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Shardiya Navratri 2019: कन्या पूजन का है विेशेष महत्व, जानिए सही विधि

shivmani tyagi

Publish: Oct 05, 2019 04:30 AM | Updated: Oct 05, 2019 00:42 AM

Saharanpur

Highlights

  • कन्या पूजन काे ही कहते हैं नवरात्र पूजन भी
  • सभी नवरात्र का फल मिलता है कन्या पूजन से
  • नवरात्र के बाद जाने कन्या पूजन की सही विधि

 

सहारनपुर। Shardiya Navratri 2019 अगर आपने भी नवरात्र व्रत रखे हैं ताे जान लीजिए कि कन्या पूजन सभी व्रतों का फल है। अगर आप अपने नवरात्र व्रतों का पूरा फल चाहते हैं ताे सही विधि से कन्या पूजन कीजिए आपकाे अपने व्रतों का फल प्राप्त हाेगा और मां दुर्गा आपसे जरूर प्रसन्न हाेंगी।

ज्योतिषाचार्य पंडित रोहित वशिष्ठ के अनुसार सनातन धर्म में शारदीय नवरात्र के उपरांत छोटी-छोटी कन्याओं को मां भगवती का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। कन्या पूजन के बाद ही व्रत पूर्ण माने जाते हैं। देवी भागवत में कन्या काे मां भगवती का रूप माना गया है। धर्म शास्त्रों में ताे यहां तक कहा गया है कि "जिस घर में कन्या नहीं होती वह घर पूर्ण नहीं हाेता " कन्या को सनातम धर्म में सौभाग्य का प्रतीक माना गया है।

कन्या पूजन करते समय इन बाताें का रखें ध्यान

  • नवरात्र के बाद कम से कम 2 वर्ष या अधिक से अधिक 9 वर्ष तक की कन्या का ही पूजन करना चाहिए।
  • कन्या पूजन करते समय कन्याओं में वर्ण भेद बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
  • देवी भागवत में कहा गया है चारों वर्ण की कन्याएं एक समान हैं और सभी का पूजन किया जा सकता है।
  • कन्याओं को अपने घर बुलाकर प्रतीक्षा नहीं करानी चाहिए उनके आते ही उन्हें भोजन आदि अर्पण कर देना चाहिए।
  • कुछ लोगों का स्वभाव हाेता है कि वह छोटी-छोटी कन्याओं को जानबूझकर देर तक रोके रखते हैं ऐसा नहीं करना चाहिए।
  • सर्वप्रथम कन्याओं के चरण शुद्ध जल से धोने चाहिए
  • हमेशा उन्हे बैठाकर ही उनके चरण धुलने चाहिए
  • खड़े खड़े चरण धोने से देवी का अपमान होता है, इसलिए कन्याओं के चरण आसन पर बिठाकर धोने चाहिए
  • सुंदर आसन पर कन्याओं को बिठाकर उनको तिलक करें
  • कन्याओं के दाहिने हाथ में कलावा बांधे
  • कन्याओं को सबसे पहले मीठा अर्पण करें।
  • इसके पश्चात पवित्रता एवं भक्ति भाव से बनाए हुए अन्न को अर्पण करना चाहिए
  • देवी के भोग में लहसुन प्याज का प्रयोग नहीं होता इसलिए सात्विक भाेजन ही अर्पण करें।
  • कन्याओं को दक्षिणा देकर उन्हें प्रणाम जरूर करें।
  • कन्या पूजन करते समय कन्या रक्षा का संकल्प भी लें

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