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बोरवैल में जिंदगी की जंग हार गया दो साल का फतेहवीर, काम न आई रेस्क्यू टीम की कोई युक्ति, लोगों ने किया विरोध प्रदर्शन

Prateek Saini

Publish: Jun 11, 2019 17:39 PM | Updated: Jun 11, 2019 17:39 PM

Sangroor

फतेहवीर के शव को उसके गांव ले जाये जाने पर मां और दादी उसे देखते ही बेहोश हो गईं...

(चंडीगढ,संगरूर): पंजाब के संगरूर जिले के गांव भगवानपुरा में पिछले छह जून की शाम करीब चार बजे डेढ सौ फीट गहरे बोरवैल में गिरा दो साल का फतेहवीर आखिर जिंदगी की जंग हार गया। फतेहवीर को बोरवैल से निकालने के लिए 109 घंटे ऑपरेशन चलाया गया था। फतेहवीर को आज सुबह करीब पांच बजे बोरवैल से बाहर निकाला गया। स्थानीय अस्पताल में जांच के बाद उसे चंडीगढ पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एण्ड रिसर्च में लाया गया लेकिन यहां उसे मृृत घोषित कर दिया गया।


फतेहवीर के शव को उसके गांव ले जाये जाने पर मां और दादी उसे देखते ही बेहोश हो गईं। पिता और दादा भी खुद को संभाल नहीं पा रहे थे। रीति-रिवाज के बाद फतेहवीर का अंतिम संस्कार कर दिया गया। फतेहवीर के पिता सुखविंदर सिंह ने मुखाग्नि दी। बडी संख्या में लोगों ने नम आंखों से फतेहवीर को विदाई दी।

 

फतेहवीर

मुख्यमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा कि बच्चे की मौत से में दुखी हू। वाहे गुरू इस घडी में बच्चे के माता-पिता को हिम्मत दें। ऑपरेशन की कडी मशक्कत और तमाम प्रदेशवासियों की दुआओं के बावजूद फतेहवीर जिंदगी की जंग हार गया। फतेहवीर के बोरवैल से बाहर आने से पहले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने ट्वीट कर कहा था कि पंजाब सरकार फतेहवीर के परिवार के साथ खडी है। राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन बल और संगरूर जिला प्रशासन के अथक प्रयास नाकाम रहे और फतेहवीर को जीवित नहीं निकाला जा सका। अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखवीर बादल ने फतेहवीर को निकालने के तरीके की कडी आलोचना की थी।

 

अंत में मानी लोगों की सलाह, हो गई देर

भगवानपुरा के लोगों ने गुरूवार रात संगरूर जिला प्रशासन से सम्पर्क कर कहा था कि वे लोहे के पाईप पर हुक लगाकर बच्चे को बाहर खींच सकते है लेकिन प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। प्रशासन और आपदा प्रबन्धन कार्यबल ने सोमवार रात यह सुझाव देने वाले व्यक्ति को बुलाया और लोहे के पाईप से ही बच्चे को बाहर खिचवाया। फतेहवीर के आवास के बाहर खडे लोगों ने लोहे का पाईप दिखाते हुए कहा कि यदि यह विधि अपनाने की अनुमति पहले दी गई होती तो आज फतेहवीर को जीवित निकाल लिया गया होता।

 

लेकिन संगरूर के उपायुक्त ने ऐसी किसी विधि को अपनाने से इनकार किया और कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबन्ध बल पेशेवर बल है। उन्होंने गुरूवार रात बच्चे के हाथ रस्सी से बाधे थे लेकिन उसे खींचा नहीं जा सका। आपदा प्रबन्धन बल रोजाना दिन में दो बार यह तरीका अपना रहा था। बच्चा बोरवैल में 125 फीट की गहराई में फंसा हुआ था। आपदा प्रबन्धन बल ने बोरवैल के समानान्तर बोरवैल खोद कर बच्चे के आसपास जगह बनाई थी। आपदा प्रबन्धन बल ने पहली बार अपनाए गए तरीके से ही बच्चे को बाहर खींच लिया था।

 

बच्चे के मृत पाये जाने पर भगवानपुरा के लोगों ने सुनाम रोड पर जाम लगा दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार व संगरूर प्रशासन बच्चे को बचाने में नाकाम रहे। वे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। अधिकारियों ने अपने प्रयोगों के चलते बचाव ऑपरेशन में देरी की। आपदा प्रबन्धन बल ने स्थानीय लोगों को देशी तकनीक से बच्चे को बाहर निकालने की अनुमति नहीं दी। पिछले तीन दिन से बोरवैल के पास ही डेरा डाले पंजाब के केबिनेट मंत्री विजय इंदर सिंगला ने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने बच्चे को बचाने के लिए हर संभव कदम उठाया है। दुखद घटना पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए।

रेस्क्यू टीम ने कर दी गफ़लत

rescue

प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार रात तक बोरवैल के समानान्तर सौ फीट गहरी सुरंग खोद दी गई थी लेकिन जब उसे बोरवैल से मिलाया गया तो उसकी दिशा गलत हो गई थी। इसका मिलान दूसरे बोरवैल से हो गया। इसके बाद नई सुरंग खोदी गई तो उसकी गहराई पुराने बोर से ज्यादा हो गई।