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बलवान वह होता है जो अपनी वाणी से सब को जीत लेता- महाराज

Anil Kumar

Publish: Jan 17, 2020 12:55 PM | Updated: Jan 17, 2020 12:55 PM

Sehore

जावर में धर्मसभा को किया संबोधित

जावर/सीहोर.
नगर को स्वच्छ बनाए रखें और नदियों को साफ रखें। वृक्षारोपण करें नारियों का सम्मान करें। नल है तो कल है, जल है तो कल है। पानी की कीमत तब होती है, जब पानी नहीं होता है। इंसान को जिस चीज का अभाव हो उस चीज की कीमत ज्यादा होती है। बलवान वह नहीं होता जो 15 फ ीट दूर खड़े होकर के वार करता है। बलवान वह होता है जो अपनी वाणी से सब को जीत लेता है। जिस तरह से पानी को छानकर पीते हैं, उसी तरह वाणी को भी छानकर बोलना चाहिए।

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यह बात जावर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य पुलक सागर महाराज ने कहीं। आचार्य ने कहा कि एक राजा था उसका बहुत बड़ा राजपाट था। उसके पास कई मंत्री, कई दासी थी। वह एक काम भी अपने हाथ से नहीं करता था, वह जहां रहता था जो मांगता था वह उसे हाजिर मिलता था। उस राजा को शिकार का शौक था। वह एक बार जंगल शिकार करने गया तो भटक गया और वहां उसे पानी की प्यास लगी। वह पूरे जंगल में पानी खोजता रहा। आवाज लगाता रहा लेकिन उस राजा की वहां किसी ने नहीं सुनी। वहां उसके पास कोई दास और कोई दासिया नहीं थी। इससे समझा जा सकता है कि पानी हमारे लिए कितना कीमती है।

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भगवान को अहंकार और घमंड पसंद नही
इधर खेरी में जारी सात दिवसीय भागवत कथा में पंडित अजय पुरोहित ने कहा कि भगवान को अहंकार और घमंड पसंद नहीं है। जब कोई अंहकार करने लगता है तो प्रभु उसका अहंकार नष्ट कर देते हैं। इंद्र देवता को भी अपने ऊपर घमंड हुआ कि बारिश करने के कारण ही पृथ्वी पर जीवन रहता है। भगवान कृ ष्ण को जब इस बात का अहसास हुआ तो उन्होंने गोकुलवासियों से कहा कि हमें इंद्र की जगह भगवान गोवर्धन की पूजा करनी चाहिए। पुरोहित ने कहा कि भगवान श्रीकृ ष्ण ने देवताओं के राजा इन्द्र का मान मर्दन किया। भगवान ने लोगों को गौवर्धन पर्वत की पूजा करने की सलाह दी। इस पर इन्द्र कु पित हो उठे। उन्होंने तेज बारिश से गोकुल व वृंदावन को तहस नहस करने की ठान ली। चारों ओर बिजली कड़कड़ाने लगी और तेज बारिश आरंभ हो गई। लोग भयभीत हो उठे। भगवान श्रीकृष्ण ने गौवर्धन पर्वत को उठा लिया। उन्होंने कहा कि कलियुग में भवसागर पार करने के लिए परमात्मा का नाम ही सहारा है। इसलिए अपने व्यस्त समय में से कुछ समय निकाल कर प्रभू के नाम का सिमरन करना चाहिए। सुमिरन करने से हमारे सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और मानव का कल्याण होता है।

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