स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

बाघ के भविष्य पर वन विभाग में मंथन, एनटीसीए से निर्देश मिलने का इंतजार

Arun Kumar Verma

Publish: Sep 19, 2019 10:50 AM | Updated: Sep 19, 2019 10:50 AM

Sawai Madhopur

मंथन: बाघ टी-104 को खुले जंगल में छोड़ा जाए या नहीं?

सवाईमाधोपुर. बाघ (Tiger 104) के भविष्य को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। वन विभाग की ओर से फिलहाल सात दिनों तक बाघ को भिड में बनाए गए दो हैक्टयार के एनक्लोजर में रखा जाएगा। इसके बाद ही बाघ के भविष्य पर फैसला किया जाएगा। इस संबंध में वन विभाग के उच्चाधिकारी दिल्ली पहुंच चुके हैं।

एनटीसीए से मांगा मार्गदर्शन
बाघ के टे्रंकुलाइज होने के बाद वन अधिकारियों ने बाघ को कहां रखा जाएगा। इसे लेकर नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी(NTCA) से भी मार्गदर्शन मांगा है। बाघ के साथ आगे क्या किया जाएगा। यह सब एनटीसीए की गाइडलाइन के अनुसार ही निर्धारित होगा। यह तय है कि अब बाघ को रणथम्भौर के खुले जंगल में नहीं छोड़ा जाएगा।

पहाड़ी पर चढ़ाई गाड़ी, फिर किया टे्रंकुलाइज
वन अधिकारियों ने बताया कि शाम करीब चार बजे बाघ टे्रकिंग कर रहे वन कर्मियों को पहाड़ी के पास बाघ नजर आया। इसके बाद बाघ को टे्रंकु लाइज करने के लिए डॉट चलाया गया। डॉट लगने के बाद बाघ भाग कर पहाड़ी पर चढ़ गया। थोड़ी दूर जाने के बाद बाघ एक समतल जगह बेहोश हो गया। वन विभाग ने पहाड़ी पर ही गाड़ी चढ़ाई। इसके बाद करीब आधा किलो मीटर तक पैदल चलकर वनकर्मी मौके पर पहुंचे और स्ट्रेचर पर रखकर बाघ को नीचे लाए। इसके बाद बाघ को पिंजरे में शिफ्ट किया गया।

छठी बार टे्रंकु लाइज हुआ टी-104
बाघ टी-104 को कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र में बुधवार शाम को छठी बार टे्रंकुलाइज किया गया। वन अधिकारी बाघ की स्थिति सामान्य बता रहे हैं। रणथम्भौर के इतिहास में टी-104 को अब तक सबसे अधिक बार टे्रंकुलाइज किया जा चुका है। बाघ टी-104 रणथम्भौर के इतिहास में सबसे अधिक बार टें्रकुलाइज होने वाला बाघ भी है। विभाग की ओर से टी-104 को अब तक छह बार टे्रंकुलाइज किया जा चुका है।

पहली बार फरवरी में कुण्डेरा में महिला का शिकार करने के बाद बाघ को टे्रंकुलाइज किया गया था। इसके बाद बाघ का रेडियो कॉलर गिरने पर टें्रकुलाइज कर दोबारा रेडियो कॉलर लगाया गया था। इसके बाद यह बाघ धाकड़ा वन क्षेत्र में बाघ टी-64 के साथ संघर्ष में घायल हो गया था। इसके बाद गत दिनों बाघ को कैलादेवी अभयारण्य में टे्रंकुलाइज किया गया। फलौदी रेंज में छोडऩे गई वन विभाग की टीम का कैंटर खराब होने के कारण बाघ को टें्रकुलाइज कर पिंजरे में शिफ्ट किया गया था। अब विभाग ने बाघ को छठी बार टें्रकुलाइज किया है।

रात भर पिंजरे में रहा बाघ
वन विभाग रात करीब नौ बजे बाघ को लेकर रणथम्भौर के भिड क्षेत्र में बने एनक्लोजर के पास पहुंचा। अंधेरा होने के कारण बाघ के रिलीज की प्रक्रिया रोक दी गई। विभाग बाघ को सुबह एनक्लोजर में छोड़ेगा।