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यहां मरीजों को मिलती है सिर्फ मिलती है पीड़ा

Anil Kumar

Publish: Nov 07, 2019 13:04 PM | Updated: Nov 07, 2019 13:04 PM

Sehore

निजी स्तर पर व्यवस्था जुटाना मजबूरी

सीहोर.
जिले के सरकारी अस्पतालों मेें सुविधा और संसाधन के अभाव में पहले ही मरीज परेशान हैं। उनकी तकलीफ को अब टिटनेश इंजेक्शन के पड़े टोटे ने बड़ा दिया है। उनको मजबूरी में इधर उधर भटककर बाजार से इंजेक्शन लाकर लगवाना पड़ता है। इससे आर्थिक भार आ गया है। उसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अफसर अनदेखी कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ एंटी रेबिज इंजेक्शन के भी यही हाल हैं।

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जिले के सरकारी अस्पतालों में इंजेक्शन और दवाई तक डिमांड अनुसार नहीं भेजी जा रही है। इसका खामियाजा इलाज कराने आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। अब अस्पतालों में टिटनेश इंजेक्शन नहीं होने से मरीज संकट में आ गए हंै। ऐसे में दुर्घटना में घायल हुए मरीजों को यह इंजेक्शन बाजार से लाना पड़ रहा है। यह स्थिति आष्टा के सिविल अस्पताल, नसरूल्लागंज अस्पताल, जावर स्वास्थ्य केंद्र सहित अन्य में देखी जा सकती है। जबकि आष्टा अस्पताल में प्रतिदिन टिटनेश इंजेक्शन से संबंधित करीब ५० से अधिक मरीज आते हैं। नसरूल्लागंज, जावर आदि में भी यही स्थिति रहती है।

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सात हजार का टारगेट आएं सिर्फ दो हजार
अस्पतालों में एंटी रेबिज इंजेक्शन का भी यही हाल है। अप्रैल २०१९ में स्वास्थ्य विभाग ने उच्च स्तर पर सात हजार रेबिज इंजेक्शन भेजने की डिमांड भेजी थी। उसमें ६ महीने बाद सिर्फ दो हजार इंजेक्शन मिले हैं। जिनको जिलेभर के अस्पतालों को वितरण करने के बाद ही यह कुछ दिन में समाप्त हो गए हंै। ऐसे में फिर से पहले जैसी स्थिति बन गई है। मरीजों को बाजार से २०० से ३०० रुपए तक खर्च इंजेक्शन लाकर लगाना पड़ता है।

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इधर सिविल सर्जन ने फिर लिखा पत्र
जिला अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट का ट्रांसफर होने के बाद उनके स्थान पर दूसरा नहीं आने से सोनोग्राफी मशीन बंद है। जिसे चालू कराने प्रबंधन के लगातार उच्च अधिकारियों को मौखिक अवगत कराने के साथ ही पत्र लिखने का दौर जारी है। सिविल सर्जन डॉक्टर आनंद शर्मा ने ४ नवंबर को फिर स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त को पत्र लिखा है। जिसमें बकायदा मशीन चालू करने का हवाला दिया है। उल्लेखनीय है कि अस्पताल में सोनाग्राफी बंद होने से महिलाओं को निजी क्लीनिक जाना पड़ता है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन ३० से अधिक सोनोग्राफी कराने महिलाएं पहुंचती है। ऐसे में गरीब महिलाएं तो करा ही नहीं पा रही है। बता दे कि आष्टा अस्पताल में भी पिछले कई समय से सोनोग्राफी नहीं हो रही है। जबकि इसके तहत आष्टा शहर और आसपास के १५० गांव आते हैं।