छा मिला और भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ।

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- धार्मिक कार्यक्रम के चलते ऑफ सीजन में भी दुकानदारों को काम मिलता है। इस समय शादी समारोह बंद है, लेकिन धार्मिक कार्यक्रम हो रहे हैं।
नंदनकिशोर संधानी, टेंट हाउस सीहोर


- प्रभुप्रेमी संघ साल 2002 से माह के पहले सप्ताह में मासिक सत्संग का आयोजन करता है। जिसका उद्देश्य यह है कि लोग एक साथ बैठकर प्रभु का नाम लें, धार्मिक वातवरण बना रहे।
कैलाश परमार, कांग्रेस नेता व संयोजक प्रभुप्रेमी संघ

- एक धार्मिक कार्यक्रम का ऑर्डर मिलने से करीब पांच से सात हजार रुपए आय हो जाती है। महीने में दो-तीन ऑर्डर तो मिल ही जाते हैं।
धर्मेन्द्र कुशवाह, फूल व्यवसायी


- एक श्रीमद् भागवत कथा का ऑर्डर करीब 20 से 25 हजार रुपए का होता है। ऑफ सीजन में दो कार्यक्रम मिल जाते हैं तो दुकान का पूरा खर्चा और लेबर का वेतन आराम से निकल आता है। काम के साथ धर्म लाभ भी मिलता है।
रमेश राठौर, डेकोरेशन दुकानदार