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जब छात्राओं की सुरक्षा का जिम्मा नहीं उठा सकते थे तो फिर क्यों बनाया २ करोड़ खर्च कर हॉस्टल

Aakash Tiwari

Publish: Oct 21, 2019 09:01 AM | Updated: Oct 20, 2019 20:48 PM

Sagar

-आइटीआइ परिसर में दो साल पहले बने कन्या छात्रावास में नहीं रह रही बाहरी छात्राएं, सुरक्षा की कमी का हवाला देकर एक साल से ताले में बंद छात्रावास भवन

 

सागर. आइटीआई में दाखिला पा चुकी बाहरी छात्राओं को हॉस्टल में जगह नहीं दी जा रही है। मजबूरी में इन छात्राओं को शहर में किराय के मकान में रहना पड़ रहा है। परिसर में २ करोड़ २१ लाख रुपए की लागत से हॉस्टल भवन बना हुआ है। इसमें छात्राओं के लिए पलंग, कुर्सी टेबल आदि की पूरी व्यवस्था है, लेकिन प्रबंधन ने छात्राओं की सुरक्षा न कर पाने का बहाना बनाकर छात्रावास में ताला जड़वा दिया है। एक साल से यह छात्रावास खाली पड़ा हुआ है। इधर, बच्चियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से परिजनों के मन में चिंता बनी रहती है। कई परिजन महीने में ३ से ४ बार बच्चियों से मिलने आते हैं।

-दो साल पहले बना था हॉस्टल

आइटीआइ परिसर में वर्ष २०१७ में यह छात्रावास भवन तैयार हुआ था। इसमें ६० छात्राओं के रहने के लिए कमरे बनाए गए हैं। हर कमरे में दो पंलग की व्यवस्था है। साथ ही टॉयलेट, किचिन की भी बेहतर सुविधा है। एक साल पहले यह छात्रावास बंद कर दिया गया था। हर कमरों में रखे गए पलंग, कुर्सी टेबलों को उठवाकर हॉल में रखवा दिया गया है। पत्रिका ने जब हॉस्टल का जायला लिया तो कीमती फर्नीचर स्टोर रूम में कबाड़ की तरह पड़े हुए मिले। नियमित सफाई न होने से हॉस्टल भवन के अंदर गंदगी का अंबार लग चुका है।
-इसलिए छात्राओं को बाहर कर खाली किया छात्रावास

डेढ़ साल इस छात्रावास में छात्राएं रहा करती थी। उन्हीं दिनों एक घटना हुई, जिसने छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। बताया जाता है कि एक युवक छात्रावास के अंदर दाखिल हो गया। युवक छात्रावास में रहने वाली एक लड़की से मिलने आया था। यह बात प्राचार्य को मालूम चली तो उन्होंने छात्रावास में सर्चिंग कराई, जहां युवक पकड़ा गया। युवक के खिलाफ पुलिस ने भी मामला दर्ज किया था। प्राचार्य ने सुरक्षा बढ़ाने की जगह उसी दिन छात्रावास में रहने वाली छात्राओं को बाहर कर दिया।
-एेसे में कैसे होगी छात्राएं सुरक्षित

किसी भी कॉलेज या स्कूल में बनाया गया छात्रावास परिसर के अंदर बना होता है। वहीं, छात्रावास तक पहुंचने के लिए सिर्फ मैनगेट से एंट्री होती है। दूसरा कोई रास्ता नहीं होता है। लेकिन आइटीआई में बना यह छात्रावास छात्राओं की सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं बना हुआ है। कहने को तो मैनगेट से काफी अंदर यह बना हुआ है। लेकिन जहां बना है उससे ठीक २० कदम दूरी पर छोटी बाउंड्रीबॉल बनाई गई है। हैरानी की बात यह है कि वहां पर दो जाली वाले गेट भी बनाए गए हैं। उन्हें लांघकर कोई भी आसानी से अंदर दाखिल हो सकता है।
-कबूतर मरे पड़े भवन में

रखरखाव न होने से एक ओर भवन जर्जर हालत में पहुंच रहा है। वहीं, भवन में बड़ी संख्या में कबूतरों ने डेरा जमा रखा है। भवन के अंदर कई कबूतर भी मरे पड़े हैं। कबूतरों द्वारा फैलाई जा रही गंदगी से हॉस्टल में बदबू ही बदबू है। छत, गैलरी और कमरों में शाम ढलते ही कबूतरों का आना शुरू हो जाता है। रात भर उनकी आवाजें गूंजती रहती है।

फैक्ट फाइल

भवन की लागत- २ करोड़ २१ लाख
कमरों की संख्या-३०

एक कमरे में- २ छात्राओं की व्यवस्था


हमारे पास अधीक्षक और वार्डन और गार्ड के पद खाली पड़े हैं। इस कारण से छात्रावास संचालित नहीं करा पा रहे हैं। पद भरने के लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है।

ओम प्रकाश विश्वकर्मा, प्राचार्य आइटीआई