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समय पर जुर्माना जमा नहीं होने से डेवलपमेंट प्रभावित

Kuldeep Saraswat

Publish: Dec 09, 2019 12:21 PM | Updated: Dec 09, 2019 12:21 PM

Sehore

आठ महीने में साढ़े 9 करोड़ के अर्थदण्ड में से महज 93 लाख 48 हजार की वसूली

सीहोर. रेत के अवैध परिवहन और उत्खनन में सीहोर जिला प्रदेश में पहले और दूसरे नंबर पर है। रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन को रोकने के लिए पुलिस, माइनिंग और राजस्व अमला कार्रवाई कर जुर्माना भी कर रहा है, लेकिन इस जुर्माने की वसूली नहीं हो रही है। अवैध उत्खनन को लेकर बीते 9 महीने में कलेक्टर ने जो जुर्माना किया है, उसमें से महज 10 फीसदी की ही वसूली हो सकी है। बीते तीन साल का रिकॉर्ड भी यही बता रहा है कि अवैध परिवहन के प्रकरण में तो वसूली हो रही है, लेकिन उत्खनन की फाइल आगे नहीं बढ़ रही हैं। नतीजा, सरकार को समय पर राजस्व नहीं मिल रहा है, जिसके असर सीधे डेवलपमेंट पर पड़ रहा है।

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जानकारी के अनुसार सीहोर जिले में एक अप्रैल से नंबवर 2019 तक अवैध उत्खनन के 102 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इन प्रकरण में 9 करोड़ 61 लाख 19 हजार 907 रुपए अर्थदण्ड लगाया गया है, जिसमें से अभी तक महज 93 लाख 48 हजार 927 रुपए की ही वसूली हो सकी है। अवैध परिवहन के प्रकरणों की स्थिति कुछ ठीक है। आठ महीने में 401 प्रकरण दर्ज कर 2 करोड़ 96 लाख 36 हजार 928 रुपए का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 2 करोड़ 15 लाख 61 हजार 928 रुपए की वसूली हुई है, करीब 80 लाख रुपए अटका है। अब सवाल यह है कि जब जुर्माना राशि की वसूली नहीं हो रही तो जब्त डंपर, पॉकलेन, जेसीबी, ट्रक और रेत कहां हैï? आशंका है कि यह वाहन बिना जुर्माना जमा कराए ही छोड़ दिए गए हैं। सीहोर जिले में कलेक्टर के फर्जी आदेश पर रेत के जब्त वाहनों छोडऩे का कारनामा पहले भी एक बार हो चुका है।

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सरकारी खजाने को राजस्व की दरकार
कर्जमाफी और बिजली बिल आधे करने से प्रदेश सरकार का खजाना खाली हो गया है। सरकार के पास पर्याप्त बजट नहीं है। बजट के अभाव में कई निर्माण कार्य रूके हुए हैं। ऐसे में राजस्व के समय पर जमा नहीं होने का असर सीधे डेवलपमेंट पर पड़ रहा है। सड़क, नाली, पुल जैसे निर्माण कार्य समय पर नहीं होने से जनता परेशान हो रही है। इस स्थिति में जरूरी है कि अफसर इसकी समीक्षा कर समय पर राजस्व जमा कराएं।
कलेक्टर के फर्जी आदेश से छोड़ दिए थे जब्त डंपर
डेढ़ साल पहले की बात है, माइनिंग ने रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन में जब्त डंपर पुलिस के सुपुर्द किए थे। रेत करोबारियों ने कलेक्ट्रेट के चपरासी और बाबू से मिलकर कलेक्टर का फर्जी आदेश तैयार कराया और पुलिस को देकर जब्त वाहन छुड़ा लिए। कलेक्टर के फर्जी आदेश से जिले के तीन थानों से आधा दर्जन जब्त डंपर छुड़ाए गए। काफी दिन बाद जब शिकायत हुई तो तत्कालीन कलेक्टर तरूण कुमार पिथौड़े ने बाबू और चपरासी के खिलाफ कार्रवाई की। इस मामले में कुछ व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। सीहोर जिले में फिर से इस तरह का फर्जीवाड़ा होने की आशंका है।

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नई नीति में तीस खदान 108.99 करोड़ का ठेका
नई रेत नीति में पहली बार समूहवार जारी टेंडरों की वित्तीय निविदा खोली गई हैं। सीहोर जिले का ठेका तेलंगाना की पॉवरमेक प्रोजेक्ट कंपनी ने लिया है। सबसे महंगा ठेका 217 करोड़ में पड़ौसी जिले होशंगााबद का रहा है। दूसरे नंबर पर सीहोर जिला 108.99 करोड़ रुपए का रहा है। सीहोर जिले में रेत की करीब तीस खदान हैं। अब इन सभी खदान का ठेका पॉवरमेक प्रोजेक्ट कंपनी के हिस्से में गया है। सीहोर जिले की रेत खदान के ठेका का ऑफसेट मूल्य 30 करोड़ रुपए रखा गया था।
एक ग्रुप और एक जिला होने से रूकेगी चोरी
एक ग्रुप पर पूरे जिले की रेत खदानों का ठेका होने के कई फायदे और नुकसान बताए जा रहे हैं। एक तरफ जहां रेत महंगी होने की आशंका है, वहीं दूसरी तक रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन रूकने की उम्मीद है। सीहोर जिले में अभी जितना वैध रेत उत्खनन नहीं हो रहा है, उससे कई गुना ज्यादा अवैध रूप से रेत का उत्खनन किया जा रहा है। रेत माफिया सीहोर जिले में रेत का अवैध उत्खनन करने के लिए दूसरे जिले की रॉयल्टी तक का उपयोग कर रहा है।
वर्जन....
- रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन में जो जुर्माना किया जाता है, वह पेनाल्टी के साथ किया जाता है। इसके लिए टाइम लिमिट तय नहीं है। कुछ लोग अपील कर देते हैं, इसलिए भी समय पर जुर्माना जमा नहीं हो पाता है।
एमए खान, जिला खनिज अधिकारी सीहोर