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शहर और गांव की सड़क खस्ताहाल, यातनाओं भरा सफर करना बना मजबूरी

Veerendra Shilpi

Publish: Nov 03, 2019 12:08 PM | Updated: Nov 03, 2019 12:08 PM

Sehore

नागरिकों ने धरना-प्रदर्शन कर दिया ज्ञापन, फिर भी सुनवाई नहीं हुई...

सीहोर/आष्टा/सिद्दीकगंज. पक्की सड़क बनाकर सभी सुविधा मुहैया कराने के दावे की पोल आष्टा ब्लॉक के कई गांव में कच्चे मार्ग और जर्जर सड़क से आवाजाही करते लोग बता रहे हैं। इससे उनको सिर्फ यातना के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है।

वह इन सड़कों का कायाकल्प करने लगातार अफसर, जनप्रतिनिधियों को शिकायत दर्ज करा रहे हैं। लापरवाही का आलम यह है कि कोई उनकी सुनने तैयार नहीं है। जिससे उनकी मुश्किल हर दिन बढ़ती जा रही है।

आष्टा ब्लॉक के कई गांव विकास की बांट जोह रहे हैं। इनमें पक्की सड़क तक नहीं बनी है। इससे लोगों को कच्चे और उबड़-खाबड़ रास्ते से ही गिरते उठते हुए आना जाना पड़ रहा है।

बारिश के दिन में कोई बीमार हुआ तो चारपाई ही मरीजों को अस्पताल लाने सहारा बनती है। इनमें विकास कराने के दावे तो किए, लेकिन इसे बदकिस्मती कहे या फिर और कुछ की वह धरातल पर उतर नहीं पाए हैं। पिछले कुछ वर्ष से इन गांवों के लोग अपनी समस्या दूर करने संघर्ष कर रहे हैं।

इसे लेकर दर्जनों बार लिखित और मौखिक शिकायत भी दर्ज कराई है। शिकायत के समय उनको आश्वासन मिला, लेकिन वह छलावा ही साबित हुआ। खाचरोद से धुराड़ा कलां के बीच की सड़क उखड़ चुकी है। जबकि इस सड़क से प्रतिदिन एक दर्जन से अधिक गांव के लोग आते जाते हैं। इसी प्रकार अन्य जगह भी यही हाल है।

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शिकायत के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
ग्राम पंचायत खाचरोद के 500 की आबादी वाले गांव खेकाखेड़ी के लोग कई साल से पक्की सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव से पहले भी उन्होंने अपना विरोध जताया था। उसके बाद भी सड़क नहीं बनी है। इसके चलते गांव से मुख्य जोड़ के करीब एक किमी के रास्ता से उनको आवाजाही करना चुनौती भरा साबित हो रहा है।

ग्रामीण इंदर सिंह, नारायण सिंह पटेल, देवकरण, कमल सिंह ने बताया एक किमी की सड़क बनाने पांच साल में अफसर, जनप्रतिनिधियों को शिकायत दर्ज करा चुके हैं। इसके बाद भी किसी ने ध्यान नहीं दिया है। इसी तरह से धुराड़ा कला से सामरी तक की तीन किमी कच्ची सड़क होने से दिक्कत हो रही है। यहां के लोग भी सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं।

पंचायत पहुंचने नहीं पक्की सड़क
उमरदड़ धन्ना की आबादी 250 है। इस गांव से ग्राम पंचायत सामरी बौंदा जाने पक्की सड़क नहीं है। दो किमी के कच्चे रास्ते को पार करने में लोगों को कई तरह की तकलीफों का सामना करना पड़ता है।

उनकी मुसीबत उस समय ज्यादा बढ़ जाती है जब बारिश में पूरा रास्ता ही कीचड़ से सन जाता है। गांव के पूर्व सरपंच बजे सिंह ने बताया कि पक्की सड़क बनाने कहते हुए थक गए हैं। इस गांव के कच्चे रास्ते से नानजीपुरा, धुराड़ा, कोंदकपुरा, कुरली, गोविंदपुरा आदि के लोग आवाजाही करते हैं।

जिला मुख्यालय पर भी बदहाल सड़कें
जिला मुख्यालय सीहोर की कई जगह की सड़क गांव जैसी हो गई है। सड़क उखडऩे से उन पर हर कहीं गड्ढे हो गए हैं। गड्ढे भी ऐसे कि दो पहिया वाहन चालकों से चलते समय नजर हटी की दुर्घटना होने में देर नहीं लगती है। इससे लोगों को आवाजाही करने में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इन सड़कों की मरम्मत करने कई बार नागरिक अफसरों को शिकायत दर्ज कराने के साथ धरना दे चुके हैं। इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ है। पोस्ट ऑफिस चौराहा से लाल मस्जिद, जिला अस्पताल से सब्जी मंडी, तहसील चौराहा से एमएलबी सहित अन्य कई जगह की सड़क खराब हो गई है।

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जिन जगहों पर सड़क नहीं बनी है उसका स्टीमेट बनाकर शासन को भेजा है। स्वीकृति मिलते ही काम शुरू कराया जाएगा। सड़कों की मरम्मत कराई जाएगी।
- केके पाराशर, इंजीनियर पीडब्ल्यूडी आष्टा

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