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डिग्री कॉलेज प्रबंधन ने बाण सागर से मांगी अपनी 17 एकड़ जमीन, 7 साल बाद भी पत्र पर अमल नहीं

Suresh Kumar Mishra

Publish: Jul 20, 2019 11:51 AM | Updated: Jul 20, 2019 11:51 AM

Satna

- 7 साल पहले किए गए पत्राचार का आज तक नहीं हुआ अमल
- स्टेशन रोड से नवीन भवन गहरा नाला में शिफ्ट होने के बाद पड़ी जमीन कर जरूरत
- बाण सागर प्रोजेक्ट के लिए अस्थायी तौर पर कलेक्टर ने दी थी जमीन

सतना। शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय द्वारा 7 पहले किए गए पत्राचार पर आज तक अमल नहीं हुआ है। बताया गया कि 1978 में शुरू हुए बाण सागर प्रोजेक्ट के लिए अस्थायी तौर पर कलेक्टर ने डिग्री कॉलेज का रकवा क्रमांक 56 का भाग 56/2 7.115 काबिल कास्त 17 एकड़ भूमि दे दी थी। लेकिन वर्तमान समय में सतना जिले से बाण सागर का प्रोजेक्टर खत्म हो चुका है। ऐसे में तत्कालीन प्राचार्य ने 20 दिसंबर 2012 को लिखे पत्र में उच्च शिक्षा विभाग के पीएस से लेकर कमिश्नर, कलेक्टर, सांसद, मुख्य अभियंता बाण सागर परियोजना से गुहार लगाई है। लेकिन शासन-प्रशासन ने डिग्री कॉलेज प्रबंधन के पत्र पर अमल नहीं किया। वर्तमान समय में पूरी कॉलोनी खंडहर के रूप में तब्दील हो गई है। एनएच-75 होने के कारण असमाजिक तत्वों का अड्डा बना हुआ है। जिम्मेदारों को भी कोई बड़ी घटना का इंतजार है।

स्टाप कॉलोनी के लिए घट रही जमीन
बताया गया कि पूर्व में डिग्री कॉलेज स्टेशन रोड स्थित भवन से संचालित हो रही थी। लेकिन शासकीय कन्या महाविद्यालय को भवन देने के बाद नवीन भवन गहरा नाला में शिफ्ट हो गई। ऐसे में महाविद्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए आवास निर्माण के लिए असुविधा हो रही है। ये जमीन मिलने के बाद डिग्री कॉलेज प्रबंधन आसानी से अपने स्टाप के लिए कालोनी बना सकता है।

डिग्री कॉलेज भविष्य में बन सकती है ड्रीम्ड यूनिर्वसिटी
तत्कालीन प्राचार्य ने अपने पत्राचार में बताया था कि महाविद्यालय को नैक बेंगलोर यूजीसी द्वारा स्थापित संस्था ने वर्ष 2012 में बी ग्रेड प्रदान किया था। भविष्य में ये महाविद्यालय ड्रीम्ड यूनिर्वसिटी बन सकती है। जिसका प्रस्ताव भी यूजीसी को भेजने की बात कही थी। लेकिन जिले के जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण डिग्री कॉलेज की जमीन सात साल के पत्राचार के बाद भी वापिस नहीं हुई।

असमाजिक तत्वों का अड्डा
सूत्रों की मानें तो रीवा रोड स्थित बाण सागर कालोनी वर्तमान समय में असमाजिक तत्वों का अड्डा बनी हुई है। इस परिसर में कोई भी बिना रोक-टोंक आ और जा सकता है। जर्जर मकान और झाडिय़ों के बीच शरारती तत्व अपना सुरक्षित अड्डा बनाए हुए है। जब पत्रिका संवाददाता खुद कॉलोनी में पहुंचकर वस्तुस्थिति जाननें की कोशिश की तो परिसर में बकरियां मंडरा रही थी। नई बस्ती आने-जाने के लिए कई शार्टकट मार्ग बने हुए थे। कॉलोनी में कोई जिम्मेदार नहीं।

पुरवा और बरगी-नर्मदा के लग रहे कार्यालय
पूछताछ में एक कालोनी की महिला ने बताया कि वर्तमान समय में बाण सागर परियोजना कार्यालय के आधीन पुरवा नहर संभाग क्रमांक-2 और अनुविभागीय अधिकारी क्रमांक-2 एवं 4 कार्यालय लगता है। वहीं बरगी-नर्मदा परियोजना से जुड़े एक कर्मचारी ने बताया कि बरगी-नर्मदा परियोजना का कार्यालय भी इस समय लग रहा है। वहीं एक कार्यालय नागौद में भी बनाया गया है।