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नीले बादलों के रहस्य से पर्दा उठाएंगे विवि के वैज्ञानिक, सेटेलाइट से संपर्क टूटने के लिए तरंगे जिम्मेदार

Aakash Tiwari

Publish: Nov 14, 2019 07:03 AM | Updated: Nov 13, 2019 21:25 PM

Sagar

-डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि में ३४ वर्षों से जारी रिसर्च में सौ से अधिक हो चुके जरनल प्रकाशित, कई देश के वैज्ञानिक विवि के अध्ययन के आधार पर अंतरिक्ष में होने वाली घटनाओं से दुनिया पर पडऩे वाले प्रभावों को जानने में जुटे।

सागर. अंतरिक्ष में स्थापित सेटेलाइट्स से संपर्क टूटने की वजहों और अंतरिक्ष में होने वाली घटनाओं से पृथ्वी पर पडऩे वाले दुष्प्रभावों को लेकर डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि में वैज्ञानिकों का दल अध्ययन में जुटा है। अंतरिक्ष में स्थापित सेटेलाइट्स से संपर्क टूटने के संबंध में वैज्ञानिकों का दावा है कि यह परेशानी सिग्नल के बीच तरंगों के आने से होती है। इसको लेकर अध्ययन पूरा भी हो गया है। इसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जरनल प्रकाशित भी हुआ है। वहीं, वैज्ञानिक नीले बादलों का रहस्य जानने की कोशिश में जुटे हैं। हालही में सेवानिवृत्त हुए प्रो. एमएस तिवारी बताते हैं कि अंतरिक्ष में एक घटना हुई थी, जिसे औरोरा कहते हैं। इसमें उत्तरी और दक्षिणी धु्रव में बादल अचानक नीले रंग के हो गए थे। यह स्थिति बीच-बीच में बनती है। प्रो. तिवारी की माने तो विवि में रिसर्च इसी आधार पर शुरू की गई थी। उन्होंने बताया कि कभी कभी सूरज की ऊर्जा में अचानक बढ़ोत्तरी होती है। इस वजह से अति सूक्ष्म आयनों के घर्षण के कारण बादल नीले रंग के हो जाते हैं। रिसर्च से हम यह मालूम करने की कोशिश कर रहे हैं कि इससे पृथ्वी पर क्या-क्या दुष्प्रभाव पड़ सकता है। विवि के वैज्ञानिकों ने इस पर अध्ययन किया है और इसके जरनल प्रकाशित भी हुए हैं। इन पर अब कई देशों के वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं।
-तरंगों के कारण टूटता है संपर्क
वैज्ञानिक दल ने सेटेलाइट से संपर्क टूटने के कारणों का पता लगा लिया है। दल का दावा है कि कई तरंगे एेसी हैं, जिनके आसपास से सेटेलाइट के लिए धरती से सिग्नल भेजे जाते हैं। इस वजह से कई बार तरंगे सिग्नल के बीच आ जाती हैं और सिग्नल प्रभावित हो जाते हैं। अब वैज्ञानिक इस पर रिसर्च कर रहे हैं कि जहां-जहां यह तरंगे हैं वहां से सिग्नल भेजने की जगह दूसरी जगह से सिग्नल भेजे जाएं। ताकि अंतरिक्ष में स्थापित सेटेलाइट से कनेक्टीविटी बनी रहे। -ट्रांस्फार्मर ब्लास्ट होते हैं क्यो? बिजली कंपनी द्वारा लगाए जाने वाले ट्रांस्फार्मर ब्लास्ट होते हैं। इसे भी इस अध्ययन के जरिए वैज्ञानिक जानने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, टेलीफोन लाइन में सिग्नल न मिलने की समस्या और अन्य दूर संचार सेवाओं में आ रही तकनीकी गड़बडि़यों को भी जानने की कोशिश की जा रही है।
-इन देशों में विवि के वैज्ञानिकों के अध्ययन पर चल रही रिसर्च
रिटायर्ड प्रो. तिवारी बताते हैं कि जितने भी जरनल प्रकाशित हुए हैं वह सभी गेट वेबसाइट पर अपलोड किए गए हैं। इनको दुनिया भर के कई देशों के वैज्ञानिकों द्वारा पढ़ा जा रहा है। कई देश के वैज्ञानिक इसी आधार पर अंतरिक्ष में होने वाली घटनाओं से दुनिया पर पडऩे वाले प्रभावों को जानने के लिए रिसर्च में जुटे हैं। कनाडा, अमेरिका, ब्रटेन, नीदरलैंड आदि देशों के वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं।
वर्जन
अंतरिक्ष में स्थापित सेटेलाइट्स से संपर्क टूटने की वजहों और अंतरिक्ष में होने वाली घटनाओं से पृथ्वी पर पडऩे वाले दुष्प्रभावों को जानने के लिए रिसर्च की जा रही है। इसमें वरिष्ठ शोध स्कॉलर के रूप में राधा ताम्रकार रिसर्च का हिस्सा हैं। हमारे द्वारा इस रिसर्च से संबंधित कई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जरनल प्रकाशित हुए हैं, जिन पर कई देशों के वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं।
प्रो. पूर्णिमा वर्मा, महिला वैज्ञानिक फिजिक्स विभाग

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