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मरने से पहले क्या सोच रहा होता है दिमाग? सामने आया ये बड़ा राज!

Prakash Chand Joshi

Publish: Oct 03, 2019 13:31 PM | Updated: Oct 03, 2019 13:31 PM

Science and Tech

  • वैज्ञानिकों ने कुछ मरीजों के तंत्रिका तंत्र की बारीकी से निगरानी की

नई दिल्ली: इंसानी दिमाग में हर वक्त नाजाने कितना कुछ चलता है। कभी किसी अच्छी बात को लेकर, तो कभी कसी बुरी खबर को लेकर। लेकिन दिमगा हमेशा ही कुछ न कुछ सोचता रहता है। लेककिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि आखिर मरने से पहले इंसान का दिमाग क्या सोचता है?

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वैज्ञानिकों ने इस अनसुलझे राज को पता लगाने के लिए पिछले साल एक अध्ययन किया था। लेकिन ये अध्ययन अब चर्चा में बना हुआ है। इस अध्ययन में मौत के तंत्रिका-विज्ञान के बारे में कई अहम जानकारियां मिली। बर्लिन की चेरिट यूनिवर्सिटी और ओहायो की सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने जेन्स द्रेयर की अगुवाई में इस अध्ययन को किया। उन्होंने पाया कि पशु और मनुष्य दोनों के दिमाग मौत के समय एक ही तरीके से काम करते हैं। लेकिन एक वक्त ऐसा भी आता है, जब दिमगा के काम-काज की आभासी रूप से बहाली हो सकती है।

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वैज्ञानिकों की टीम इस बात को अच्छे से समझना चाहती थी कि आखिर इंसानी दिमाग में मौत के समय चलता क्या है। इसकेलिए उन्होंने कुछ मरीज़ों के दिमाग की न्यूरोलॉजिकल गतिविधियों की निगरानी की। साथ ही निर्देश भी दिए गए की मरीजों को इलेक्ट्रोड स्ट्रिप्स आदि का इस्तेमाल कर बेहोशी वापस न लाई जाए। इस दौरान उन्होंने पाया कि 9 में से 8 मरीजों के दिमागी की कोशिकाएं मौत को टालने की कोशिश कर रही थीं। साथ ही उन्होंने पाया कि दिल की धड़कन रुकने के बाद भी दिमाग की कोशिकाएं और न्यूरॉन काम कर रहे थे।

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इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने कुछ मरीजों के तंत्रिका तंत्र की बारीकी से निगरानी की। ये या तो वो लोग थे जो भीषण सड़क हादसे का शिकार हुए या फिर वो लोग जो स्ट्रोक और कार्डिएक अरेस्ट का शिकार हुए। मौत से पहले या उस समय इंसानी दिमगा असल में क्या करता है। इसकी सटीक जानकारी तो वैज्ञानिकों के हाथ नहीं लगी, लेकिन कई सवालों के जवाब उन्होंने सुलझा लिए। अध्ययन कहता है कि मौत आज जितनी अटल है, भविष्य में वैसी रही रहे ये जरूरी नहीं।