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नर्मदा संगम पर तंबू लगाकर रेत का अवैध उत्खनन

Kuldeep Saraswat

Publish: Nov 07, 2019 11:58 AM | Updated: Nov 07, 2019 11:58 AM

Sehore

नीलकंठ में वैध खदान से दो किलोमीटर दूरी पर खुलेआम रेत का अवैध उत्खनन

सीहोर. बुधवार समय दोपहर दो बजे नर्मदा नदी का नीलकंठ घाट। यह वह स्थान है, जिसे नर्मदा संगम तट के नाम से जाना जाता है। धार्मिक आस्था और विश्वास के साथ अमावस्या, पूर्णिमा के दिन यहां श्रद्धालु पुण्य स्नान के लिए आते हैं, लेकिन इन दिनों यह संगम तट रेत के अवैध उत्खनन का अड्डा बना हुआ है।

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रेत माफिया नर्मदा और कोलार नदी के बीच तंबू लगाकर रेत का उत्खनन करा रहे हैं। खनिज विभाग की नीलकंठ रेत खदान यहां से करीब दो किलो मीटर दूर है। रेत माफिया खदान को छोड़कर दो किलो मीटर आगे तक से रेत निकाल रहा है, यह अफसरों को भी बता है, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही है। धार को चीर नाव के जरिए बीच नदी से रेत निकलवा रहा है। यहां पर हर समय करीब 10-15 नाव नदी से रेत निकालती रहती हैं। रेत के अवैध उत्खनन में कोई आड़े नहीं आए, इसके लिए यहां पर हर समय रेत माफिया के लोग तैनात हैं। नर्मदा संगम तट से रोज करीब 50 ट्रैक्टर-ट्रॉली रेत निकाली जा रही है। नाव के जरिए नदी से निकाली गई रेत को मजदूर ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर छिदगांव रोड पर ले जाते हैं और फिर यहां से डंपर, ट्रक में भरकर इंदौर, भोपाल और सीहोर के लिए भेजी जाती है।

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एक दिन में नर्मदा से निकल रही करीब 500 डंपर रेत
सीहोर जिले में नर्मदा नदी 110 किलो मीटर क्षेत्र से होकर गुजरी है। बुदनी, शाहगंज, रेहटी और नसरुल्लागंज क्षेत्र में हर आधा किलो मीटर की दूरी पर नर्मदा नदी से रेत निकाली जा रही है। सीहोर, इछावर और आष्टा टोल नाके के रिकॉर्ड को देखा जाए तो इस समय सीहोर जिले से रोज करीब 500 डंपर रेत लेकर बाहर जा रहे हैं। खनिज विभाग के अफसरों की माने तो इस समय 23 में से सिर्फ तीन खदान और 17 में से 8 रेत स्टॉक चालू हैं। तीन खदान और 8 रेत स्टॉक से एक दिन में 500 डंपर रेत निकलना संभव नहीं है, जिससे स्पष्ट है कि नर्मदा नदी से बड़े पैमाने पर रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है।

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रेत के अवैध उत्खनन को लेकर खास बात
- डिमावर, छिदगांव काछी, आमा, बडग़ांव, सीलकंठ, मंडी, सातदेव, टिगाली, चौरसाखेड़ी, छीपानेर, जहाजपुरा, आमली घाट, बनेटा, शाहगंज नादनेर, सरदार नगर में अवैध रूप से रेत का उत्खनन किया जा रहा है।
- खनिज विभाग के रेकॉर्ड के मुताबिक इस समय सिर्फ नीलकंठ, आमाददीज और बावरी की रेत खदान चालू है।
- सीहोर में 30 हजार और इंदौर में करीब 40 हजार रुपए का बिक रहा है रेत का एक डंपर।
- रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर कांग्रेस नेता जिला प्रशासन की भूमिका पर उठा रहे हैं सवाल।
- जिले के प्रभारी मंत्री पर भी कांग्रेस के ही नेता लगा चुके हैं रेत माफियाओं को संरक्षण देने के आरोप

कलेक्टर बदलते ही प्रतिबंध ठंडे बस्ते में
सीहोर जिले में रेत का अवैध उत्खनन लंबे समय से चर्चा में है। छह महीने पहले तत्कालीन कलेक्टर गणेश शंकर मिश्रा ने रेत के अवैध उत्खनन को रोकने काफी सख्ती की। कलेक्टर मिश्रा ने न केवल रात में रेत खदान के संचालक और डंपरों के दौडऩे पर प्रतिबंध लगाया था, बल्कि रेत के वाहनों के निकलने के लिए रूट भी निर्धारित किए थे। कलेक्टर ने रेत डंपरों की गति 40 किलो मीटर प्रतिघंटे निर्धारित करने के साथ नर्मदा नदी के 10 किलोमीटर क्षेत्र में बिना अनुमति के जेसीबी के प्रवेश करने को भी प्रतिबंधित किया था, लेकिन अब इन आदेशों पर सख्ती से अमल नहीं हो रहा है।